कैसे होती है लाल मूली की खेती, किसान किस बात का रखें ध्यान?
लाल मूली कम समय में तैयार होने वाली फसल है और बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है. जानिए इसके लिए कैसी मिट्टी और मौसम चाहिए, बुवाई कैसे करनी है और किन बातों का ध्यान रखें

सलाद, और होटल-रेस्तरां में लाल मूली की मांग लगातार बनी रहती है. यह कम समय में ही तैयार हो जाती है, इसलिए छोटे किसानों के लिए भी अच्छा विकल्प बन सकती है. पर अच्छी पैदावार और सही दाम के लिए खेत की तैयारी, बुवाई और देखभाल सही तरीके से करना जरूरी है. जाने लाल मूली की खेती कैसे होती है और किसान किन बातों का ध्यान रखें.
कैसा मौसम और कैसी मिट्टी चाहिए ?
मूली ठंडे मौसम की फसल है. लाल मूली के लिए 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तापमान सबसे अच्छा माना जाता है. यह थोड़ी ज्यादा गर्मी भी सह लेती है. मिट्टी की बात करें तो इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे सही रहती है. खेत की गहरी जुताई जरूरी है, ताकि जड़ें आसानी से नीचे तक बढ़ सकें. पहले मिट्टी पलटने वाले हल से एक जुताई करें. फिर 2 से 3 बार कल्टीवेटर चलाकर खेत को समतल कर लें.
कब और कैसे करें बुवाई ?
उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में लाल मूली की यूरोपियन किस्में अक्टूबर से जनवरी तक बोई जाती हैं. इनमें रैपिड रेड व्हाइट टिप्ड, स्कारलेट ग्लोब और पूसा हिमानी जैसी नस्लें शामिल है. बुवाई के समय खेत में अच्छी नमी होनी चाहिए. बीज को समतल क्यारियों में या मेड़ों पर ही बोए. मेड़ों के बीच करीब 30 से 45 सेंटीमीटर की दूरी रखें. बीज ज्यादा गहराई में न डालें. जब पौधे उग आएं, तो घने पौधों को निकालकर बाकी के बीच थोड़ी दूरी बना दें. इससे जड़ों को फैलने की जगह मिलती है.
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खाद, पानी भी जरूरी
मूली जल्दी तैयार होने वाली फसल है, इसलिए इसे अच्छी खाद चाहिए. खेत की तैयारी के समय सड़ी हुई गोबर की खाद या कंपोस्ट जरूर डालें. यूरिया की आधी मात्रा, फास्फोरस और पोटाश बुवाई के समय देना ठीक माना जाता है. सिंचाई जरूरत के हिसाब से करें, आमतौर पर 8 से 10 दिन में. बुवाई के करीब 15 से 20 दिन बाद पौधों पर हल्की मिट्टी चढ़ा दें. इससे खरपतवार कम होती हैं और जड़ें अच्छी बनती हैं.
किसान इन बातों का रखें खास ध्यान
मूली में कभी-कभी माहू यानी लाही कीट लग जाती है. इसकी रोकथाम के लिए खेत पर नजर रखें और जरूरत होने पर कृषि विशेषज्ञ की सलाह से ही दवा डालें. ज्यादा खाद या असमान सिंचाई से जड़ें फट सकती हैं . इसलिए खाद और पानी संतुलित रखें. मूली को ज्यादा देर खेत में न छोड़ें. देर होने पर जड़ें खोखली हो जाती है और दाम घट जाते हैं. अपने इलाके के हिसाब से किस्म और बुवाई का समय चुनने के लिए पास के कृषि विज्ञान केंद्र से सलाह जरूर लें.
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