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यूपी में भी की जा सकती है नारियल की खेती, जान लें तरीका

यूपी की मिट्टी में भी अब नारियल की खेती मुमकिन है. इसकी खेती में किन बातों का रखना होगा ध्यान. कैसी होनी चाहिए मिट्टी और कैसा होना चाहिए मौसम. इसकी पूरी जानकारी जानने के लिए पढ़ें यह पूरी खबर.

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  • एक बार लागत पर, नारियल 50 साल तक लगातार देता बंपर कमाई.

पहले लोग सोचते थे कि नारियल सिर्फ केरल, कर्नाटक या समंदर के किनारे वाले राज्यों में ही उग सकता है. लेकिन आजकर देश में खेती का तरीका बदलता नजर रहा है. अब उत्तर प्रदेश की मिट्टी में भी नारियल के पेड़ ल लगाए जा रहे हैं और किसान इससे तगड़ा मुनाफा भी कमा रहे हैं. सरकार की नई किस्मों और मॉडर्न तरीकों ने कमाल कर दिया है. 

जिससे अब यूपी के किसान भी इस लीक से हटकर खेती की तरफ बढ़ रहे हैं. अगर आप भी कुछ अलग करना चाहते हैं और अपने खेत से मोटा पैसा छापना चाहते हैं. तो नारियल की यह नई कहानी आपके बहुत काम आने वाली है. इसकी खेती के लिए आपको कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. नहीं तो मुनाफे की जगह हो सकता है नुकसान. जान लें कैसे यूपी में उगा सकते हैं नारियल पेड़.

कैसी मिट्टी और मौसम है नारियल के लिए सही?

नारियल के लिए पहले आपको अपने एरिया की मिट्टी और मौसम दोनों के बारे में पता कर लेना जरूरी है. बहुत से लोगों को लगता है कि इसके लिए सिर्फ बालू वाली और समंदर किनारे की जमीन चाहिए. लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है. यूपी की दोमट और हल्की चिकनी मिट्टी में भी नारियल के पौधे बेहतरीन तरीके से पनप सकते हैं. बशर्ते पानी रुकना नहीं चाहिए. अगर आपके खेत में पानी भरने की दिक्कत है. तो नारियल के पेड़ को नुकसान हो सकता है. 

इसलिए पानी निकलने का सही इंतजाम होना चाहिए. मौसम की बात करें तो यूपी की गर्मी और हल्की सर्दी अब नारियल के सही है. खासकर जब आप बौनी और संकर जैसे हाइब्रिड किस्में चुनते हैं. पौधों को लगाने से पहले खेत की मिट्टी की जांच करवा लेना और उसमें गोबर की सड़ी हुई खाद मिलाना जरूरी काम है. एक बार पेड़ जम गया. फिर तो समझो सालों-साल तक फल देता रहेगा.


यूपी में भी की जा सकती है नारियल की खेती, जान लें तरीका

कौन सी किस्में लगाएं?

नारियल की खेती के लिए बाजार में ऐसी हाइब्रिड किस्में आ चुकी हैं जो कम जगह घेरती हैं और बहुत जल्दी फल देना शुरू कर देती हैं. जिन्हें बौनी किस्में भी कहा जाता है. इन पेड़ों की खास बात यह होती है कि ये बहुत ज्यादा लंबे नहीं होते जिससे इनकी देखभाल करना और फल तोड़ना काफी आसान हो जाता है. पौधों को लाइन से लगाएं और दो पौधों के बीच में ठीक-ठाक दूरी रखें.

जिससे हर एक को धूप और हवा बराबर मिल सके. गर्मियों के दिनों में इनमें रेगुलर पानी देना बहुत जरूरी है. वरना छोटे पौधे सूख सकते हैं. समय-समय पर निराई-गुड़ाई करते रहें और कीड़ों से बचाने के लिए नीम के तेल और कृषि विभाग की सलाह से दवा का छिड़काव करते रहें. 


यूपी में भी की जा सकती है नारियल की खेती, जान लें तरीका

यह भी पढ़ें: फार्म हाउस में कैसे करते हैं मूली की खेती, 30-45 दिन में तैयार हो जाती है फसल

कैसे होती है कमाई?

अब बात करते हैं नारियल से कमाई कैसे होगी. तो आपको बता दें नारियल एक ऐसा फल है जिसकी डिमांड साल के बारह महीने बनी रहती है. चाहे पूजा-पाठ हो, व्रत हो, या फिर गर्मियों में नारियल पानी पीने की क्रेविंग हो. एक बार नारियल का पेड़ फल देना शुरू कर देता है. तो लगभग 50 से 60 साल तक लगातार कमाई होती रहती है यानी एक बार लगाओ और पीढ़ियों तक मुनाफा कमाओ. 

अगर आप यूपी में इसकी खेती करते हैं. तो लोकल मार्केट और मंडियों में ही आपको बहुत बढ़िया भाव मिल जाएगा, क्योंकि यहां इस तरह की पैदावार कम ही लोग करते हैं. लागत एक बार की है और मुनाफा लगातार बढ़ता जाता है, जिससे छोटे और मध्यम किसान भी लखपति बनने का सपना आसानी से पूरा कर सकते हैं. तो फिर देर किस बात की, अपने खेत के एक हिस्से में इस बार नारियल के पौधे लगाकर खेती शुरू कर दीजिए.

यह भी पढ़ें: क्या होती है पॉलीहाउस खेती, इसमें कैसे मिलती है 1 करोड़ की सब्सिडी?

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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