कृषि यंत्र किराए पर देने का बिजनेस कैसे शुरू करें, क्या इसमें भी लगता है लाइसेंस?
Farming Machines Renting Rules: क्या कृषि यंत्र किराए पर देने का बिजनेस शुरू करने के लिए लाइसेंस की जरूरत होती है? जानिए कस्टम हायरिंग सेंटर खोलने का तरीका क्या है.

Farming Machines Renting Rules: आज के दौर में खेती में मशीनों का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है. लेकिन छोटे और सीमांत किसानों के लिए लाखों रुपये के ट्रैक्टर, हार्वेस्टर या रोटावेटर खरीदना आसान नहीं होता. ऐसे में कृषि यंत्रों को किराए पर देने का बिजनेस यानी कस्टम हायरिंग सेंट गांव और कस्बों में एक बेहद लाभदायक कमाई का जरिया बनकर आया है.
इस बिजनेस का सीधा मॉडल है कि आप आधुनिक मशीनें खरीदकर एक जगह रखें और जिन्हें जरूरत हो उन्हें हर घंटा के हिसाब से या फिर हर एकड़ के हिसाब से किराए पर दे सकते हैं. इससे किसानों का काम कम लागत में हो जाता है और आपको बढ़िया मुनाफा मिलता है.
भारत सरकार भी इस बिजनेस मॉडल को बढ़ावा देने के लिए लगातार सब्सिडी और लोन की योजनाएं चला रही है. जिससे इस काम को शुरू करना काफी आसान हो गया है. जान लें क्या इसके लिए अलग से किसी लाइसेंस की जरूरत होगी.
कैसे शुरू करें कृषि यंत्र किराए पर देने का बिजनेस?
यह बिजनेस शुरू करने से पहले आपको अपने इलाके की खेती के बारे में पता करना होगा. आपको यह जानना होगा कि आपके एरिया में कौन सी फसलें ज्यादा होती हैं और लोकल लेवल पर किसानों को किन मशीनों की सबसे ज्यादा कमी महसूस होती है. शुरुआत में बात की जाए तो आप ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, प्लाउ, कंबाइन हार्वेस्टर, लेजर लैंड लेवलर, और सीड ड्रिल जैसी भारी या मल्टीपरपज मशीनों में इंवेस्ट कर सकते हैं.
इसके अलावा छोटी मशीन जैसे स्प्रे पंप, थ्रेशर या रीपर भी रख सकते हैं. इसके लिए एक सही जगह चुनें जहां मशीनों को रखने और उनके रख-रखाव के लिए ठीक-ठाक जगह हो. शुरुआत में 2-3 मुख्य मशीनों से काम स्टार्ट करके बाद में मार्केट में जो डिमांड हो उसके हिसाब से अपना स्टॉक बढ़ा सकते हैं. मशीनों की टाइम टू टाइम पर सर्विसि और मेंटेनेंस बहुत जरूरी है जिससे काम के सीजन में कोई खराबी न आए.

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क्या इस बिजनेस के लिए लाइसेंस की जरूरत पड़ती है?
अगर कानूनी पहलू और लाइसेंस की बात करें तो खेती के लिए मशीन किराए पर देने के लिए अलग से कोई लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होती. जैसे कि खाद या बीज बेचने के लिए कृषि विभाग का लाइसेंस चाहिए होता है. हालांकि नियमों के मुताबिक एक बिजनेस चलाने के लिए आपको कानूनी रजिस्ट्रेशन कराने पड़ते हैं. सबसे पहले आपको अपनी दुकान या फर्म का एमएसएमई/उद्यम रजिस्ट्रेशन कराना होता है.
जो पूरी तरह फ्री और ऑनलाइन होता है. इसके अलावा लोकल लेवल पर नगर निगम या ग्राम पंचायत से ट्रेड लाइसेंस लेना पड़ता है. अगर आपका टर्नओवर या लेन-देन अधिक है. तो जीएसट नंबर भी लेना होगा. अगर आपके पास ट्रैक्टर या कमर्शियल गाड़ियां हैं. तो उनका कमर्शियल आरसी, इंश्योरेंस और परमिट होना जरूरी है जिससे सड़क पर चलाते वक्त कोई कानूनी दिक्कत न आए. इन बातों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.

बिजनेस को बढ़ाने के तरीके
कृषि यंत्र किराए पर देने के बिजनेस को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मैकेनाइजेशन (SMAM) योजना चलती है. इसके तहत अगर आप कस्टम हायरिंग सेंटर (CHC) खोलते हैं. तो सरकार आपको मशीनों की खरीद पर 40% से 80% तक की भारी सब्सिडी देती है. आप खुद को सरकार के CHC-Farm Machinery app पर सर्विस प्रोवाइडर के तौर पर रजिस्टर कर सकते हैं.
इस ऐप से आसपास के किसान सीधे आपसे संपर्क करके मशीनें बुक कर सकते हैं. बिजनेस बढ़ाने के लिए लोकल किसानों से जुड़ाव रखें, व्हाट्सऐप ग्रुप्स या पोस्टर के जरिए प्रमोशन करें और सीजन के हिसाब से सही किराए तय करें. किसानों को समय पर और अच्छी सर्विस देकर आप अपने बिजनेस को आसपास के दर्जनों गांवों तक फैला सकते हैं.
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