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Urea fertilizer: यूरिया डालने से पहले जान लें ये 5 बातें, नहीं तो हो सकता है नुकसान

अगर खेत में यूरिया गलत समय, गलत तरीके या गलत मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो फसल को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है. कई बार खाद का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या पानी के साथ बैठ जाता है

Urea fertilizer: फसल की अच्छी पैदावार के लिए किसान खेतों में यूरिया का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, लेकिन सिर्फ यूरिया डाल देना ही अच्छे उत्पादन की गारंटी नहीं होता. अगर इसे गलत समय, गलत तरीके या गलत मात्रा में इस्तेमाल किया जाए तो फसल को पूरा पोषण नहीं मिल पाता है. कई बार खाद का बड़ा हिस्सा हवा में उड़ जाता है या पानी के साथ बैठ जाता है, जिससे किसानों की लागत तो बढ़ती है लेकिन उत्पादन पर उसका असर नहीं दिखाई देता है. ऐसे में चलिए आज हम आपको बताते हैं कि खेत में यूरिया डालने से पहले कौन सी पांच बातें जान लें, नहीं तो आपको भी नुकसान हो सकता है.

सूखी मिट्टी में कभी न डालें यूरिया

कृषि एक्सपर्ट्स के अनुसार, कई किसान सिंचाई से पहले ही खेत में यूरिया डाल देते हैं, जबकि यह तरीका सही नहीं माना जाता है. सूखी मिट्टी पर डाली गई यूरिया धूप और हवा के संपर्क में आने के बाद अमोनिया गैस के रूप में उड़ सकती है. उसके अलावा बची हुई नाइट्रोजन सिंचाई के दौरान मिट्टी की गहराई में चली जाती है, जिससे पौधों की जड़ों तक पर्याप्त पोषण नहीं पहुंच पाता. ऐसे में फसल को यूरिया का लाभ नहीं मिल पाता और खाद बेकार चली जाती है.

दोपहर में न डालें यूरिया

खेत में यूरिया डालने के लिए सुबह या फिर शाम का समय सबसे सही माना जाता है. इस समय तापमान कम रहता और मिट्टी में मौजूद नमी के कारण नाइट्रोजन का नुकसान कम होता है. ऐसे में दोपहर की तेज धूप में यूरिया डालने से उसका कुछ हिस्सा गैस बनकर उड़ सकता है. वहीं अगर खेत में हल्की नमी हो या सिंचाई के बाद मिट्टी नम हो तो यूरिया बेहतर तरीके से अवशोषित हो पाता है.

सिंचाई तुरंत बात भी ना डालें खाद

एक्सपर्ट्स के अनुसार पहले खेत की सिंचाई करें और उसके बाद तुरंत बाद यूरिया डालने की बजाय कुछ समय इंतजार करें. जब खेत का एक्स्ट्रा पानी निकल जाए और जमीन चलने लायक हो जाए तब यूरिया डालना ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि सिंचाई के दो से तीन दिन बाद खासकर शाम के समय यूरिया का छिड़काव करने से खाद का नुकसान कम होता है और पौधे पर उसका असर सही रहता है.

मौसम का पूर्वानुमान भी देखें

अगर हल्की बारिश की संभावना हो तो बारिश से ठीक पहले यूरिया डालना फायदेमंद हो सकता है. क्योंकि बारिश का पानी खाद को मिट्टी तक पहुंचने में मदद करता है. हालांकि तेज बारिश या लगातार बारिश की आशंका होने पर यूरिया नहीं डालना चाहिए. ऐसे में खाद बहकर खेत से बाहर निकल जाती है और पौधों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है.

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जरूर से ज्यादा यूरिया ना डालें

कृषि एक्सपर्ट्स का कहना है कि ज्यादा मात्रा में यूरिया डालने से फसल का फायदा नहीं, बल्कि नुकसान हो सकता है. जरूर से ज्यादा नाइट्रोजन मिलने पर पौधों की लंबाई तेजी से बढ़ती है, लेकिन तना कमजोर हो जाता है. इससे तेज हवा या बारिश के दौरान फसल गिरने का खतरा बढ़ जाता है. इसके अलावा ज्यादा यूरिया के इस्तेमाल से फसल में कीड़े और बीमारियों को खतरा बढ़ जाता है, इसलिए हमेशा इसे संतुलित मात्रा में ही डालना चाहिए.

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कविता गाडरी बीते कुछ साल से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता की दुनिया से जुड़ी हुई है. राजस्थान के जयपुर से ताल्लुक रखने वाली कविता ने अपनी पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय भोपाल से न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी में मास्टर्स और अपेक्स यूनिवर्सिटी जयपुर से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में की है. 
पत्रकारिता में अपना सफर उन्होंने राजस्थान पत्रिका से शुरू किया जहां उन्होंने नेशनल एडिशन और सप्लीमेंट्स जैसे करियर की उड़ान और शी न्यूज के लिए बाय लाइन स्टोरी लिखी. इसी दौरान उन्हें हेलो डॉक्टर शो पर काम करने का मौका मिला. जिसने उन्हें न्यूज़ प्रोडक्शन के लिए नए अनुभव दिए. 

इसके बाद उन्होंने एबीपी नेटवर्क नोएडा का रुख किया. यहां बतौर कंटेंट राइटर उन्होंने लाइफस्टाइल, करंट अफेयर्स और ट्रेडिंग विषयों पर स्टोरीज लिखी. साथ ही वह कंटेंट मैनेजमेंट सिस्टम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी लगातार सक्रिय रही. कविता गाडरी हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में दक्ष हैं. न्यूज़ राइटिंग रिसर्च बेस्ड स्टोरीटेलिंग और मल्टीमीडिया कंटेंट क्रिएशन उनकी खासियत है. वर्तमान में वह एबीपी लाइव से जुड़ी है जहां विभिन्न विषयों पर ऐसी स्‍टोरीज लिखती है जो पाठकों को नई जानकारी देती है और उनके रोजमर्रा के जीवन से सीधे जुड़ती है.

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