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मानसून में इन पौधों से सजाएं किचन गार्डन, दिखेगा शानदार

Monsoon Plant Tips: बारिश के मौसम में अपने किचन गार्डन और बालकनी को दें एकदम नया और स्टाइलिश लुक. कौन-से खूबसूरत पत्तेदार और अनोखे पौधे इस सीजन में आपके घर की खूबसूरती बढ़ा सकते हैं? जान लीजिए.

Monsoon Plant Tips: बारिश का मौसम आते ही चारों तरफ हरियाली छा जाती है और यह समय  किचन गार्डनिंग का शौक रखने वालों के लिए बहुत ही सही होता है. सावन-भादों की ठंडी फुहारें और हवा में मौजूद नमी पौधों की ग्रोथ के लिए एक कुदरती खाद का काम करती हैं. अगर आप भी अपनी बालकनी, छत या घर के किसी खाली कोने में एक खूबसूरत और हरा-भरा किचन गार्डन तैयार करने की सोच रहे हैं. तो मानसून से बेहतर कोई दूसरा सीजन नहीं हो सकता. 

इस मौसम में लगाई गई छोटी सी कलम भी बहुत तेजी से जड़ पकड़ लेती है और पौधे दोगुनी रफ्तार से लहलहाने लगते हैं. किचन गार्डन  में आप सिर्फ सब्जियां ही नहीं उगा सकते
हैं बल्कि आप इसमें बहुत से अच्छे पत्तेदार, खुशबूदार और रंग-बिरंगे पौधे जोड़ सकते हैं जो आपके घर के लुक को भी एकदम फ्रेश और बढ़िया बना देंगे. तो फिर बिना देर किए आपको बताते हैं मानसून में लगाए जाने वाले कुछ बेहतरीन पौधों के बारे में विस्तार से जानकारी.

पेट्रा क्रोटन और बड़े पत्तों वाला मनी प्लांट

अगर आप अपने किचन गार्डन में चटख रंगों का तड़का लगाना चाहते हैं तो फिर आपके लिए पेट्रा क्रोटन सबसे बढ़िया चॉइस है. इसके चौड़े पत्तों पर पीले, लाल, नारंगी और हरे रंग का नेचुरल शेड देखने में बेहद खूबसूरत लगता है. मानसून की हल्की रोशनी और नमी मिलते ही इसकी पत्तियां और ज्यादा चमकदार हो जाती हैं. इसके साथ ही बड़े पत्तों वाला मनी प्लांट यानी जंबो पोथोस गार्डन की हरियाली को एक अलग ही लेवल पर ले जाता है. 

इसके बड़े दिल के साइज के और कटिंगदार हरे पत्ते एकदम किसी ट्रॉपिकल जंगल जैसा फील देते हैं. आप इसे किसी मॉस स्टिक के सहारे ऊपर चढ़ा सकते हैं या फिर अपने किचन विंडो के पास हैंगिंग पॉट में लगा सकते हैं. बारिश के मौसम में मनी प्लांट बहुत तेजी से बढ़ता है और इसकी बड़ी पत्तियां घर को एकदम बढ़िया रॉयल लुक देती हैं.

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जेली बीन्स और हवॉर्थिया

अगर आपके घर के किचन गार्डन में जगह थोड़ी कम है. तो फिर जेली बीन्स प्लांट और हवॉर्थिया जैसे प्लांट्स आपके लिए सबसे बेस्ट ऑप्शन साबित हो सकते हैं. जेली बीन्स प्लांट यानी सेडम रुब्रोटिंक्टम की पत्तियां छोटी, गोल-मटोल और जेली कैंडीज जैसी दिखती हैं. हल्की धूप और बारिश के मौसम में इसके पत्तों के सिरे हल्के लाल-गुलाबी रंग में बदल जाते हैं जो देखने में बेहद क्यूट और अट्रैक्टिव लगते हैं. 

वहीं दूसरी तरफ हवॉर्थिया अपने जेब्रा जैसी सफेद धारियों और स्टार जैसे कॉम्पैक्ट शेप की वजह से बहुत अलग लगता है. यह पौधा बहुत स्लो स्पीड से बढ़ता है और बेहद कम जगह घेरता है. इसे अगर आप छोटी सी शेल्फ पर रखते हैं तो यह दोनों पौधे ही आपकी सजावट में चार चांद लगा देते हैं और इन्हें रोज-रोज की देखभाल की भी जरूरत नहीं होती.

सकुलेंट्स देगा मॉडर्न टच

सकुलेंट्स अपनी अनोखी बनावट, मोटी गूदेदार पत्तियों और मॉडर्न लुक के लिए जाने जाते हैं. किचन गार्डन के किसी स्टैंड पर अलग-अलग वैरायटी के सकुलेंट्स को छोटे सेरेमिक पॉट्स में सजाकर रखने से पूरा एरिया एकदम स्टाइलिश दिखता है. हालांकि मानसून के दौरान सकुलेंट्स, हवॉर्थिया और जेली बीन्स जैसे पौधों को लेकर एक सावधानी बरतना बहुत जरूरी है. 

इन पौधों की पत्तियों में पहले से काफी पानी स्टोर रहता है, इसलिए इन्हें लगातार तेज बारिश में खुले में न छोड़ें. गमले की मिट्टी ऐसी तैयार करें जिसमें रेत या परलाइट की मात्रा ज्यादा हो जिससे पानी जरा भी न रुके. गमले के नीचे ड्रेनेज होल साफ रखें और जब मिट्टी पूरी तरह सूख जाए तभी हल्का पानी दें. थोड़ी सी समझदारी से यह पौधे पूरे मानसून आपके गार्डन की हरा-भरा फ्रेश रखेंगे.


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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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