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Fertilizer Management: इन वजहों से कम होती है फसलों की पैदावार, बंपर अनाज के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

Crop Management: फसल में यूरिया, डीएपी और एनपीके का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल करने पर भी प्राकृतिक पोषक तत्व कम हो जाते हैं. इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञ मिट्टी की जांच करवाने की सलाह देते हैं.

Symptoms of Nutrient Deficiency in Plants: खेती किसानी में फसलों से बेहतरीन उत्पादन लेने में पोषक तत्व (Crop Nutrients Management) अहम भूमिका निभाते हैं. चाहे बीजों का अंकुरण हो या पौधों का विकास (Plant Development) या फिर फसलों की क्वालिटी (Crop Production) को बेहतर बनाना ही क्यों ना हो, इन सभी कामों में पोषक तत्व अहम रोल अदा करते हैं, लेकिन कभी-कभी फसलों में इनकी कमी के कारण उत्पादन गिरने लगता है और पौधों में भी विकृतियां आ जाती है. इकके कारण किसानों को भी काफी नुकसान होता है.

खासकर खेती में बढ़ते रासायन के इस्तेमाल के कारण मिट्टी और पौधों में पोषक तत्वों की कमी होती जा रही है, जिसकी रोकथाम के लिए रासायनिक उर्वरकों (Chemical Fertilizer) के स्थान पर जैविक खाद (Organic Manure) और जैव उर्वरकों (Bio Fertilizer) का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है. कभी-कभी फसल में यूरिया(Urea), डीएपी (DAP) और एनपीके (NPK) का आवश्यकता से अधिक इस्तेमाल करने पर भी प्राकृतिक पोषक तत्वों में कमी आ जाती है. इसका पता लगाने के लिए विशेषज्ञ मिट्टी की जांच (Soil Test) करवाने की सलाह देते हैं.


Fertilizer Management: इन वजहों से कम होती है फसलों की पैदावार, बंपर अनाज के लिए अपनाएं ये आसान तरीके

ये हैं फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्व
फसलों की अच्छी पैदावार में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटेशियम, मैग्नीशियम, कैल्शियम, सल्फर, आयरन, मैग्नीज, जिंक, बोरान, तांबा और मोलीब्डेनम आदि पोषक तत्व जरूरी होते हैं. इन्हीं पोषक तत्वों की कमी के कारण पौधों में विकृतियां आने लगती है और पैदावार कम हो जाती है.

नाइट्रोजन की कमी 
अकसर खेत में खड़ी फसलों में नाइट्रोजन की कमी हो जाती है, जिसके कारण पौधों के पुराने पत्तों में पीलापन, पौधों में कम पत्तियों का उगना और पौधों का धीमी गति से विकास जैसी समस्या आने लगती हैं. 

  • लंबी अवधि की फसलों में नाइट्रोजन की कमी की संभावना काफी बढ़ जाती. इसके कारण फसलों की गुणवत्ता कम हो जाती है और पौधे में कल्ले भी कम निकलते हैं. 
  • फसलों में नाइट्रोजन की कमी को पूरा करने के लिए पत्तियों पर 1% से 2% यूरिया का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है.

फास्फोरस की कमी 
फास्फोरस की कमी के कारण पौधों का रंग गहरा हरा या नीला पड़ने लगता है. छोटे पौधों में फास्फोरस की कमी के कारण कल्ले भी कम निकलते और फूल-कलियों की कम हो जाती है.

  • पौधों में फास्फोरस की कमी को पूरा करने के लिए पत्तियों पर 2% डाई अमोनियम फास्फेट का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है.

पोटेशियम की कमी 
लंबी अवधि वाली फसलों में आसानी से  पोटेशियम की कमी  के लक्षण देखे जा सकते हैं. इसके कारण पुराने पत्तों में पीलापन और झुलसापन आने लगता है.

  • पोटैशियम की कमी के कारण फसलों के तने कमजोर और पौधों में बीमारियों की संभावना बढ़ती. इसी के कारण पौधों के पत्ते सिकुड़कर सूख जाते हैं.
  • पोटेशियम की कमी को पूरा करने के लिए पत्तियों पर 1% पोटैशियम क्लोराइड का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है

मैग्नीशियम की कमी 
मैग्नीशियम की कमी के शुरुआती लक्षण पुराने पौधों पर जल्दी नजर आते हैं, जिसके कारण पौधों की पत्तियां पीली होकर मुरझाने लगती हैं.

  • मैग्नीशियम की कमी की शुरुआती अवस्था में पौधों की पत्तियों के ऊपर धब्बे भी बन जाते हैं, जिससे उत्पादन भी काफी प्रभावित होता है.
  • इस समस्या की रोकथाम के लिए पौधों की पत्तियों पर 0.5% मैग्निशियम सल्फेट एवं 1% यूरिया का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है.

कैल्शियम की कमी 
फसल में कैल्शियम की कमी के कारण पौधों से निकलने वाली नई पत्तियां अजीब आकार-विकार की हो जाती हैं. इनमें पीले रंग की विकृतियां और झुलसापन आने लगता है.

  • कैल्शियम की कमी के कारण पौधों की जड़ों की लंबाई भी ज्यादा नहीं बढ़ पाती और फसलें कमजोर होने लगती है.
  • इस समस्या की रोकथाम के लिए पत्तियों के ऊपर 0.5% कैलशियम नाइट्रेट या कैलशियम क्लोराइड का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है

सल्फर यानी गंधक की कमी 
पौधों में नाइट्रोजन और सल्फर की कमी के लक्षण सामान्य होते हैं, जिसके कारण पौधों आकार छोटा और पत्तियां पीली पढ़ने लगती हैं. यह लक्षण पौधों से निकलने वाली नई पत्तियों में जल्दी नजर आते हैं.

  • इनकी रोकथाम के लिए पत्तियों पर 0.5% अमोनियम सल्फेट यावे टेबल सल्फर का छिड़काव करना लाभकारी रहता है.

आयरन की कमी 
फसल के पौधों में आयरन की कमी के कारण नई पत्तियों के बीच में पीले रंग की धारियां बनने लगती हैं और समय से पहले ही सूखकर झड़ जाती हैं.

  • शुरुआती अवस्था में पत्ते कागजी सफेद हो जाते हैं और इल्लियां लग जाती है. इस समस्या की रोकथाम के लिए पत्तियों पर 0.1% से 0.2% फेरस सल्फेट का छिड़काव करें.

मैग्नीज की कमी 
मैग्नीज की कमी के लक्षण फसल के नए पौधों में जल्दी दिखाई देते हैं, जिसके चलते पत्तियों पर पीले रंग की धारियां पड़ जाती हैं और पत्ते झुलस कर गिरने लगते हैं.

  • इस समस्या की रोकथाम के लिए पत्तियों पर 0.05 से 0.1% मैग्गी सल्फेट का छिड़काव करना चाहिए.

जिंक यानी जस्ता की कमी
जिंक की कमी के कारण नई पत्तियों पर पीले रंग की धारियां पड़ने लगती हैं. वहीं पुराने पौधों की पत्तियों पर बैंगनी रंग के धब्बे दिखाई देने लगते हैं.

  • इस समस्या के कारण पत्तियों के बीच में दूरी कम हो जाती है और पत्तियां बीमार पड़ कर मरने लगती हैं.
  • जिंक की कमी को पूरा करने  के लिये फसल की पत्तियों पर 0.1 से 0.2% सल्फेट का छिड़काव करने की सलाह दी जाती है.

बोरान की कमी 
फसल में बोरान की कमी के कारण पौधे बेहद धीमी गति से बढ़ते हैं या फिर छोटे ही रह जाते हैं. पतियों की नोक में भी गलन और सड़न हो जाती है.

  • इसके कारण पौधों के तने खोखले और फलों का आकार बिगड़ जाता है. इस समस्या की रोकथाम के लिए पत्तियों पर 0.05% बोरेक्स का छिड़काव करना फायदेमंद रहता है.

तांबा की कमी 
तांबा फसलों के लिए एक अहम पोषक तत्व है, जिसकी कमी के कारण पौधों का विकास रुक जाता है और पत्तियां मुरझा कर गिरने लगती हैं.

  • तांबा की कमी (Copper Deficiency)के कारण पत्तियां ठीक से खुल नहीं पाती और पत्तियों की नोक से गोलाई में पीलापन आने लगता है.
  • इस समस्या की रोकथाम के लिए पत्तियों पर 0.01% से 0.05% कॉपर सल्फेट का छिड़काव (Copper Sulfate Spray) करना फायदेमंद रहता है.

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और जानकारियों पर आधारित है. ABPLive.com किसी भी तरह की जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

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