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खरीफ सीजन से पहले ऐसे शुरू करें खेत की तैयारी, ये काम करेंगे तो बढ़ेगा उत्पादन

Kharif Season Tips: मानसून आने से पहले खेत को रिचार्ज करने का वक्त आ गया है. जान लें मिट्टी की जांच से लेकर जुताई तक वह कौन से मॉडर्न तरीके हैं. जो इस बार आपकी खरीफ फसल की पैदावार को बंपर बना देंगे?

Kharif Season Tips: खरीफ का सीजन बस दस्तक देने ही वाला है और एक स्मार्ट किसान के लिए यही वह वक्त है. जब असली खेल शुरू होता है. ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बारिश शुरू होगी तब बीज डालेंगे. लेकिन सच तो यह है कि बंपर पैदावार की नींव मानसून की पहली बूंद गिरने से काफी पहले ही रख दी जाती है. मार्च-अप्रैल के इन दिनों में अगर आपने अपने खेत की 'सर्विसिंग' ढंग से कर ली. 

तो यकीन मानिए आपकी फसल न केवल कीटों से बची रहेगी बल्कि उसकी ग्रोथ भी देखने लायक होगी. मिट्टी की सेहत सुधारने से लेकर सही प्लानिंग तक. यह समय अपनी जमीन को रिचार्ज करने का है. चलिए आपको बताते हैं वे कौन से मॉडर्न और असरदार तरीके हैं जिन्हें अपनाकर आप इस खरीफ सीजन में अपने मुनाफे का ग्राफ आसमान पर पहुंचा सकते हैं.

मिट्टी की जांच फिर गहरी जुताई

गर्मी के इस मौसम में सबसे पहला और जरूरी काम है मिट्टी की टेस्टिंग करवाना, ताकि आपको पता चले कि आपकी जमीन को असल में किस 'डाइट' की जरूरत है. बिना सोचे-समझे खाद डालना सिर्फ पैसे की बर्बादी है.

  • मिट्टी की जांच के बाद आप जरूरत के हिसाब से ही यूरिया या डीएपी का इस्तेमाल करेंगे, जिससे लागत कम होगी.
  • इस समय 'गहरी जुताई' यानी Deep Ploughing करना बहुत फायदेमंद होता है.
  • इससे जमीन के अंदर छिपे हानिकारक कीटों के अंडे और बीमारियां तेज धूप में खत्म हो जाते हैं.
  • गहरी जुताई से मिट्टी नीचे से ऊपर आ जाती है. जिससे जमीन में हवा का संचार बढ़ता है और बारिश का पानी गहराई तक सोखने की क्षमता बढ़ जाती है.

यह प्रोसेस खरपतवारों की जड़ों को भी सुखा देती है. जिससे फसल के दौरान आपको ज्यादा निंदाई-गुड़ाई नहीं करनी पड़ती.

यह भी पढ़ें: अप्रैल में गार्डन को रखें हरा-भरा, गर्मी से बचाने के स्मार्ट तरीके

देसी खाद और ग्रीन मैन्योरिंग 

आजकल हर कोई ऑर्गेनिक की तरफ भाग रहा है, तो क्यों न आप भी अपनी जमीन को 'नेचुरल बूस्टर' दें? खरीफ की बुवाई से पहले खेत में गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट डालना मिट्टी की बनावट को एकदम मक्खन जैसा बना देता है.

  • अगर आपके पास समय है, तो 'हरी खाद' यानी ढैंचा या सनई की बुवाई करें और फूल आने से पहले उन्हें खेत में ही जोत दें.
  • यह तरीका मिट्टी में नाइट्रोजन की मात्रा को कुदरती तौर पर बढ़ा देता है, जिससे आपको बाद में महंगी खाद पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
  • देसी खाद डालने से मिट्टी की जल धारण क्षमता (Water Holding Capacity) बढ़ती है, जो सूखे जैसी स्थिति में आपकी फसल को बचाए रखती है.

याद रखें कच्चा गोबर कभी न डालें, हमेशा अच्छी तरह सड़ी हुई खाद का ही इस्तेमाल करें वरना दीमक का खतरा बढ़ सकता है.

मेढ़बंदी और लेजर लेवलिंग की स्मार्ट तकनीक

पानी की एक-एक बूंद कीमती है और खरीफ की फसल पूरी तरह मानसून पर टिकी होती है. इसलिए खेत की मेढ़ों को मजबूत करना और जमीन को समतल बनाना बहुत जरूरी है ताकि बारिश का पानी बाहर न बहे.

  • 'लेजर लैंड लेवलर' का इस्तेमाल करके अपने खेत को एकदम बराबर करवाएं; इससे पानी पूरे खेत में एक समान फैलता है और बिजली-डीजल की बचत होती है.
  • खेत के चारों तरफ ऊंची और मजबूत मेढ़ बनाएं ताकि उपजाऊ मिट्टी बहकर दूसरे के खेत में न चली जाए.
  • बुवाई से पहले बीजों का उपचार (Seed Treatment) करना न भूलें. यह एक छोटा सा कदम आपकी फसल को शुरुआती बीमारियों से बचा लेता है.

इस बार किस्मों का चुनाव अपनी मिट्टी और पानी की उपलब्धता के हिसाब से ही करें. देखा-देखी में कोई भी बीज न खरीदें.

यह भी पढ़ें: कुछ ही महीनों में उग आती हैं ये फसल, किसान भाई कमा सकते हैं तगड़ा मुनाफा

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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