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बारिश का मौसम है सबसे सही मौका, जुलाई में लगाएं ये 5 पौधे और पाएं शानदार रिटर्न

Monsoon Planting Tips: मानसून का समय नए पौधे लगाने के लिए सबसे बेहतर माना जाता है. सही समय पर सही पौधों का चुनाव करने से उनकी बढ़वार अच्छी होती है और आगे चलकर बेहतर आर्थिक लाभ मिलता है.

Monsoon Planting Tips: जुलाई के महीने में मानसून की नमी खेती-किसानी के लिए किसी वरदान से कम नहीं होती हैं. इस मौसम में ज़मीन में नमी ठीक-ठाक होती है. जिससे नए पौधे बहुत तेज़ी से जड़ पकड़ते हैं और उनके सूखने का खतरा न के बराबर रहता है. अगर आप अपनी खाली पड़ी ज़मीन, मेड़ों या फार्म हाउस का सही इस्तेमाल करके भविष्य के लिए मोटा मुनाफा कमाना चाहते हैं. 

तो जुलाई का महीना नए पेड़-पौधे लगाने का सबसे बेस्ट टाइम है. इस समय सही पौधों का चयन आपकी सालों की कमाई का पक्का इंतज़ाम कर सकता है. चलिए आपको बताते हैं उन 5 शानदार पौधों के बारे में जिन्हें जुलाई में लगाकर आप कम लागत और आसान देखभाल में आने वाले सालों में बंपर रिटर्न पा सकते हैं.

ये 5 पौधे जुलाई में भरेंगे आपकी तिजोरी

मानसून के इस सीजन में आप सागौन, यूकेलिप्टस, महोगनी, बांस और पपीता या अमरुद जैसे फलदार पौधों को चुन सकते हैं. इमारती लकड़ी देने वाले पेड़ जैसे सागौन और महोगनी की मार्केट में हमेशा भारी डिमांड रहती है. इन्हें खेत की मेड़ों पर लगाकर आप मुख्य फसल के साथ-साथ एक बढ़िया फिक्स्ड डिपॉजिट तैयार कर सकते हैं. 

इन पौधों से भी अच्छी कमाई

वहीं अगर आप जल्दी कमाई चाहते हैं. तो पपीता या हाइब्रिड अमरूद के पौधे बेहतरीन ऑप्शन हैं. जो महज 1 से 2 साल में फल देने लगते हैं. इसके अलावा बांस का पौधा भी तेज़ी से बढ़ता है और कम देखभाल में सालों-साल अच्छी कमाई कराता है.

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कम देखभाल में कैसे मिलेगा तगड़ा मुनाफा

जुलाई में पौधरोपण की सबसे बड़ी खूबी यह है कि आपको सिंचाई की ज्यादा टेंशन नहीं लेनी पड़ती. क्योंकि बारिश से पौधों को कुदरती पानी और न्यूट्रिएंट्स मिलते रहते हैं. बस आपको गड्ढा खोदते समय सही मात्रा में गोबर की खाद या वर्मीकंपोस्ट मिला देनी है और जलभराव से बचाव का इंतज़ाम रखना है जिससे जड़ें न सड़ें. 

इन बातों का ध्यान रखें

इन पौधों को लगाने के बाद शुरुआती कुछ महीनों में पौधों के आसपास खरपतवार हटाते रहें और आवारा पशुओं से बचाव के लिए घेराबंदी कर दें. 8 से 10 सालों में जब इमारती लकड़ी के यह पेड़ तैयार होते हैं. तो इनकी कीमत लाखों में होती है. सही समय पर सही पौधे लगाकर आप कम मेहनत में भविष्य के लिए एक बढ़िया कमाई का इंतजाम कर सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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