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4 साल बाद भारत से यूएई के लिए गेहूं की खेप रवाना, जानिए क्यों अटका हुआ था निर्यात

Wheat Export News: भारत ने 4 साल के लंबे इंतजार के बाद यूएई को गेहूं का एक्सपोर्ट फिर से शुरू कर दिया है. कांडला पोर्ट से पहली खेप रवाना हो चुकी है. जानें किस वजह से यह फैसला लिया गया है.

Wheat Export News: भारत ने एक बार फिर ग्लोबल मार्केट में अपनी धाक जमाते हुए लगभग चार साल के लंबे गैप के बाद गेहूं का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है. यह खबर इंडियन एग्रो सेक्टर और एक्सपोर्टर्स के लिए किसी बड़ी जीत से कम नहीं है क्योंकि पिछले कुछ सालों से गेहूं के विदेशी व्यापार पर पूरी तरह से रोक लगी हुई थी. लेटेस्ट अपडेट के मुताबिक कांडला पोर्ट से यूएई के लिए गेहूं की पहली खेप रवाना हो चुकी है. 

यह कदम न केवल भारत की स्ट्रॉन्ग इकोनॉमी को दिखाता है बल्कि दुनिया भर में फूड सिक्योरिटी को लेकर भारत की बढ़ती इम्पॉर्टेंस को भी साबित करता है. लंबे समय से जो अड़चनें भारतीय गेहूं को बॉर्डर पार जाने से रोक रही थीं अब वे हट गई हैं और बिजनेस गलियारों में एक बार फिर रौनक लौट आई है. जान लीजिए क्यों अटका हुआ था निर्यात.

क्यों अटका था गेहूं का निर्यात?

अगर थोड़ा पीछे जाकर देखें तो साल 2022 में भारत सरकार को एक टफ डिसीजन लेना पड़ा था और गेहूं के एक्सपोर्ट पर बैन लगाना पड़ा था. इस रुकावट की सबसे बड़ी वजह थी मौसम का बिगड़ा मिजाज और देश के कई इलाकों में पड़ी एक्सट्रीम हीटवेव जिसने गेहूं की फसल को काफी नुकसान पहुँचाया था. पैदावार कम होने की वजह से लोकल मार्केट में गेहूं के रेट तेजी से ऊपर जाने लगे थे.

जिससे आम आदमी के बजट पर असर पड़ने लगा था. सरकार की टॉप प्रायोरिटी देश के लोगों के लिए खाने-पीने की चीजों की कमी न होने देना और अनाज का स्टॉक बचाकर रखना था. इन्हीं घरेलू जरूरतों और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता की वजह से भारत ने एक्सपोर्ट रोक दिया था जिससे देश के अंदर हालात कंट्रोल में रहें.

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इस वजह से बदला फैसला

इस साल भारत में गेहूं की रिकॉर्ड तोड़ पैदावार हुई है. जिसने सरकार के अनाज गोदामों को फिर से फुल कर दिया है. देश में गेहूं की सप्लाई बढ़ने से अब लोकल मार्केट में कीमतें स्टेबल हैं और एक्सपोर्ट के लिए काफी एक्स्ट्रा स्टॉक अवेलेबल है. वहीं दूसरी तरफ इंटरनेशनल मार्केट में गेहूं की कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्लोबल सप्लाई चेन में आए बदलावों ने भारतीय गेहूं के लिए एक बेहतरीन मौका बना दिया है. 

अब भारतीय गेहूं के दाम ग्लोबल मार्केट में काफी कॉम्पिटिटिव हो गए हैं जिससे विदेशी बायर्स की दिलचस्पी इंडिया की तरफ फिर से बढ़ गई है. इसी पॉजिटिव माहौल को देखते हुए सरकार ने एक्सपोर्ट को ग्रीन सिग्नल दिया है.

भविष्य में निर्यात की क्या हैं संभावनाएं?

आईटीसी जैसी दिग्गज कंपनी निर्यात में एक मेजर रोल प्ले कर रही है. जिसने कांडला पोर्ट से लगभग 22000 मीट्रिक टन गेहूं की लोडिंग का काम हैंडल किया है. यूएई को भेजा जा रहा यह गेहूं करीब 275 डॉलर प्रति टन के रेट पर डील हुआ है जो इंटरनेशनल स्टैंडर्ड्स के हिसाब से काफी बढ़िया डील मानी जा रही है. 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर मौसम ने साथ दिया और प्रोडक्शन इसी तरह बढ़ता रहा तो भारत बहुत जल्द दुनिया के टॉप गेहूं एक्सपोर्टर्स की लिस्ट में अपनी पुरानी पोजीशन वापस पा लेगा. फिलहाल सरकार ने एक फिक्स्ड कोटा तय किया है जिससे एक्सपोर्ट के साथ-साथ देश की अपनी जरूरतें भी पूरी होती रहें. 

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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