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अगली फसल देगी डबल मुनाफा, बस अभी से खेत में कर लें यह एक छोटा सा काम

Farming Tips: महंगे केमिकल छोड़ अभी खेत में अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिलाएं. यह मिट्टी को ताकतवर बनाकर नमी और जरूरी न्यूट्रिएंट्स बढ़ाती है. इससे लागत आधी होगी और पैदावार डबल हो जाती है.

Farming Tips: खेती में हर किसान का एक ही सपना होता है कम से कम लागत में सबसे बंपर पैदावार मिलना. लेकिन लगातार केमिकल फर्टिलाइजर्स का इस्तेमाल करके हम अपनी खेतों की मिट्टी को बेजान और बंजर बनाते जा रहे हैं. अगर आप भी चाहते हैं कि आपकी अगली फसल सीधे डबल मुनाफा दे. तो आपको अभी से एक बहुत ही आसान और पुराना देसी नुस्खा अपनाना होगा. 

हम बात कर रहे हैं अच्छी तरह से सड़ी हुई गोबर की खाद की. आज भी खेती में इसका सही इस्तेमाल मिट्टी की पूरी कायापलट कर देता है. इसलिए आपको अभी सही समय है अपनी जमीन को ताकतवर बनाएं. जिससे आने वाले सीजन में फसल की क्वालिटी और क्वांटिटी दोनों देखकर आपका दिल खुश हो जाए. जान लीजिए इसका तरीका. 

गोबर की खाद डालने का सही समय 

ज्यादातर किसान सबसे बड़ी गलती यह करते हैं कि वे खेतों में कच्चा या ताजा गोबर डाल देते हैं. जिससे फायदे की जगह नुकसान हो जाता है और फसल में दीमक लग जाती है. गोबर की खाद का पूरा फायदा उठाने के लिए उसका अच्छी तरह से सड़ा हुआ होना बेहद जरूरी है. इसे तैयार करने के लिए गोबर को खुले में छोड़ने के बजाय एक गहरे गड्ढे में डालकर कुछ महीनों के लिए ढक देना चाहिए. 

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जिससे वह केंचुआ खाद जैसी भुरभुरी और डार्क ब्राउन हो जाए. इस खाद को खेत में डालने का सबसे बेस्ट टाइम जुताई के दौरान होता है. फसल बोने से करीब 15 से 20 दिन पहले इसे पूरे खेत में बराबर बिखेरकर मिट्टी में अच्छे से मिला देना चाहिए जिससे यह जमीन के अंदर गहराई तक समा जाए.

मिट्टी की सेहत सुधरेगी 

जब आप सही तरीके से तैयार की गई गोबर की खाद खेत में डालते हैं. तो यह मिट्टी के स्ट्रक्चर को पूरी तरह बदल देती है. यह जमीन की वाटर होल्डिंग कैपेसिटी यानी पानी रोकने की क्षमता को बढ़ाती है. जिससे सूखे के समय भी पौधों में नमी बनी रहती है. इसके अलावा यह मिट्टी में मौजूद फ्रेंडली बैक्टीरिया और केंचुओं की संख्या को बढ़ाती है, जो जमीन को अंदर से पोला और हवादार बनाते हैं. 

जेब का खर्च होगा आधा

इससे पौधों की जड़ों का विकास बहुत तेजी से होता है और वे मिट्टी से सारे जरूरी न्यूट्रिएंट्स आसानी से खींच पाते हैं. सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपको महंगे यूरिया और डीएपी जैसे केमिकल्स पर पैसे बर्बाद नहीं करने पड़ते. जिससे आपकी खेती की लागत आधी हो जाती है और सीधे तौर पर आपका मुनाफा डबल हो जाता है.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है.

न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है.

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