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यह देसी जुगाड़ लगा लिया तो आम कभी नहीं होगा खराब, सिर्फ इस छोटी-सी चीज की होती है जरूरत

Mango Safety Tips: पेपर बैग का इस्तेमाल करके आमों को बिना केमिकल के नेचुरल तरीके से पकाया और सुरक्षित रखा जा सकता है. यह देसी जुगाड़ आमों की फ्रेशनेस लंबे समय तक बरकरार रखता है.

Mango Safety Tips:गर्मियां आते ही हर घर में आम की खुशबू महकने लगती है. लेकिन इसके साथ ही एक बड़ी टेंशन भी शुरू हो जाती है. आमों को खराब होने से कैसे बचाएं? अक्सर बाजार से लाए गए आम या तो बहुत जल्दी सड़ने लगते हैं या फिर उन पर काले धब्बे पड़ जाते हैं. कई बार तो फलों के ऊपर भिनभिनाने वाले छोटे-छोटे कीड़े पूरे स्वाद को खराब कर देते हैं. ऐसे में हम अक्सर महंगे स्प्रे या केमिकल्स की तरफ भागते हैं. 

जो सेहत के लिए भी ठीक नहीं हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपके घर में पड़ा एक साधारण सा 'पेपर बैग' इस समस्या का सबसे बेस्ट और देसी समाधान है? जी हां, बिना किसी हानिकारक केमिकल के आमों को फ्रेश रखने का यह नुस्खा न सिर्फ सस्ता है. बल्कि पूरी तरह नेचुरल भी है. चलिए आपको बताते हैं कि कैसे आप पेपर बैग के छोटे से इस्तेमाल से अपने पसंदीदा आमों की लाइफ बढ़ा सकते हैं.

पेपर बैग है बड़ा मददगार

आम को पेपर बैग में रखने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह फल से निकलने वाली एथिलीन गैस को अंदर ही रोक लेता है. यह गैस आम को अंदर से धीरे-धीरे पकाने में मदद करती है. जब आप आमों को खुले में छोड़ देते हैं. तो नमी और बाहरी हवा की वजह से वे जल्दी गलने लगते हैं. लेकिन पेपर बैग एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता है.

  • पेपर बैग एक्स्ट्रा नमी को सोख लेता है जिससे आमों में फंगस या सड़न लगने का डर खत्म हो जाता है.
  • यह तरीका उन आमों के लिए बेस्ट है जो थोड़े कच्चे हैं और जिन्हें आप घर पर सुरक्षित पकाना चाहते हैं.
  • बैग को ऊपर से थोड़ा ढीला छोड़ दें ताकि हवा का हल्का संचार बना रहे और फल पूरी तरह न घुट जाए.

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कीड़ों और दाग-धब्बों से बचाव

अक्सर आमों पर भिनभिनाने वाली फ्रूट फ्लाइज और छोटे कीड़े छिलके को डैमेज कर देते हैं. जिससे आम अंदर से काला पड़ने लगता है. पेपर बैग एक फिजिकल बैरियर की तरह काम करता है जो इन बिन बुलाए मेहमानों को फलों के पास भी नहीं आने देता. इससे आम की स्किन साफ रहती है और वह दिखने में भी ताजा बना रहता है.

  • पेपर बैग में रहने से आमों पर बाहरी धूल-मिट्टी नहीं जमती, जिससे उनकी नेचुरल चमक बनी रहती है.
  • यह बैग फलों को उन जिद्दी कीड़ों से दूर रखता है जो आम के गूदे को समय से पहले खराब कर देते हैं.
  • बिना किसी जहरीले स्प्रे के आप अपने परिवार को पूरी तरह से केमिकल-फ्री और सुरक्षित आम खिला सकते हैं.

बस इन बातों का रखें ख्याल

पेपर बैग का इस्तेमाल करते समय सही जगह का चुनाव करना भी बहुत जरूरी है. आमों से भरा बैग हमेशा किसी ठंडी और सूखी जगह पर रखें, जहां सीधी धूप न पड़ती हो. अगर आप उन्हें ज्यादा गर्मी वाली जगह पर रखेंगे. तो वे जरूरत से ज्यादा पककर खराब हो सकते हैं. हर एक-दो दिन में बैग खोलकर चेक करते रहें कि आम कितना पक चुका है.

  • जैसे ही आम से भीनी खुशबू आने लगे और वह हल्का नरम महसूस हो, समझ जाइए कि अब यह खाने लायक है.
  • अगर आम ज्यादा कच्चे हैं, तो बैग में एक सेब रखें, इससे पकने की प्रक्रिया और ज्यादा तेज हो जाएगी.
  • एक बार जब आम अच्छी तरह पक जाए, तो उसे बैग से निकालकर फ्रिज में रख दें ताकि वह ज्यादा न गले.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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