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सितंबर में लगा दें ये विदेशी सब्जियां, नवंबर में कमाई शुरू

सब्जियों के गिरते भाव से परेशान हैं तो सितंबर में लगाएं यह खास विदेशी सब्जियां और नवंबर से शुरू करें कमाई. बड़े शहरों और होटलों में भारी डिमांड वाली यह कौन सी फसलें हैं. जानें इनकी बुवाई का तरीका.

खेती में मुनाफा सभी किसानों को चाहिए होता है. लेकिन हर बार सभी किसानों को मनमुताबिक मुनाफा नहीं मिल पाता है. और जो किसान पारंपरिक फसलों के भरोसे रहते हैं उन्हें ज्यादा नुकसान झेलना पड़ जाता है. फूलगोभी, पत्तागोभी और टमाटर जब मंडी में एक साथ आते हैं तो कई बार उनका भाव काफी गिर जाता है इतना कि तुड़ाई का खर्च निकालना भी मुश्किल हो जाता है. अगर आप इस घाटे से बाहर निकलकर अच्छा मुनाफा कमाना चाहते हैं. तो अब वक्त है कुछ और आजमाने का. 

आज के दौर में बड़े शहरों, होटलों, कैफों और सुपरमार्केट में विदेशी यानी एग्जॉटिक सब्जियों की मांग आसमान छू रही है. सितंबर का महीना इन खास फसलों की बुवाई के लिए सबसे सही समय माना जाता है. मानसून के जाना और हल्की गुलाबी ठंड का आना इन सब्जियों की नर्सरी और रोपाई के लिए एकदम सही तापमान देता है. इसमें सबसे बढ़िया बात यह है कि यह फसलें बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं. अगर आप सितंबर में इनकी तैयारी कर लें तो नवंबर आते-आते आपकी जेब में बंपर कमाई आने लगेगी.

ब्रोकली और रेड कैबेज

हरी गोभी यानी ब्रोकली और लाल पत्तागोभी आज सिर्फ बड़े होटलों में नहीं इस्तेमाल होती. बल्कि जो लोग सेहत के लिए जागरूक है वह भी इन्हें हाथों-हाथ खरीद रहे हैं. नार्मल फूलगोभी के कंपेरिजन में इनकी खेती में ज्यादा फर्क नहीं है. लेकिन इनका बाजार भाव तीन से चार गुना ज्यादा मिलता है. सितंबर के पहले या दूसरे हफ्ते में इनकी नर्सरी तैयार कर ली जाती है और करीब 20 से 25 दिन बाद पौधे मुख्य खेत में रोप दिए जाते हैं. 

ब्रोकली में बढ़िया मात्रा में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन्स होते हैं. जिसकी वजह से जिम जाने वाले और डाइटिंग करने वाले लोग इसे रोजमर्रा के सलाद में शामिल करते हैं. ठीक इसी तरह रेड कैबेज चाइनीज फूड और फैंसी सलाद का मुख्य हिस्सा बन चुकी है. मंडी में जहां नार्मल गोभी 10 से 15 रुपये प्रति किलो बिकती है. वहीं ब्रोकली आसानी से 60 से 100 रुपये प्रति किलो का थोक भाव दिला देती है.


सितंबर में लगा दें ये विदेशी सब्जियां, नवंबर में कमाई शुरू

जुकिनी और पार्सले

विदेशी सब्जियों में जुकिनी का नाम खूब देखने को मिलता है. हर बड़े रेस्टोरेंट के मेन्यू में यह रहती है. दिखने में यह अपनी देसी तोरी या लौकी जैसी लगती है. लेकिन इसका स्वाद और टेक्सचर एकदम अलग होता है. जुकिनी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बेहद कम समय यानी रोपाई के महज 40 से 45 दिन बाद ही फल देना शुरू कर देती है. सितंबर में लगाई गई जुकिनी नवंबर के पहले हफ्ते से ही रोज टूटने लगती है.

इसके साथ ही आप पार्सले की खेती भी कर सकते हैं. देखने में यह बिल्कुल देसी धनिए जैसा लगता है. लेकिन इसकी खुशबू और पत्तियां बेहद खास होती हैं. कॉन्टिनेंटल और यूरोपियन डिशेज में गार्निशिंग के लिए इसका काफी इस्तेमाल होता है. चूंकि इसकी मांग लगातार बनी रहती है और सप्लायर कम हैं. इसलिए खेत से निकलते ही यह महंगे दामों पर बिक जाती हैं.


सितंबर में लगा दें ये विदेशी सब्जियां, नवंबर में कमाई शुरू

यह भी पढ़ें: पावर वीडर लें या ट्रैक्टर, छोटी जमीन पर खेती में क्या फायदेमंद?

लेट्यूस और चेरी टोमैटो

अगर आप कम जगह में सबसे ज्यादा मुनाफा तलाश रहे हैं. तो लेट्यूस और चेरी टोमैटो सबसे शानदार जोड़ी हैं. बर्गर, रैप्स और सलाद बाउल में कुरकुरेपन के लिए लेट्यूस की भारी डिमांड रहती है. आइसबर्ग और रोमेन जैसी लेट्यूस की किस्में हल्की ठंड में बहुत तेजी से बढ़ती हैं. 

सितंबर में क्यारियां बनाकर इनकी रोपाई करने पर नवंबर में ताजे पत्ते कटाई के लिए पूरी तरह तैयार हो जाते हैं. वहीं दूसरी तरफ छोटे-छोटे अंगूर जैसे दिखने वाले चेरी टोमैटो स्वाद में थोड़े मीठे और बेहद रसीले होते हैं. बड़े-बड़े मॉल और डिपार्टमेंटल स्टोर्स में इनकी 200 ग्राम की पैकिंग भी 50 से 80 रुपये में बिकती है. 

अगर आपके पास आधा या फिर एक एकड़ खेत भी है. तो ड्रिप इरिगेशन और मल्चिंग शीट लगाकर आप इनकी खेती बेहद कम पानी और कम मेहनत में कर सकते हैं. शादी-ब्याह के सीजन में नवंबर से इनकी मांग इतनी ज्यादा बढ़ जाती है कि व्यापारी खुद खेत तक गाड़ी लेकर पहुंच जाते हैं.

यह भी पढ़ें: सतावर की खेती के लिए ट्रेनिंग देगी सरकार, पौधे भी मिलेंगे मुफ्त

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है.

न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है.

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