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सोशल मीडिया और युद्ध का मनोविज्ञान: क्या सच में 'जादू-टोना' और 'दैवीय प्रकोप' बदल रहे हैं ईरान-इजराइल का भविष्य?

Iran Srael War: ईरान-इजराइल तनाव के बीच सोशल मीडिया पर जादू-टोना और दैवीय शक्तियों के वायरल दावे क्यों फैल रहे हैं? जानिए युद्ध के पीछे छिपा डिजिटल प्रोपेगैंडा और मनोवैज्ञानिक खेल.

Iran Srael War: आज की डिजिटल दुनिया में युद्ध अब केवल सीमाओं और सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रह गए हैं. वे हमारे स्मार्टफोन की स्क्रीन, सोशल मीडिया फीड और हमारे विश्वासों के भीतर भी लड़े जा रहे हैं. हाल के दिनों में ईरान और इजराइल के बीच बढ़े तनाव के बीच इंटरनेट पर एक नई तरह की लहर दिखाई दे रही है, जहां सैन्य विश्लेषकों की जगह रहस्यवादियों और स्वयंभू भविष्यवक्ताओं की चर्चा तेजी से बढ़ रही है.

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कई वीडियो और पोस्ट ऐसे दावे कर रहे हैं कि किसी प्रतीक को तोड़ने, मूर्ति जलाने या कथित ‘जादू-टोना’ करने की घटनाओं का सीधा संबंध इजराइल- ईरान के मौजूदा संकट से है. इन दावों ने कई लोगों के मन में सवाल खड़े कर दिए हैं. क्या सच में कोई रहस्यमयी शक्ति काम कर रही है, या फिर यह आधुनिक सूचना-युद्ध का नया रूप है?

अफवाहों का बाजार और 'साइकोलॉजिकल वॉरफेयर'

किसी भी बड़े भू-राजनीतिक संघर्ष के दौरान गलत सूचना (Misinformation) का फैलना नई बात नहीं है. युद्ध की अनिश्चितता लोगों में डर और असुरक्षा पैदा करती है, और यही माहौल अफवाहों को तेजी से फैलने का अवसर देता है.

वैश्विक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष के दौरान सोशल मीडिया पर बड़ी मात्रा में अप्रमाणित दावे और वीडियो सामने आते रहे हैं, जो अक्सर वास्तविक घटनाओं से अलग नैरेटिव गढ़ने का काम करते हैं. बड़े और प्रतिष्ठित मीडिया हाउस की कई रिपोर्ट्स इस बात की ओर संकेत करती हैं कि युद्ध के समय डिजिटल प्रोपेगैंडा और अफवाहें तेजी से फैलती हैं.

जब हम देखते हैं कि किसी प्रतीकात्मक घटना के बाद किसी देश की स्थिति खराब हो गई, तो हमारा दिमाग दोनों घटनाओं को जोड़ने की कोशिश करता है. मनोविज्ञान में इसे Appophenia कहा जाता है, जिसमें इंसान असंबंधित घटनाओं के बीच भी पैटर्न खोजने लगता है. वास्तविकता यह है कि ईरान की वर्तमान स्थिति अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों, आंतरिक राजनीतिक संघर्षों और क्षेत्रीय सैन्य रणनीतियों का परिणाम है, न कि किसी प्रतीकात्मक घटना का अलौकिक प्रभाव.

वायरल वीडियो: सच्चाई बनाम कल्पना

सोशल मीडिया पर तैर रहे वे वीडियो, जिनमें जादू-टोने या रहस्यमयी क्रियाओं की बात कही जा रही है, अक्सर संदर्भ से काटकर पेश किए जाते हैं.

  • पुराने वीडियो का नया इस्तेमाल: कई बार किसी स्थानीय धार्मिक परंपरा या सांस्कृतिक कार्यक्रम के पुराने वीडियो को नए युद्ध संदर्भ से जोड़ दिया जाता है.
  • एआई (AI) का बढ़ता प्रभाव: जनरेटिव एआई के दौर में नकली या एडिट किए गए वीडियो इतनी आसानी से बनाए जा सकते हैं कि आम दर्शक के लिए असली और नकली में फर्क करना मुश्किल हो जाता है.

फैक्ट-चेक संगठनों ने कई मौकों पर बताया है कि युद्ध या राजनीतिक संकट के समय पुराने वीडियो और फोटो को नए संदर्भ में वायरल कर दिया जाता है, जिससे भ्रम फैलता है.

'बाल' की मूर्ति और मिथकों की राजनीति

सोशल मीडिया पर यह भी दावा किया जा रहा है कि किसी प्रतीकात्मक मूर्ति जैसे 'बाल' (Baal) को जलाने या तोड़ने की घटनाओं के बाद ईरान की स्थिति बिगड़ गई.

हालांकि इन दावों का कोई ठोस प्रमाण सामने नहीं आया है. किसी प्रतीक को नष्ट करने और किसी देश के राजनीतिक या आर्थिक संकट के बीच सीधा संबंध स्थापित करना तार्किक नहीं माना जा सकता.

लेकिन राजनीति में प्रतीकों का उपयोग बेहद प्रभावशाली होता है. कई बार ऐसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन जनता की भावनाओं को प्रभावित करने, धार्मिक पहचान को मजबूत करने और राजनीतिक संदेश देने के लिए किए जाते हैं. इस तरह की symbolic politics पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी व्यापक चर्चा होती रही है, जिसमें संघर्षों के दौरान प्रतीकों के इस्तेमाल को मनोवैज्ञानिक रणनीति का हिस्सा बताया गया है. 

ट्रंप की प्रार्थना और धर्म का राजनीतिकरण

हाल ही में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump का एक वीडियो भी चर्चा में आया, जिसमें वे ओवल ऑफिस में पादरियों के साथ प्रार्थना करते दिखाई देते हैं.

अमेरिकी राजनीति में धर्म लंबे समय से एक प्रभावशाली तत्व रहा है. ऐसी सार्वजनिक प्रार्थना सभाएं कई बार केवल आध्यात्मिक गतिविधि नहीं होतीं, बल्कि राजनीतिक संदेश भी देती हैं. इनके माध्यम से नेता अपने समर्थकों को यह संकेत देते हैं कि उनकी राजनीति नैतिक और धार्मिक मूल्यों से जुड़ी हुई है.

हालांकि इस तरह की घटनाओं को किसी चमत्कारिक रणनीति या युद्ध की दिशा बदलने वाली शक्ति से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है.

 

हम जागरूक कैसे बनें?

सूचना-युद्ध के इस दौर में एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में कुछ सावधानियां जरूरी हैं.

स्रोतों की जांच करें
क्या जानकारी किसी विश्वसनीय समाचार संस्था या विशेषज्ञ द्वारा साझा की गई है?

संदर्भ समझें
किसी वीडियो या पोस्ट के कैप्शन पर तुरंत विश्वास न करें. यह जानने की कोशिश करें कि वह कब और कहां रिकॉर्ड किया गया था.

भावनाओं पर नियंत्रण रखें
ऐसी खबरें अक्सर डर, गुस्सा या चमत्कार जैसी भावनाओं को भड़काने के लिए बनाई जाती हैं.

तथ्यों को प्राथमिकता दें
युद्ध वास्तविक रणनीतियों, कूटनीति, तकनीक और आर्थिक शक्ति से प्रभावित होते हैं, न कि अंधविश्वास से.

ईरान-इजराइल का तनाव निश्चित रूप से दुनिया के लिए चिंता का विषय है. लेकिन इसे जादू-टोने या दैवीय प्रकोप के चश्मे से देखना वास्तविक कारणों से ध्यान हटाने जैसा है.

सोशल मीडिया पर चल रही रहस्यमयी कहानियां अक्सर केवल शोर होती हैं, जो असली घटनाओं को धुंधला कर देती हैं. डिजिटल युग में सबसे बड़ा हथियार केवल तकनीक नहीं, बल्कि जानकारी भी है.

इसलिए जरूरी है कि हम हर वायरल दावे को तुरंत सच न मानें. जांच करें, संदर्भ समझें और तभी किसी जानकारी को साझा करें. क्योंकि कई बार जो कहानी हमें सबसे ज्यादा चमत्कारी लगती है, वही सबसे बड़ा प्रोपेगैंडा भी हो सकती है.

यह भी पढ़ें- Israel-Iran War: 20 मार्च क्यों बन सकता है युद्ध का सबसे खतरनाक मोड़? ज्योतिष दे रहा चौंकाने वाले संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

हृदेश कुमार सिंह । Hirdesh Kumar Singh 

Senior Vedic Astrologer । Head – Religion & Astrology, ABP Live । Lead – ABP Dharma LIVE

हृदेश कुमार सिंह वरिष्ठ वैदिक ज्योतिषाचार्य और मीडिया पेशेवर हैं. उन्हें ज्योतिष, धर्म और मीडिया के क्षेत्र में 17 साल से अधिक का अनुभव है. वर्तमान में वे ABP Live में Religion & Astrology वर्टिकल का नेतृत्व करते हैं. साथ ही ABP Dharma LIVE की कंटेंट और डिजिटल रणनीति की जिम्मेदारी संभालते हैं.

उनके काम में ज्योतिषीय लेखन, संपादन, वेबसाइट और वीडियो के लिए विषय चयन तथा संपादकीय योजना शामिल है. वे Search, Google Discover और सोशल मीडिया पर पाठकों की रुचि को ध्यान में रखकर धर्म और ज्योतिष की कवरेज तय करते हैं.

पंचांग, राशिफल, ग्रह गोचर, व्रत-त्योहार और धार्मिक परंपराएं उनके लेखन के प्रमुख विषय हैं. वे करियर, विवाह, शिक्षा और व्यापार से जुड़े सवालों पर भी लिखते हैं. राजनीति और सामाजिक घटनाओं पर उनके ज्योतिषीय विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर और मेदिनी ज्योतिष पर आधारित होते हैं. इनमें ग्रह स्थितियों को संभावित संकेतों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), नई दिल्ली से पत्रकारिता और IIMT University, मेरठ से ज्योतिष शास्त्र एवं वास्तु शास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है. वे AstroSage और Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म के साथ भी काम कर चुके हैं. उन्होंने Semrush Academy से 'Content Marketing Essentials for SEO and AI Search with Semrush' सर्टिफिकेशन प्राप्त किया है.

नई पीढ़ी के पाठकों के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे प्रारूप पर काम किया है. इसमें पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों और रोजमर्रा के फैसलों से जुड़े सवालों को राशिफल में जगह दी गई है. उनके लेख धार्मिक परंपराओं से जुड़े उन प्रश्नों पर भी केंद्रित होते हैं, जो बदलती जीवनशैली में सामने आते हैं.

वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु उनके अध्ययन एवं लेखन के विषय हैं. उनका मानना है, 'ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है.'

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है.

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