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Intensive Farming: छोटी जमीन पर कम पानी में होगी ज्यादा मुनाफे वाली खेती, जानें कैसे छोटे किसानों के लिये फायदेमंद है गहन खेती

Beneficial Farming: ये खेती की ऐसी स्मार्ट तकनीक है, जिसके तहत कम पैसा, कम जमीन और पानी की कम खपत में ही किसानों को अच्छी पैदावार मिल जाती है.

Farming Technique for Small Farmer: भारत के ग्रामीण इलाकों (Rural India) में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत (Small Farmers)होते हैं, इनके पास खेती के लिये जमीन तो कम होती ही है, साथ ही संसाधनों का भी अभाव है. ये किसान कम पानी में ही ज्यादा से ज्यादा 2 हेक्टेयर की खेती योग्य जमीन पर पसीना बहाने के लिये मजबूर होते हैं. इसी जमीन से किसानों के घरेलू खर्चे पूरे होते हैं और इन्हीं से अगली फसल का इंतजाम करना होता है. खेती करने के सही तरीकों की जानकारी न होने पर इन किसानों को नुकसान भी झेलना पड़ जाता है. लेकिन कम जोत की भूमि में गहन खेती (Intensive Farming) करके किसान अच्छी आमदनी कमा सकते हैं.

क्या है गहन खेती
गहन खेती को कम संसाधनों वाली खेती भी कहते हैं. ये खेती की ऐसी स्मार्ट तकनीक है, जिसके तहत कम पैसा, कम जमीन और पानी की कम खपत में ही किसानों को अच्छी पैदावार मिल जाती है. कई राज्यों में किसान इस विधि से खेती करके अच्छी आमदनी कमा रहे हैं और धीरे-धीरे सफलता हासिल कर रहे हैं. 

  • इस विधि से खेती करने पर फसल में खरपतवार की संभावना कम रहती है.
  • गहन खेती में ज्यादा सिंचाई की जरूरत नहीं होती, सिर्फ मिट्टी में नमी बनाने से ही काम चल जाता है.
  • इस विधि में कम जमीन पर कम से कम दो फसलें उगा सकते हैं, जो एक-दूसरे के लिये पोषण का काम करती है.
  • किसान चाहें तो गहन खेती के जरिये कम जमीन पर दालों और सब्जियों की सह-फसली खेती भी कर सकते हैं.
  • कम संसाधनों  वाली इस खेती में पौधों का साइज और मात्रा कम होती है, जिससे निराई-गुड़ाई के साथ छिड़काव भी आसानी से हो जाता है.
  • जरूरत के हिसाब से पानी और खाद-उर्वरक के इस्तेमाल के कारण फसलों का अच्छी क्वालिटी वाला उत्पादन मिल जाता है. 


Intensive Farming: छोटी जमीन पर कम पानी में होगी ज्यादा मुनाफे वाली खेती, जानें कैसे छोटे किसानों के लिये फायदेमंद है गहन खेती

कैसे करें गहन खेती
गहन खेती की विधि में फसलों की छोटी किस्मों के पौधे लगाये जाते हैं, जो जमीन पर कम जगह घेरते हैं और बची हुई जमीन पर दूसरी किस्म के पौधे लगाये जाते हैं.

  • इस दौरान पौधों की बढ़वार रोकने के लिये वृद्धि अवरोधक हार्मोन का प्रयोग किया जाता है, जिससे जरूरत के मुताबिक ही पैदावार मिल सके.
  • इस विधि में पौधों की कटाई-छंटाई करते रहना जरूरी है, ताकि फसल का आकार न बढ़े और फसल की निगरानी भी होती रहे.
  • इस विधि से लंबी अवधि वाले फलों की खेती कर सकते हैं, जिसके तहत 10-12 वर्ष तक पेड़ों की कटाई-छंटाई की जाती है.
  • यदि पेड़ों की टहनियां आपस में टकराने लगें तो अनावश्यक टहनियां या पेड़ों की एक लाइन हटा दी जाती है.
  • फल के बागों में खाली स्थान पर सब्जी, दाल, मसाले और औषधीय फसलों की खेती कर सकते हैं.
  • इस विधि में क्यारियां बनाकर फसलें उगाई जाती है, जिससे कम समय में ही अच्छी पैदावार मिल जाती है.
  • गहन खेती के लिये पशुओं की मदद से या हल से खेत की जुताई और बाकी दूसरे काम खुद किसान करते हैं.
  • फलों और सब्जियों (Horticulture) की खेती के लिये गहन विधि (Intensive Farming) का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे कम जमीन में ज्यादा उत्पादन लिया जा सके.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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