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कम बारिश में भी अरहर की फसल से होगी तगड़ी कमाई, जानिए एक्सपर्ट्स का यह तरीका

Pigeon Pea Farming Tips: कम बारिश में भी अरहर की खेती किसानों के लिए मुनाफे का सौदा साबित हो सकती है. लागत कम होने और बाजार में भारी मांग रहने से किसानों को तगड़ी कमाई होती है.

Pigeon Pea Farming Tips: मौसम के बदलते मिजाज और कम बारिश की वजह से आजकल खेती करना काफी रिस्की हो गया है. लेकिन नई तकनीक को अपनाकर इस मुश्किल को भी मुनाफे में बदला जा सकता है. अगर इस बार आपके इलाके में मानसून थोड़ा सुस्त है या पानी की कमी है. तो टेंशन लेने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक कम पानी और सूखे जैसे हालात में अरहर की खेती किसानों के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है. 

अरहर एक ऐसी मजबूत और सहनशील फसल है जो कम नमी में भी शानदार ग्रोथ करती है. आज के टाइम में पारंपरिक तरीकों को छोड़कर अगर सही साइंटिफिक मैनेजमेंट और एक्सपर्ट्स की बताई ट्रिक्स को फॉलो किया जाए. तो कम लागत में भी बंपर पैदावार हासिल की जा सकती है. यह तकनीक न केवल आपकी फसल को सूखे से बचाएगी बल्कि मार्केट में इसकी भारी डिमांड के चलते आपकी जेब को नोटों से भर देगी.

अपनाएं ये स्पेशल फार्मूला

अरहर की खेती से तगड़ा मुनाफा कमाने के लिए सबसे पहला और जरूरी स्टेप है सही वैरायटी के बीजों का चुनाव करना. एग्रीकल्चर एक्सपर्ट्स हमेशा ऐसी एडवांस्ड और हाइब्रिड किस्मों को बोने की सलाह देते हैं जो कम समय में तैयार हो जाएं और जिन्हें बहुत कम पानी की जरूरत हो. खेत तैयार करते समय इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि मिट्टी में जलभराव न हो क्योंकि अरहर के पौधों को नमी तो पसंद है पर जड़ों में पानी जमा होना इसकी दुश्मन है. 

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ऐसे चुनें बीज

बुवाई से पहले बीजों का राइजोबियम कल्चर से ट्रीटमेंट करना बेहद जरूरी है जिससे पौधों की इम्युनिटी बढ़ती है और वे बीमारियों से बचे रहते हैं. मॉडर्न कल्टीवेशन के तहत कतार से कतार यानी लाइनों में बुवाई करने से पौधों को फैलने के लिए पूरा स्पेस मिलता है. यह स्मार्ट तरीका कम संसाधनों में भी फसल को सॉलिड और तंदुरुस्त बनाता है.

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कम लागत में बंपर पैदावार 

इस खेती की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें सिंचाई का झंझट बहुत कम होता है जिससे किसानों का पानी और बिजली का खर्च सीधे तौर पर बच जाता है. अरहर की फसल मिट्टी की उपजाऊ क्षमता को भी नेचुरल तरीके से बढ़ाती है. जिसका फायदा अगली फसलों को मिलता है. एक्सपर्ट्स बताते हैं कि जब फसल पककर तैयार होती है तो मार्केट में इसकी दाल की डिमांड हमेशा सातवें आसमान पर रहती है. 

छप्परफाड़ कमाई की गारंटी

कम पानी में तैयार हुई यह प्रीमियम क्वालिटी की अरहर मंडी में बहुत ऊंचे दामों पर बिकती है. अगर आप अपनी सूझबूझ से इसके साथ सह-फसल यानी इंटरक्रॉपिंग के तौर पर उड़द या मूंग जैसी फसलें भी लगा लेते हैं, तो आपकी कमाई सीधे दोगुनी हो जाती है. कम बारिश के इस सीजन में अरहर की यह स्मार्ट फार्मिंग वाकई हर किसान भाई को एक अमीर और आत्मनिर्भर बिजनेसमैन बनाने का सबसे बेस्ट और कारगर जरिया है.

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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