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मधुमक्खी पालन के लिए सरकार दे रही मदद, ऐसे करें आवेदन

Beekeeping Subsidy Scheme: कम लागत में मोटी कमाई करने के लिए मधुमक्खी पालन एक शानदार मौका बन रहा है. इस बिजनेस को शुरू करने के लिए सरकार भारी सब्सिडी दे रही है.

Beekeeping Subsidy Scheme: अगर आप खेती के साथ कमाई का कोई और दूसरा रास्ता तलाश रहे हैं. तो मधुमक्खी पालन आपके लिए काम का ऑप्शन बन सकता है. इसमें बहुत ज्यादा जमीन की जरूरत नहीं पड़ती और शुरुआत भी कम बॉक्स से की जा सकती है.इसमें अच्छी बात यह है कि सरकार इस काम को बढ़ावा देने के लिए आर्थिक मदद के साथ ट्रेनिंग भी दे रही है.

 राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन यानी NBHM के तहत किसानों और ग्रामीण युवाओं को मधुमक्खी पालन के लिए 35 से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है. जरूरी उपकरणों पर भी मदद मिल सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक 10 से 20 बॉक्स के साथ शुरुआत करने में करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक खर्च आ सकता है. वहीं सही तरीके से काम करने पर 40 से 50 बॉक्स से सालाना 3 से 5 लाख रुपये तक कमाई की जा सकती है

10 से 20 बॉक्स से शुरू कर सकते हैं मधुमक्खी पालन

मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए किसान को शुरुआत में बहुत बड़ा सेटअप लगाने की जरूरत नहीं है. 10 से 20 बॉक्स से काम शुरू किया जा सकता है. इसके लिए मधुमक्खी कॉलोनी, लकड़ी के बॉक्स, सुरक्षा किट, स्मोकर और शहद निकालने वाली मशीन जैसे सामान की जरूरत पड़ती है. शुरुआती खर्च करीब 50 हजार से 1 लाख रुपये तक जा सकता है. हालांकि असली लागत बॉक्स की संख्या और इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर निर्भर करेगी. 

एक बॉक्स से सालभर में करीब 25 से 40 किलो तक शहद मिल सकता है. कीमत की बात करें तो बाजार में शहद की कीमत क्वालिटी और जगह के हिसाब से अलग हो सकती है. सामान्य तौर पर 250 से 500 रुपये किलो तक का बाजार भाव रहता है. इसके अलावा मधुमोम, रॉयल जेली और प्रोपोलिस जैसे प्रोडक्ट से भी कमाई का रास्ता बन सकता है.

सरकार दे रही 50 फीसदी तक सब्सिडी और ट्रेनिंग

मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार राष्ट्रीय मधुमक्खी पालन और शहद मिशन चला रही है. इसे राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड यानी NBB के जरिए आगे बढ़ाया जाता है. इस मिशन के तहत किसानों और पशुपालकों को मधुमक्खी पालन शुरू करने के लिए 35 से 50 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है. मधुमक्खी बॉक्स, कॉलोनी और दूसरे जरूरी उपकरणों पर आर्थिक मदद मिल सकती है. 

सिर्फ पैसा ही नहीं सरकार की तरफ से मधुमक्खी पालन की ट्रेनिंग की सुविधा भी दी जाती है. जिससे नए लोग बिना जानकारी के काम शुरू करके नुकसान में नहीं रहेंगे. ट्रेनिंग में मधुमक्खियों की देखभाल, शहद उत्पादन और बेहतर तरीके से पालन करने जैसी जानकारी काम आती है. सरकार शहद की क्वालिटी, स्टोरेज और मार्केटिंग को बेहतर बनाने पर भी जोर दे रही है.


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ऐसे कर सकते हैं योजना के लिए आवेदन

सरकारी मदद का फायदा लेने के लिए किसान को सबसे पहले राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करना होता है. आवेदन के दौरान आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी, निवास प्रमाण और जमीन से जुड़े कागज मांगे जा सकते हैं. रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद किसान को एक यूनिक आईडी दी जाती है. इसके बाद आगे की प्रोसेस योजना के नियमों के हिसाब से पूरी की जाती है. किसान अपने जिले के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र यानी KVK से भी जानकारी ले सकते हैं. 

यहां मधुमक्खी पालन से जुड़ी ट्रेनिंग और जरूरी प्रक्रिया के बारे में जानकारी मिल सकती है. आवेदन मंजूर होने और जरूरी ट्रेनिंग पूरी होने के बाद सब्सिडी की रकम सीधे बैंक खाते में भेजे जाने की जानकारी दी गई है. इसलिए आवेदन करने से पहले सभी दस्तावेज और बैंक डिटेल्स सही रखें. इसके साथ ही अपने जिले में चल रही योजना की शर्तें जरूर चेक कर लें क्योंकि लोकर स्तर पर प्रोसेस में कुछ अंतर हो सकता है.


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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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