अगर 1000 लोग इकट्ठा हुए तो इसकी भनक पुलिस को क्यों नहीं ?
3 तारीख से 16 तारीख के बीच इस महीने केरल से दिल्ली तक कहीं सांप्रदायिक हिंसा हुई, कहीं दंगे हुए। नवरात्र का पहला दिन हो, रामनवमी का शुभ मुहूर्त हो या हनुमान जयंती का पावन पर्व, हर मौके पर हिंसा भड़की, दंगे हुए। इनमें दिल्ली की सांप्रदायिक हिंसा हनुमान जयंती के दिन हुई । ये हिंसा उस वक्त हुई जब रमजान का पाक महीना भी चल रहा है। इस बवाल और उपद्रव से कुछ सवाल उठ रहे हैं। खासकर दिल्ली पुलिस पर। दिल्ली पुलिस को ये बताने में 48 घंटे लग गए कि तीसरी शोभा यात्रा बगैर इजाजत के हुई थी जिसमें बवाल हुआ। इसमें भी बड़ी बात ये है कि जिस प्रेम शर्मा को तीसरी शोभा यात्रा का संचालक दिल्ली पुलिस बता रही है, उसे लेकर भी दिल्ली पुलिस कन्फ्यूज दिखी। पहले कहा कि उसकी गिरफ्तार हुई, फिर कहा कि जांच के लिए बुलाया गया। इन सबके बीच पुलिस की इजाजत के बगैर कोई शोभा यात्रा कैसे निकली।


























