एक्सप्लोरर

Gajkesari Yog: क्या आपकी कुंडली में है गजकेसरी योग? जानें इसके अद्भुत फल और प्रभाव!

Gajkesari Yog: ज्योतिष में गजकेसरी योग को बहुत ही शुभ माना जाता है. यह योग मुख्य रूप से धन और ज्ञान का लाभ कराता है. जानें गजकेसरी योग की संपूर्ण जानकारी 10 पॉइंट्स में.

Gajkesari Yog:  गजकेसरी योग को वैदिक ज्योतिष में एक अत्यंत शुभ और प्रभावशाली योग माना गया है. यह योग व्यक्ति के जीवन में प्रतिष्ठा, बुद्धि, यश, सम्मान और आर्थिक समृद्धि लाने वाला होता है.

गजकेसरी योग की परिभाषा और महत्व

गजकेसरी योग का निर्माण दो महत्वपूर्ण ग्रहों, चंद्रमा और बृहस्पति  के विशेष संबंध से होता है. चंद्रमा हमारे मन, भावनात्मक स्थिति, माता, और लोकप्रियता का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि बृहस्पति ज्ञान, धर्म, न्याय, गुरु, और धन से जुड़ा ग्रह है. जब ये दोनों ग्रह किसी विशेष प्रकार के सम्बन्ध में शुभ स्थिति में होते हैं, तब गजकेसरी योग बनता है और व्यक्ति के जीवन में अनेक शुभ फलों की संभावना होती है.

लेकिन गजकेसरी योग का वास्तविक फलादेश करने से पहले यह देखना अत्यंत आवश्यक होता है कि कुंडली में लग्न कौन-सा है, क्योंकि किसी भी योग का असर पूरे जीवन पर कैसे और कितना पड़ेगा, यह बहुत हद तक लग्न पर ही निर्भर करता है. कुछ लग्नों के लिए यह योग अत्यधिक प्रभावशाली हो जाता है, जबकि कुछ अन्य लग्नों के लिए इसका प्रभाव सीमित हो सकता है. उदाहरण के लिए, यदि गुरु लग्नेश या केंद्र/त्रिकोण का स्वामी हो तो उसका प्रभाव और अधिक शुभ हो जाता है. अतः गजकेसरी योग बना हो, यह एक बात है. लेकिन वह योग कितना फलदायी होगा, यह जानने के लिए लग्न का विश्लेषण करना जरूरी है.

मुख्य गजकेसरी योग बनने की स्थिति

गजकेसरी योग की सबसे प्रमुख स्थिति तब बनती है जब चंद्रमा से गिनने पर बृहस्पति केंद्र स्थानों यानी प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में स्थित हो. इन केंद्र भावों को कुंडली में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि यहीं से जीवन की दिशा और स्थिरता का निर्धारण होता है. यदि बृहस्पति इन भावों में चंद्रमा से केंद्र में स्थित हो और दोनों ग्रह शुभ राशियों में हों, यानी नीच न हो या पाप ग्रहों से प्रभावित न हो, तो यह एक पूर्ण और बलशाली गजकेसरी योग बनाता है. यह योग न केवल चंद्र कुंडली में देखा जाता है, बल्कि लग्न कुंडली में भी उतना ही प्रभावशाली होता है.

दृष्टि से बनने वाला गजकेसरी योग

गजकेसरी योग केवल केंद्र स्थानों में होने से ही नहीं बनता, बल्कि यह गुरु की दृष्टि से भी बन सकता है. यदि बृहस्पति अपनी विशेष दृष्टियों पंचम (5वीं) या नवम (9वीं) द्वारा चंद्रमा को देख रहा हो, तो भी इस योग का प्रभाव उत्पन्न होता है. उदाहरण के तौर पर यदि बृहस्पति आपकी कुंडली के पहले भाव में हो और चंद्रमा पांचवें भाव में हो, तो बृहस्पति की पंचम दृष्टि चंद्रमा पर पड़ेगी. इसे दृष्टि आधारित गजकेसरी योग कहते हैं. हालांकि यह योग मुख्य गजकेसरी योग जितना बलवान नहीं माना जाता, फिर भी इसका प्रभाव अत्यंत शुभ होता है और जातक को मानसिक बल, लोकप्रियता, और सामाजिक प्रतिष्ठा देता है.

गजकेसरी योग बनने की शर्तें

इस योग के पूर्ण प्रभाव के लिए कुछ विशेष शर्तें भी होती हैं. सबसे पहले, यह योग केवल चंद्रमा और बृहस्पति के बीच बनता है. अन्य ग्रहों की भूमिका इसमें नहीं होती. इसके लिए यह आवश्यक है कि बृहस्पति चंद्रमा से केंद्र स्थानों में हो या फिर अपनी 5वीं या 9वीं दृष्टि से चंद्रमा को देख रहा हो. इसके साथ ही दोनों ग्रह शुभ राशियों में स्थित होने चाहिए- जैसे गुरु कर्क, धनु या मीन में, और चंद्रमा वृष या कर्क में. यदि इनमें से कोई भी ग्रह नीच राशियों में हो या पाप ग्रहों जैसे राहु, केतु, शनि या मंगल से प्रभावित हो, तो योग का प्रभाव कमज़ोर पड़ सकता है.

गजकेसरी योग के फल: सामाजिक, मानसिक और आर्थिक प्रभाव

गजकेसरी योग के परिणाम बहुत प्रभावशाली होते हैं. सामाजिक स्तर पर, यह योग व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान, प्रतिष्ठा और लोकप्रियता दिलाता है. ऐसे व्यक्ति नेतृत्व करने की क्षमता रखते हैं और अक्सर प्रशासनिक, राजनीतिक या शैक्षणिक क्षेत्रों में ऊंचे पदों तक पहुंचते हैं. मानसिक रूप से वे अत्यंत बुद्धिमान, स्थिर और आत्मविश्वासी होते हैं. निर्णय लेने की उनकी क्षमता बहुत अच्छी होती है, जिससे वे जीवन में सही दिशा में आगे बढ़ते हैं.

आर्थिक और आध्यात्मिक स्तर पर योग के प्रभाव

आर्थिक दृष्टि से भी गजकेसरी योग अत्यंत लाभकारी माना जाता है. यह योग व्यक्ति को आर्थिक समृद्धि, सुंदर घर, वाहन, और जीवन में स्थिरता प्रदान करता है. आम तौर पर ऐसे लोग आर्थिक संकटों से जल्दी उबर जाते हैं और उनका जीवन सुख-संपन्न होता है. वहीं आध्यात्मिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह योग व्यक्ति को धार्मिक प्रवृत्ति और आध्यात्मिकता की ओर ले जाता है. ऐसे लोग अक्सर किसी गुरु या आध्यात्मिक पथ का अनुसरण करते हैं और अपने जीवन में संतुलन बनाए रखते हैं.

गजकेसरी योग कब कमजोर होता है?

हालांकि यह योग अत्यंत शुभ है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका प्रभाव कमजोर हो सकता है. उदाहरण के लिए यदि चंद्रमा या बृहस्पति नीच राशियों में स्थित हों, जैसे चंद्रमा वृश्चिक में या गुरु मकर में तो योग का बल घट सकता है. इसके अलावा, यदि इन ग्रहों की युति या दृष्टि पाप ग्रहों से हो, तो भी नकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हो सकता है. कभी-कभी चंद्रमा अमावस्या के निकट हो या उसकी दशा कुंडली में सक्रिय न हो, तो भी योग का फल नहीं मिलता. इसलिए सिर्फ योग का बनना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी दशा, ग्रहों की स्थिति और शुभ दृष्टियों का होना भी जरूरी होता है.

कुंडली में गजकेसरी योग की पहचान कैसे करें?

गजकेसरी योग को पहचानने के लिए आपको अपनी कुंडली का विश्लेषण करना होता है. सबसे पहले, यह देखें कि चंद्रमा आपकी कुंडली में किस भाव में स्थित है. इसके बाद यह देखें कि बृहस्पति उस भाव से प्रथम, चतुर्थ, सप्तम या दशम भाव में है या नहीं. अगर ऐसा नहीं है, तो गुरु की दृष्टियां देखें, क्या उसकी 5वीं या 9वीं दृष्टि चंद्रमा पर पड़ रही है? फिर, दोनों ग्रहों की स्थिति पर ध्यान दें , क्या वे नीच तो नहीं, शत्रु राशियों में तो नहीं, और क्या पाप ग्रहों से पीड़ित तो नहीं हैं? जब ये सभी बातें अनुकूल हों, तभी गजकेसरी योग प्रभावी रूप से कार्य करता है.

गजकेसरी योग कमजोर हो तो क्या उपाय करें?

यदि आपकी कुंडली में गजकेसरी योग बना हुआ है लेकिन वह पूर्ण फल नहीं दे रहा, तो कुछ ज्योतिषीय उपायों द्वारा इसका प्रभाव बढ़ाया जा सकता है. इसके लिए आप बृहस्पति और चंद्रमा की शांति के लिए पूजा कर सकते हैं. गुरुवार और सोमवार के व्रत करना भी लाभदायक होता है. "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का नियमित जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्राप्त होता है. इसके अलावा, पीले और सफेद वस्त्रों का दान करना, तथा ब्राह्मणों को केला, चावल और बेसन जैसे पदार्थ दान करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है.

 निष्कर्ष: गजकेसरी योग का मूल्यांकन कैसे करें?

अंततः, यह कहा जा सकता है कि गजकेसरी योग एक अत्यंत शक्तिशाली राजयोगों में से एक है, लेकिन इसका प्रभाव तभी मिलता है जब ग्रह शुभ स्थिति में हों और योग की दशा कुंडली में सक्रिय हो. यदि यह योग केंद्र में चंद्र और गुरु की स्थिति से बना हो तो अत्यंत बलशाली होता है, दृष्टि आधारित हो तो भी अच्छा फल देता है, लेकिन अगर ग्रह नीच या पाप प्रभाव में हों तो इसका प्रभाव काफी सीमित हो जाता है. इसलिए, किसी भी कुंडली में केवल योग बनना ही पर्याप्त नहीं होता, उसकी गहराई से जांच आवश्यक होती है.

[नोट- उपरोक्त दिए गए विचार लेखक के व्यक्तिगत विचार हैं. यह ज़रूरी नहीं है कि एबीपी न्यूज़ ग्रुप इससे सहमत हो. इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है.]

ज्योतिषाचार्य निखिल कुमार, हिमाचल प्रदेश निवासी, पिछले 15 वर्षों से अधिक समय से वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, और मेदिनी ज्योतिष में निषुण हैं. इन्होंने अपने गहन अनुभव और अध्ययन के बल पर हजारों लोगों की कुंडलियों का सफलतापूर्वक विश्लेषण किया है और राजनीति, देश-विदेश, से जुड़े विषयों पर अनेक सटीक भविष्यवाणियां कर ख्याति प्राप्त की है. हाल ही में पाकिस्तान पर संभावित हमले को लेकर इनकी की गई भविष्यवाणी सच साबित हुई, जिससे इनकी प्रामाणिकता और दूरदर्शिता को व्यापक मान्यता मिली. ज्योतिषाचार्य निखिल कुमार का उद्देश्य केवल भविष्य बताना नहीं, बल्कि लोगों की जीवनशैली को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से संतुलित, सकारात्मक और प्रभावशाली बनाना है. ये परंपरागत शास्त्रों की जड़ों से जुड़े रहकर आधुनिक संदर्भों में समाधान प्रस्तुत करते हैं. लेखन, अध्ययन और संगीत के प्रति इनका गहरा रुझान है, जो इन्हें एक संवेदनशील और व्यापक दृष्टिकोण वाला ज्योतिषाचार्य बनाता है. ये निरंतर अपने लेखों, परामर्शों और अध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से जनमानस को जागरूक और सशक्त बना रहे हैं.
Read
और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन बन रहा है खास शुभ संयोग, इस शुभ समय में करें कलश स्थापन?
चैत्र नवरात्रि 2026 के पहले दिन बन रहा है खास शुभ संयोग, इस शुभ समय में करें कलश स्थापन?
Surya Gochar 2026: सूर्य का मीन राशि में गोचर,जानें मेष से मीन सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा समय
Surya Gochar 2026: सूर्य का मीन राशि में गोचर,जानें मेष से मीन सभी राशियों के लिए कैसा रहेगा समय
Meen Saptahik Rashifal 15-21 March 2026: पुराने कॉन्ट्रैक्ट से बड़ा लाभ, मीन राशि के लिए लकी रहेगा सप्ताह
Meen Saptahik Rashifal 15-21 March 2026: पुराने कॉन्ट्रैक्ट से बड़ा लाभ, मीन राशि के लिए लकी रहेगा सप्ताह
Kumbh Saptahik Rashifal 15-21 March 2026: रुके प्रोजेक्ट को मिलेगी गति! कुंभ राशि के लिए मिला-जुला सप्ताह
Kumbh Saptahik Rashifal 15-21 March 2026: रुके प्रोजेक्ट को मिलेगी गति! कुंभ राशि के लिए मिला-जुला सप्ताह

वीडियोज

CRIME NEWS : अमेरिका का वांटेड लेटर | Sansani
Pune News: Lift में फंसा मासूम का हाथ, सोसाइटी में मचा हड़कंप | Maharastra News
Janhit With Chitra Tripathi: खतरनाक Hormuz पार कर भारत की ओर बढ़ा Shivalik | PM Modi
Ghanti Bajao: सिलेंडर संकट के बीच काला खेल, देशभर में छापे और गिरफ्तारियां | LPG Black Marketing
Sandeep Chaudhary: ईरान ने बढ़ाया हाथ...भारत किसके साथ? | ABP News | Gas Crisis

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
बंगाल, असम समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान आज! 4 बजे EC की प्रेस कॉन्फ्रेंस
बंगाल, असम समेत 5 राज्यों में चुनाव की तारीखों का ऐलान आज! 4 बजे EC की प्रेस कॉन्फ्रेंस
'जो लोग इजरायल को फादरलैंड मानते हैं, वो भी...', ईरान-इजरायल युद्ध पर संजय राउत का बयान
'जो लोग इजरायल को फादरलैंड मानते हैं, वो भी...', ईरान-इजरायल युद्ध पर संजय राउत का बयान
Israel-US Iran War Live: US-इजरायल की साजिश का पर्दाफाश! LPG ला रहे 2 भारतीय जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, अब तक 2,209 मौतें
Live: US-इजरायल की साजिश का पर्दाफाश! LPG ला रहे 2 भारतीय जहाजों ने होर्मुज स्ट्रेट पार किया, अब तक 2,209 मौतें
कौन हैं जसकोमल सिंह? जिस पर दिल हार बैठी हैं पवित्रा पुनिया, सगाई के 5 महीने बाद चेहरा हुआ रिवील
कौन हैं जसकोमल सिंह? जिस पर दिल हार बैठी हैं पवित्रा पुनिया, अब मिस्ट्री मैन का चेहरा आया सामने
'शादी कर लो जल्दी ताकि...', अभिषेक शर्मा को संजू सैमसन की सलाह, बताया क्यों हो जाते थे जेलस
'शादी कर लो जल्दी ताकि...', अभिषेक शर्मा को संजू सैमसन की सलाह, बताया क्यों हो जाते थे जेलस
फोल्डेबल iPhone का बड़ा खुलासा! इस नाम से मार्केट में मारेगा एंट्री, कीमत और मेमोरी डिटेल्स हो गईं लीक
फोल्डेबल iPhone का बड़ा खुलासा! इस नाम से मार्केट में मारेगा एंट्री, कीमत और मेमोरी डिटेल्स हो गईं लीक
सिर्फ मर्दों में होती हैं ये बीमारियां, 40 की उम्र के बाद दोगुना हो जाता है खतरा
सिर्फ मर्दों में होती हैं ये बीमारियां, 40 की उम्र के बाद दोगुना हो जाता है खतरा
600 मीटर ऊपर ‘चांद’ से दिखा काबा का नजारा, मक्का क्लॉक टावर से वायरल हुआ रूह छू लेने वाला दृश्य
600 मीटर ऊपर ‘चांद’ से दिखा काबा का नजारा, मक्का क्लॉक टावर से वायरल हुआ रूह छू लेने वाला दृश्य
Embed widget