खेत में ही मिलाएं पराली, अगली फसल की पैदावार बढ़ाने में मिलेगी मदद
फसल कटने के बाद पराली को जलाने के बजाय खेत में ही मिलाएं. इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, नमी बनाए रखने और अगली फसल के लिए पोषक तत्व उपलब्ध कराने में मदद मिलती है. जाने कैसे करें इसका उपयोग

फसल कटने के बाद खेत में बची पराली को अक्सर किसान बेकार समझकर जला देते हैं. लेकिन पराली को खेत में ही मिलाना मिट्टी की सेहत के लिए फायदेमंद होता है. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और अगली फसल को पोषक तत्व मिलते हैं. पराली जलाने से जहां मिट्टी के उपयोगी जीवों को नुकसान पहुंचता है, वहीं खेत में इसे सड़ाने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिलती है.
खेती की लागत कम करने का आसान तरीका
किसानों के लिए फसल कटने के बाद खेत की सही देखभाल करना बहुत जरूरी होता है. अक्सर किसान पराली को खेत से हटाने या जलाने में समय और पैसा खर्च करते हैं. जबकि सही तरीके से पराली का प्रबंधन करके मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाया जाता है. इससे मिट्टी में जैविक पदार्थ बढ़ते हैं और उसकी पानी रोकने की क्षमता में सुधार होता है. किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर उचित मशीनों का इस्तेमाल करते हैं. इससे पर्यावरण को नुकसान कम होगा और लंबे समय में खेती को फायदा मिलता है.
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मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मददगार
पराली में कार्बन और दूसरे पोषक तत्व मौजूद होते हैं. जब इसे खेत में मिलाया जाता है, तो सूक्ष्मजीव धीरे-धीरे इसे सड़ाकर जैविक पदार्थ में बदलते हैं. इससे मिट्टी की संरचना बेहतर होती है और लंबे समय में उसकी उर्वरता बढ़ाने में मदद मिलती है. इससे रासायनिक खाद पर होने वाला खर्च भी कुछ हद तक कम होता है. पराली को मिट्टी में मिलाने या उचित तरीके से खेत की सतह पर रखने से पानी के वाष्पीकरण को कम करने में मदद मिलती है. इससे मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. खासकर कम बारिश वाले इलाकों में यह तरीका उपयोगी होता है.
अगली फसल की तैयारी कैसे करें ?
पराली को खेत में मिलाने के लिए किसान हैप्पी सीडर, सुपर सीडर या अन्य उपयुक्त कृषि मशीनों की मदद ले सकते हैं. पराली को मिट्टी में मिलाने के बाद उसके सड़ने के लिए पर्याप्त समय और नमी जरूरी होती है. ध्यान रखें कि पराली को जलाने के बजाय उसका सही प्रबंधन करें. इससे वायु प्रदूषण कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिलती है.पराली के जल्दी अपघटन के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार उचित प्रबंधन अपनाएं. इससे अगली फसल की बुवाई में परेशानी होने की आशंका भी कम होती है.
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