खेती में चार चांद लगा देगा फील्डकिंग स्क्वायर बेलर, जानें इसकी कीमत
पराली और भूसे की टेंशन होगी खत्म. खेती को स्मार्ट बनाने वाली इस फील्डकिंग स्क्वायर बेलर मशीन के फीचर्स और कीमत जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान. जान लें कैसे आपके लिए फायदेमंद साबित होगी यह मशीन.

- खेत में पराली बटोरना मुशिकुल होता है यह मशीन पुआल की गांठें बनाती है.
- फील्डकिंग बेलर सूखी सामग्री समेटकर उसे व्यवस्थित आयताकार गांठों में बदलता है.
- इसके FKSB-511 मॉडल को 35-50 HP ट्रैक्टर की जरूरत होती है.
- मशीन की कीमत करीब 23.24 लाख रुपये है.
खेती में मशीनों का इस्तेमाल बढ़ने से कई काम पहले के मुकाबले आसान हुए हैं. फिर भी फसल कटने के बाद खेत में बची पराली, पुआल और सूखी घास को समेटना किसानों के लिए मेहनत वाला काम है. इन्हें इकट्ठा करने के लिए मजदूर चाहिए. फिर रखने की जगह और ढुलाई का इंतजाम भी करना पड़ता है. खासकर जब अगली फसल की तैयारी करनी हो, तब इस काम में लगने वाला समय ज्यादा अखरता है.
फील्डकिंग का स्क्वायर बेलर इसी काम में मदद करता है. यह खेत में पड़ी सूखी सामग्री को समेटकर उसकी बंधी हुई गांठें तैयार करता है. ऐसे में पुआल को खुले ढेर में रखने के बजाय एक जगह जमाकर रखा जा सकता है. हालांकि मशीन खरीदने से पहले यह समझना जरूरी है कि आपके यहां इसका कितना इस्तेमाल होगा. इसे चलाने के लिए कैसा ट्रैक्टर चाहिए और कितने पैसे खर्च करने होंगे? चलिए जानते हैं इसके फीचर्स और कीमत.
खेत में बचे पुआल को कैसे समेटती है मशीन?
कटाई के बाद खेत में बिखरे पुआल को हाथ से इकट्ठा करने में काफी वक्त लग सकता है. फील्डकिंग स्क्वायर बेलर का पिकअप सिस्टम इस सामग्री को उठाकर मशीन के अंदर पहुंचाता है. वहां उसे दबाकर आयताकार गांठों में बांध दिया जाता है. इससे पुआल बिखरा नहीं रहता. तैयार गांठों को उठाना, ट्रॉली में रखना और जरूरत की जगह तक पहुंचाना आसान हो जाता है.
जिन किसानों को सूखी घास और पुआल संभालकर रखना होता है, उनके लिए यह तरीका काम का है. ढीली सामग्री काफी जगह घेरती है. दबाकर गांठ बनाने से उसे व्यवस्थित ढंग से रखा जा सकता है. खेत से पराली हटाकर उसका इस्तेमाल करने का रास्ता भी मिलता है. हालांकि अगली फसल की तैयारी के लिए जरूरत के मुताबिक बाकी काम करने होंगे. बेलर मुख्य रूप से सामग्री समेटने और बांधने का काम करता है.

क्या है इसके फीचर्स?
फील्डकिंग स्क्वायर बेलर के FKSB-511 मॉडल को चलाने के लिए 35 से 50 एचपी के ट्रैक्टर की जरूरत होती है. इसकी पिकअप चौड़ाई करीब 1850 मिलीमीटर यानी 73 इंच है. मशीन में लगा फीडर और खास आकार के कांटे पुआल उठाने में मदद करते हैं. खरीदने से पहले अपने ट्रैक्टर के साथ इसका डेमो भी देख लें जिससे कि आपको काम करने का तरीका समझ में आ जाए.
इसकी पीटीओ शाफ्ट स्पीड 540 आरपीएम है. पीटीओ के जरिए ही ट्रैक्टर से मशीन को चलने की ताकत मिलती है. गांठ की लंबाई जरूरत के हिसाब से 0.3 मीटर से 1.3 मीटर तक रख सकते हैं. मशीन में स्लिप क्लच और शीयर बोल्ट भी दिए गए हैं. जो ज्यादा लोड पड़ने पर ट्रांसमिशन की सेफ्टी में मदद करते हैं. मशीन की सही सेटिंग और रेगुलर देखभाल का ध्यान रखना भी जरूरी है.
यह भी पढ़ें: BRICS से किसानों के लिए क्या निकला? जानें नई दिल्ली घोषणा पत्र की बातें
कितनी है इसकी कीमत?
फील्डकिंग स्क्वायर बेलर की कीमत की बात की जाए तो यह तकरीबन 23.24 लाख रुपये के आसपास बताई गई है. जगह, डीलर और डिलीवरी के खर्च के हिसाब से कुछ जगहों पर कीमत कम या ज्यादा भी हो सकती है. इसलिए खरीदने से पहले पूरा कोटेशन लें. यह भी पूछें कि बताई गई कीमत में कौन से खर्च शामिल हैं. आपको बता दें इस मशीन का वजन करीब 1330 किलोग्राम है. इसे रखने की जगह और सर्विस की सुविधा भी पहले देख लें.

इतना पैसा लगाने से पहले अपने यहां काम का हिसाब बनाना जरूरी है. साल में कितना पुआल निकलता है, मशीन कितने दिन चलेगी और अभी मजदूरी पर कितना खर्च होता है, इन बातों को जोड़कर देखें. तो इसके साथ में डीजल, गांठ बांधने के धागे और रखरखाव का खर्च रखें. अगर आपके पास काम ज्यादा है तो फिर मशीन काफी फायदेमंद साबित हो सकती है. वही आप दूसरों के काम भी किराए पर लेकर एक्सट्रा कमाई कर सकते हैं.
यह भी पढ़ें: लाल साग की खेती में कैसे कमाएं दोगुना मुनाफा, जान लें ये ट्रिक





















