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ड्रैगन फ्रूट खेती का सही मौसम, जानें कब मिलेगी बंपर पैदावार

Dragon Fruit Farming Tips: ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए सबसे सही मौसम कौन-सा माना जाता है? जानें इसकी खेती की सही टाइमिंग और बंपर पैदावार पाने के सीक्रेट्स.

Dragon Fruit Farming Tips: ड्रैगन फ्रूट की खेती किसानों के बीच तेजी से पसंद की जा रही है. इसकी वजह है कि कम पानी में भी इसकी खेती की जा सकती है और बाजार में फल की अच्छी मांग रहती है. ड्रैगन फ्रूट की अच्छी पैदावार के लिए यह बात भी जरूरी होती है कि पौधा कब लगाया जा रहा है. आपको बता दें कि गर्म और नम मौसम ड्रैगन फ्रूट के लिए एक दम सही माना जाता है. 

और यही वजह है कि मानसून की शुरुआत में इसके पौधे लगाना सही रहता है. जून से लेकर अगस्त के महीने तक में पौधे लगाने पर मिट्टी में नमी रहती है. ध्यान रखें कि खेत में पानी जमा नहीं होना चाहिए. ज्यादा पानी ड्रैगन फ्रूट की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है. इसलिए पौधे लगाने से पहले मौसम के साथ खेत की पानी निकलने का पूरी व्यवस्था जरूर कर लें, 

जून से अगस्त तक लगाएं पौधे

ड्रैगन फ्रूट की खेती के लिए जून से अगस्त का वक्त एकदम सही होता है. मानसून के दौरान मिट्टी में नमी रहती है. जिससे पौधों को शुरुआत में फायदा मिलता है. नई कटिंग लगाने वाले किसानों के लिए यह समय आसान रहता है. पौधे लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी कर लें और पानी निकासी की व्यवस्था भी जरूर रखें.

ड्रैगन फ्रूट की जड़ें ज्यादा देर तक पानी में रहने को सहन नहीं कर पातीं. इसलिए भारी मिट्टी में खेती करने से पहले पानी निकलने का इंतजाम करना जरूरी है. मिट्टी भुरभुरी और अच्छी पानी निकासी वाली हो तो पौधों की जड़ें तेजी से फैलती हैं. खेत में सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाने से मिट्टी की क्वालिटी भी बेहतर हो सकती है.


ड्रैगन फ्रूट खेती का सही मौसम, जानें कब मिलेगी बंपर पैदावार

गर्म मौसम में तेजी से बढ़ता है पौधा

ड्रैगन फ्रूट गर्म मौसम में अच्छी तरह बढ़ता है. करीब 20 से 30 डिग्री सेल्सियस तापमान इसकी बढ़वार के लिए सही माना जाता है. इसका पौधा ज्यादा तापमान भी सह सकता है. लेकिन लगातार तेज गर्मी पड़ने पर शाखाओं पर सनबर्न का असर दिखाई दे सकता है. इससे पौधे की बढ़वार कमजोर पड़ सकती है और फूल आने पर भी असर पड़ सकता है.

बारिश भी इसके लिए जरूरी है लेकिन जरूरत से ज्यादा बारिश नुकसान कर सकती है. खेत में पानी जमा होने पर जड़ सड़ने और फंगल का खतरा बढ़ जाता है. मानसून के दौरान खेत में नालियां बनाकर एक्स्ट्रा पानी बाहर निकाल देना सही रहता है. वहीं गर्मी में मिट्टी की नमी बनाए रखने के लिए जरूरत के हिसाब से सिंचाई करें. इसके लिए ड्रिप सिंचाई का भी इस्तेमाल किया जा सकता है.

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फूल और फल आने का समय जानें

ड्रैगन फ्रूट की खेती समय लेती है. इसमें पौधे लगाने के बाद आपको तुरंत फल नहीं मिलते हैं. अलग-अलग चीजों के आधार पर फल आने का टाइम भी बदल सकता है. स्वस्थ और अच्छी कटिंग से तैयार पौधे जल्दी फल देना शुरू कर सकते हैं. आमतौर पर गर्मियों के बाद इसके फूल आने का दौर शुरू होता है और कई जगह सितंबर या अक्टूबर तक फूल दिखाई दे सकते हैं.

ड्रैगन फ्रूट के फूल रात में खिलते हैं. फूल आने के बाद फल को तैयार होने में करीब 30 से 40 दिन लग सकते हैं. मौसम सही रहने पर एक ही पौधे से कई बार फूल और फल मिल सकते हैं. अच्छी पैदावार के लिए टाइम पर खाद, सिंचाई और शाखाओं की छंटाई करना जरूरी है. पौधे की गैर जरूरी शाखाओं को हटा देना भी सही रहता है. 

खेती से पहले खेत को ऐसे करें तैयार

ड्रैगन फ्रूट की खेती में खेत की तैयारी का काम पौधे लगाने से पहले पूरा कर लेना चाहिए. पौधों को सहारा देने के लिए मजबूत सीमेंट के पोल लगाए जाते हैं. इन पोल के आसपास ड्रैगन फ्रूट की कटिंग लगाई जाती है. जैसे जैसे पौधा बढ़ता है. उसकी शाखाएं पोल के सहारे ऊपर जाती हैं और ऊपर फैलने लगती हैं. बाद में इसी हिस्से से फूल और फल निकलते हैं.

पौधों के बीच ठीक-ठाक दूरी रखना भी जरूरी है. बहुत ज्यादा घने पौधे लगाने से हवा का फ्लो प्रभावित हो सकता है और नमी ज्यादा देर तक बनी रह सकती है. इससे रोगों का खतरा बढ़ सकता है. खेत में केमिकल खाद की बजाए ऑर्गेनिक खाद का इस्तेमाल करें. अगर मिट्टी तैयार करते वक्त इन बातों को ध्यान रखेंगे तो खूब फायदा होगा.


ड्रैगन फ्रूट खेती का सही मौसम, जानें कब मिलेगी बंपर पैदावार

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

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