भारतीय सौर नववर्ष, जिसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है, 14 अप्रैल 2026 को मनाया जाएगा। यह तब होता है जब सूर्य मीन राशि से मेष राशि में गोचर करते हैं।
Solar New Year 2026: सूर्य के मेष राशि में आते ही शुरू होगा नए ऊर्जा का दौर, शुभता के लिए करें ये काम
Solar New Year 2026: 14 अप्रैल को सूर्य के मेष राशि में गोचर करते ही नए सौर वर्ष की शुरुआत होगी और कई राज्यों में नववर्ष मनाया जाएगा. सौर नववर्ष पर सूर्य उपासना, मंत्र जाप और दान आदि करना शुभ होता है.

- 14 अप्रैल 2026 को मेष संक्रांति पर सौर नववर्ष मनेगा।
- इस दिन से खरमास समाप्त, शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।
- सौर नववर्ष पर सूर्य देव की उपासना से मिलेगा लाभ।
- जरूरतमंदों को गुड़, गेहूं या लाल वस्त्र दान करें।
Solar New Year 2026: सूर्य जिस दिन मीन राशि से निकलकर मेष राशि में गोचर करते हैं, उस दिन को मेष संक्रांति (Mesh Sankranti) के रूप में मनाया जाता है. मेष संक्रांति को भारतीय सौर नववर्ष का प्रतीक माना जाता है. इस साल सौर नववर्ष या मेष संक्रांति मंगलवार, 14 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी.
भारतीय कैलेंडर दो मुख्य पद्धतियों सौर (Solar) और चंद्र (Luni Solar) पर आधारित हैं. सौर कैलेंडर के अनुसार सूर्य की स्थिति के अनुसार, मेष संक्रांति पर सौर नववर्ष मनाया जाता है. इस दिन कई राज्यों के कैलेंडर भी नववर्ष की शुरुआत होती है.
मेष संक्रांति पर कई राज्यों में नया साल
चंद्र वर्ष के अनुसार, चैत्र शुक्ल की प्रतिपदा पर हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर), गुड़ी पड़वा (मराठी नया साल), उगादि (तमिल नया साल) और चेटीचंड आदि मनाया जाता है. इसी तरह सौरवर्ष में बैसाखी (पंजाबी नया साल), पना संक्रांति, बोहाग बिदू, बिखोती, पोईला बोइसाख (बंगाली नया साल), तमिल नया साल आदि मनाए जाते हैं.
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सौर नववर्ष का महत्व (Solar New Year Importance)
सौर नववर्ष यानी मेष संक्रांति का दिन सबसे शुभ माना जाता है. इस दिन एक ओर जहां कई राज्यों में सौर कैलेंडर के अनुसार, नया साल मनाया जाता है. वहीं सूर्य के मेष राशि में आते ही खरमास (Kharmas 2026 End) भी समाप्त हो जाता है. इसलिए इस दिन को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. सूर्य का मेष राशि में आना केवल सौर नववर्ष ही नहीं, बल्कि जीवन में नई शुरुआत, ऊर्जा और उत्साह का भी संदेश देता है. यह समय अपने लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करने, आत्मविश्वास बढ़ाने और नई योजनाओं पर काम शुरू करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
ज्योतिषाचार्य इस पुण्य दिन पर धार्मिक कार्य और विशेषकर सूर्य देव की उपासना करने की सलाह देते हैं, जिससे कि इस शुभ अवसर का अधिक से अधिक धार्मिक लाभ उठाया जा सके. कई लोग इस शुभ दिन पर पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, पूजा पाठ करते हैं और दान करते हैं.
सौर नववर्ष पर करें सूर्य उपासना
- सौर नववर्ष के साथ ही सकारात्मक और नए ऊर्जा के समय की भी शुरुआत होती है. इसलिए इस दिन सूर्य देव की पूजा करनी चाहिए.
- मेष संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें. इसके बाद तांबे के कलश में जलभरे, लाल फूल, गुड़ और चंदन डालकर सूर्य को अर्घ्य दें.
- सूर्य संक्रांति पर भगवान सूर्य का आशीर्वाद पाने के लिए सूर्य नमस्कार भी कर सकते हैं. इससे सूर्य की ऊर्जा का आपके जीवन पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.
- गरीब और जरूरतमंदों में गुड़, गेहूं या लाल वस्त्र का दान करें.
सूर्य मंत्रों का करें जाप (Surya Dev Mantra)
ॐ सूर्याय नमः॥
ॐ मित्राय नमः॥
ॐ घृणि सूर्याय नमः॥
ॐ सूर्यनारायणायः नमः।
'ॐ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्नो सूर्य प्रचोदयात'
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Frequently Asked Questions
भारतीय सौर नववर्ष कब मनाया जाता है?
मेष संक्रांति का क्या महत्व है?
मेष संक्रांति को अत्यंत शुभ माना जाता है क्योंकि इसी दिन खरमास समाप्त होता है और सौर नववर्ष की शुरुआत होती है। यह नई शुरुआत, ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक है।
सौर नववर्ष पर सूर्य उपासना क्यों की जाती है?
सौर नववर्ष सकारात्मक और नई ऊर्जा का समय होता है, इसलिए इस दिन सूर्य देव की पूजा करने की सलाह दी जाती है। इससे जीवन में सूर्य की ऊर्जा का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मेष संक्रांति के दिन कौन से धार्मिक कार्य किए जाते हैं?
इस दिन लोग सूर्य देव की उपासना करते हैं, पवित्र नदियों में स्नान करते हैं, पूजा-पाठ करते हैं और दान करते हैं। सूर्य को जल अर्घ्य देना भी शुभ माना जाता है।
Source: IOCL



















