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Pomegranate Farming: फार्म हाउस पर ऐसे करें अनार की खेती, जानें एक पेड़ से कितनी होती है पैदावार?

Pomegranate Farming: अनार गर्म और शुष्क जलवायु की फसल है. फल बनने और पकने के समय गर्म तथा सूखा मौसम इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. ज्यादा नमी और लगातार बारिश से रोगों का खतरा बढ़ जाता है.

Pomegranate Farming: अनार की खेती अब किसानों के लिए अच्छी आमदनी देने वाली फसलों में शामिल हो चुकी है. देश और विदेश दोनों बाजारों में अनार की मांग लगातार बनी रहती हैं. खासकर आकर्षक रंग, बड़े आकार और अच्छे दानों वाले फलों की कीमत ज्यादा मिलती है. यही वजह है कि महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, कर्नाटक, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के किसान बड़े पैमाने पर इसकी खेती कर रहे हैं. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि आप फार्म हाउस पर अनार की खेती कैसे कर सकते हैं और एक पेड़ से कितनी पैदावार होती है. 

अनार की खेती के लिए जलवायु और मिट्टी 

अनार गर्म और शुष्क जलवायु की फसल है. फल बनने और पकने के समय गर्म तथा सूखा मौसम इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है. ज्यादा नमी और लगातार बारिश से रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जबकि पाला और अत्यधिक ठंड पौधों को नुकसान पहुंचा सकती है. मिट्टी की बात करें तो अच्छी जल निकासी वाली गहरी दोमट, बालू दोमट और जलोढ़ मिट्टी अनार के लिए सबसे उपयुक्त मानी जाती है. वहीं खेत में पानी रुकने की स्थिति में जड़ सड़न जैसी समस्याएं बढ़ सकती है. इसलिए जल निकासी की व्यवस्था सही होनी चाहिए. 

खेती की तैयारी कैसे करें?

अनार का बाग लगाने से पहले खेत की अच्छी तरह तैयारी करना जरूरी होता है. इसके लिए खेत की दो से तीन बार गरीब जुताई कर मिट्टी को भुरभुरी बनाया जाता है. इसके बाद खरपतवार और पत्थरों जैसी अवांछित चीजों को हटाकर खेत समतल किया जाता है. रोपाई से लगभग एक माह पहले 60 सेमी से 1 मीटर आकार के गड्ढे तैयार किए जाते हैं. इन गड्ढों में सड़ी हुई गोबर की खाद, मिट्टी और सुपर फास्फेट मिलकर भरा जाता है. इसके बाद हेल्दी और रोग मुक्त पौधों की रोपाई की जाती है. 

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कौन सी किस्म देती है बेहतर उत्पादन? 

देश में अनार की कई उन्नत किस्में की खेती की जाती है, जिनमें भगवा, गणेश, रूबी, अरक्ता, बेदाना, ढोलका और जोधपुर लोकल प्रमुख है. इनमें भगवा किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है. इसके फल बड़े आकार के चमकदार और आकर्षक रंग वाले होते हैं. साथ ही यह किस्म फल धब्बा रोग और थ्रिप्स जैसे कीटों के प्रति अपेक्षाकृत बहुत कम संवेदनशील मानी जाती है. वहीं अनार की रोपाई सामान्य वर्गाकार पद्धति से की जाती है. पौधों के बीच 4 से 5 मीटर की दूरी रखी जाती है. एक एकड़ क्षेत्र में औसतन 240 पौधे लगाए जा सकते हैं. 

अनार के एक पेड़ से कितनी होती है पैदावार?

अनार के पौधे रोपण के लगभग 2 से 3 साल बाद फल देना शुरू करते हैं. जब फलों का रंग पूरी तरह विकसित हो जाए और उनका आकार पूर्ण रूप से बन जाने पर तुड़ाई करनी चाहिए. तुड़ाई के बाद फलों को सावधानी से संभालना जरूरी होता है, क्योंकि अच्छी क्वालिटी वाले फलों को बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. वहीं उन्नत प्रबंधन और अच्छी देखभाल के साथ भगवा जैसी लोकप्रिय किस्म से शुरुआत में औसतन 14 किलोग्राम तक फल प्रति पेड़ प्राप्त किया जा सकते हैं. पौधों की उम्र बढ़ने के साथ उत्पादन में भी वृद्धि होती है. 

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कविता एबीपी नेटवर्क नोएडा के साथ बतौर कंटेंट राइटर काम कर रही है. वर्तमान में कविता का मुख्य फोकस शिक्षा, करियर और नौकरी से जुड़ी खबरों पर रहता है.

करीब 3.5 साल से पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी कव‍िता एबीपी नेटवर्क से पहले राजस्थान पत्रिका में काम कर चुकी है. यहां  उन्होंने नेशनल एडिशन और अलग-अलग सप्लीमेंट्स के लिए काम किया. राजस्थान पत्रिका में करियर की उड़ान और सी न्यूज जैसे कॉलम वह कवर करती थी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो के साथ काम करने का अवसर मिला, जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन की बारीकियों को समझने का अनुभव दिया. वहीं पत्रकारिता के अलावा कविता की खास रुचि खेल, विशेष रूप से क्रिकेट में है. राजस्थान पत्रिका में रहते हुए कविता ने मदर्स डे स्पेशल स्पोर्ट्स एडिशन में भी काम किया है.

पढ़ाई की बात करें तो कविता ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई की.

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