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खीरा निकलेगा एकदम मीठा और रसीला, बस खेती के दौरान न करें ये छोटी गलतियां

Cucumbers Farming Tips: खीरे में कड़वाहट की दो बड़ी वजहें होती हैं. अगर आप खीरा उगाते समय इन गलतियों से बचते हैं. तो खीरा हमेशा मीठा और रसीला ही निकलेगा.

Cucumbers Farming Tips: खीरे की खेती में सबसे बड़ा सिरदर्द तब होता है जब मेहनत से उगाई गई फसल कड़वी निकल आती है. सोचिए आपने पूरी लगन से बागवानी की और जब फल बाजार पहुँचा तो कड़वाहट की वजह से उसकी वैल्यू जीरो हो गई. अक्सर किसानों को लगता है कि खीरे के लिए यह सामान्य प्रोसेस है. लेकिन सच ये है कि खीरे में कड़वाहट हमारी छोटी-छोटी गलतियों और पौधों पर पड़ने वाले स्ट्रेस की वजह से आती है.

गर्मियों के मौसम में जब टेम्परेचर हाई होता है.  तब पौधों की एक्स्ट्रा केयर की जरूरत पड़ती है जिससे उनमें कुकरबिटेसिन नाम का तत्व न बढ़े. जो कड़वाहट का असली विलेन है. अगर आप सही समय पर सिंचाई और मिट्टी के पोषण का ध्यान रखें. तो आपका खीरा एकदम मीठा और रसीला निकलेगा. जिससे मार्केट में आपको अपनी फसल का तगड़ा रेट और डिमांड दोनों मिलेंगे.

पानी की कमी और हीट स्ट्रेस से बढ़ती है कड़वाहट

खीरे में कड़वाहट आने की सबसे बड़ी वजह है सिंचाई में लापरवाही. खीरे के पौधे को नमी बहुत पसंद होती है और जैसे ही मिट्टी सूखने लगती है, पौधा स्ट्रेस में आ जाता है. तपती गर्मी में जब पौधों को सही मात्रा में पानी नहीं मिलता. तो वे खुद को बचाने के लिए कुकरबिटेसिन रिलीज करने लगते हैं. जिससे फल कड़वे हो जाते हैं. इसके अलावा अचानक टेम्परेचर का बहुत ज्यादा बढ़ जाना या बहुत कम हो जाना भी फसल की क्वालिटी बिगाड़ देता है.

  • सिंचाई का एक फिक्स टाइम रखें और कोशिश करें कि मिट्टी हमेशा हल्की नम बनी रहे ताकि पौधों को प्यास न लगे.
  • दोपहर की तेज धूप से बचाने के लिए अगर संभव हो तो ग्रीन नेट या मल्चिंग का इस्तेमाल करें, जिससे नमी लंबे समय तक टिकी रहे.

अगर आप पानी के मैनेजमेंट को मास्टर कर लेते हैं. तो कड़वाहट की समस्या 80% तक खत्म हो सकती है.

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खाद देने का सही तरीका

कई बार किसान ज्यादा पैदावार के चक्कर में अंधाधुंध खाद डाल देते हैं, जो खीरे के स्वाद को बिगाड़ सकता है. मिट्टी में नाइट्रोजन की बहुत ज्यादा मात्रा और जरूरी माइक्रो-न्यूट्रिएंट्स की कमी फलों को बेस्वाद और कड़वा बना देती है. सही तरीका यह है कि आप मिट्टी की जांच कराएं और बैलेंस्ड मात्रा में ही फर्टिलाइजर का यूज करें. ऑर्गेनिक खाद या वर्मीकम्पोस्ट का इस्तेमाल खीरे की नेचुरल मिठास को बनाए रखने में सबसे ज्यादा मददगार साबित होता है.

  • पोटाश और फास्फोरस का सही बैलेंस रखें, क्योंकि ये तत्व फलों के साइज और मिठास को बढ़ाने में मदद करते हैं.
  • पौधों के पास जमा खरपतवार को हटाते रहें, क्योंकि ये मुख्य फसल का पोषण चुरा लेते हैं और पौधों को कमजोर कर देते हैं.

मिट्टी को जितना हेल्दी रखेंगे. फल उतना ही रसीला और क्वालिटी वाला तैयार होगा.

सही समय पर हार्वेस्टिंग

कड़वाहट से बचने का एक मॉडर्न तरीका है अच्छी क्वालिटी के हाइब्रिड बीजों का इस्तेमाल करना. आजकल मार्केट में ऐसी वैरायटी उपलब्ध हैं जो कड़वाहट-मुक्त यानी बिटर-फ्री होने की गारंटी देती हैं. इसके अलावा खीरे को तोड़ने का समय भी बहुत मायने रखता है. अगर फल जरूरत से ज्यादा बड़ा हो जाए या बेल पर ही पकने लगे. तो उसमें कड़वाहट आने के चांस बढ़ जाते हैं. छोटे और मीडियम साइज के खीरे न सिर्फ खाने में टेस्टी होते हैं बल्कि उनकी डिमांड भी ज्यादा रहती है.

  • हमेशा भरोसेमंद नर्सरी या ब्रांडेड कंपनियों के बीज ही खरीदें जो मौसम की मार झेलने में सक्षम हों.
  • फलों की तुड़ाई सुबह के समय करें जब उनमें नमी का लेवल सबसे ज्यादा होता है और वे एकदम फ्रेश रहते हैं.

इन सीक्रेट्स को अपनाकर आप अपनी खीरे की फसल को फेल होने से बचा सकते हैं और मार्केट में अपनी एक अलग पहचान बना सकते हैं.

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About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा एबीपी न्यूज़ में कार्यरत हैं और फिलहाल टेक बीट संभाल रहे हैं. इससे पहले वह स्पोर्ट्ज़विकी और क्रिकएडिक्टर में सब एडिटर, इनशॉर्ट्स में हिंदी कंटेट स्पेशलिस्ट और ज़ी हिंदुस्तान और ज़ी राजस्थान में काम कर चुके हैं. पत्रकारिता के दौरान उन्होंने कई क्रिकेट मैच कवर किए हैं और क्रिकेट लाइव स्ट्रीमिंग भी होस्ट की है.

न्यूज़ और खेल के साथ नीलेश की दिलचस्पी गीत लेखन में भी है. पिछले साल उनके लिखे एक गीत को बॉलीवुड सिंगर अर्नब दत्ता की आवाज़ में रिलीज़ किया गया. पढ़ाई की बात करें तो उन्होंने मुरैना के अंबाह पीजी कॉलेज से बीए की डिग्री हासिल की है. इसके अलावा, उन्होंने ज़ी इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया आर्ट्स से डिजिटल जर्नलिज़्म में पीजी डिप्लोमा किया है.

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