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गेहूं का MSP बढ़ा, लेकिन इससे किसानों की कमाई कितनी बढ़ेगी?

Wheat MSP Hike: सरकार ने गेहूं का एमएसपी बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल तो कर दिया है, लेकिन किसानों को इससे कितनी अतिरिक्त कमाई होगी? यहां जानें एमएसपी में बढ़ोतरी का पूरा हिसाब.

Wheat MSP: गेहूं की खेती करने वाले किसानों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ने की खबर तो राहत देती है, लेकिन जब बढ़ोतरी सिर्फ 25 रुपये प्रति क्विंटल हो, तो मन में सवाल उठना भी लाजिमी है कि, आखिर इससे कमाई में कितना फर्क पड़ेगा? खेती में बीज, खाद, डीजल, सिंचाई और मजदूरी पर लगातार खर्च होता है. ऐसे में किसान यह जानना चाहते हैं कि, सरकार ने गेहूं का भाव बढ़ाया है, तो उनकी जेब में वास्तव में कितने रुपये ज्यादा आएंगे.

रबी मार्केटिंग सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का MSP बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. पहले यह भाव 2,585 रुपये प्रति क्विंटल था. यानी अब किसानों को सरकारी खरीद में हर क्विंटल पर 25 रुपये ज्यादा मिल सकते हैं. लेकिन इस बढ़ोतरी को समझने के लिए सिर्फ नए भाव को देखना काफी नहीं है. यह भी देखना होगा कि किसान कितनी उपज बेचता है और उसकी खेती पर कुल कितना खर्च आता है.

एक क्विंटल गेहूं बेचने पर कितने रुपये ज्यादा मिलेंगे?

सरकार की नई दर के हिसाब से एक क्विंटल गेहूं बेचने पर किसान को पहले के मुकाबले 25 रुपये ज्यादा मिलेंगे. अगर कोई किसान 10 क्विंटल गेहूं बेचता है, तो उसे 250 रुपये अतिरिक्त मिलेंगे. वहीं, 50 क्विंटल गेहूं बेचने पर 1,250 रुपये और 100 क्विंटल बेचने पर 2,500 रुपये ज्यादा मिल सकते हैं. 

यानी गेहूं की पैदावार और सरकारी केंद्र पर बेची गई मात्रा जितनी ज्यादा होगी, कुल अतिरिक्त रकम भी उतनी ही बढ़ेगी. हालांकि, यह हिसाब तभी लागू होगा, जब किसान अपनी उपज नए MSP पर बेच पाए. खुले बाजार में मिलने वाला भाव अलग हो सकता है.

लागत के मुकाबले कितनी राहत मिलेगी?

गेहूं की खेती में किसान को खेत तैयार करने से लेकर कटाई तक कई बार पैसा लगाना पड़ता है. डीजल, खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी का खर्च जोड़ने पर खेती की लागत बढ़ जाती है. ऐसे में MSP में 25 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कुछ अतिरिक्त रकम तो देगी, लेकिन इससे खेती का पूरा बढ़ता खर्च निकल जाएगा, ऐसा कहना भी सही नहीं होगा.

सरकार का कहना है कि, गेहूं के MSP पर उत्पादन लागत के मुकाबले 106 प्रतिशत का लाभ मिल रहा है. वहीं, किसान संगठनों की ओर से लागत का हिसाब लगाने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं. उनका तर्क है कि जमीन का किराया और परिवार की मेहनत जैसे खर्च भी जोड़े जाने चाहिए.
गेहूं का MSP बढ़ा, लेकिन इससे किसानों की कमाई कितनी बढ़ेगी?

यह भी पढ़ें: बिहार में कब से बिकेगा धान? जानें तारीख और MSP से जुड़ी जरूरी बातें

किसान के लिए क्या है इसका मतलब?

MSP बढ़ने से सरकारी खरीद में गेहूं का तय भाव बढ़ जाता है और किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए एक आधार मिलता है. लेकिन असल कमाई इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रति एकड़ कितनी पैदावार हुई, कुल खर्च कितना आया और फसल किस भाव पर बिकी. इसलिए किसान अपनी खेती का पूरा हिसाब रखें. केवल MSP बढ़ने को मुनाफा बढ़ने का संकेत मानने के बजाय लागत और बिक्री, दोनों को साथ देखकर ही सही तस्वीर समझी जा सकती है.

यह भी पढ़ें: सोयाबीन किसानों को राहत, भावांतर योजना में रजिस्ट्रेशन की तारीख बढ़ी

मनस्वी चौहान एबीपी नेटवर्क के साथ इंटर्न के तौर पर काम कर रही हैं, जहां वह एग्रीकल्चर बीट पर खबरें लिखती हैं. खेती, किसानों और एग्रीकल्चर से जुड़ी स्टोरीज लिखते हुए उनकी कोशिश रहती है कि खबर की जानकारी आसान और साफ भाषा में लोगों तक पहुंचे.

मनस्वी अपने कॉलेज की मीडिया टीम का हिस्सा रह चुकी हैं. इस दौरान उन्हें लाइव इवेंट्स की कवरेज, एंकरिंग और रिपोर्टिंग का मौका प्राप्त हुआ. यहां उन्हें खबरों पर रिसर्च करने, कंटेंट लिखने और किसी स्टोरी को सही तरीके से लोगों तक पहुंचाने का एक्सपीरियंस मिला.

पढ़ाई की बात करें तो मनस्वी मंदसौर यूनिवर्सिटी से Bachelor’s in Journalism and Mass Communication की पढ़ाई कर रही हैं. राइटिंग और मीडिया में लगातार कुछ नया सीखते हुए वह अपनी राइटिंग को और बेहतर बनाने पर काम कर रही हैं.

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