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सौरभ शुक्ला ने खोले कई राज शाहरुख खान, किंग और जॉली एलएलबी के पीछे की कहानियां

Saurabh Shukla ने अपने एक इंटरव्यू में फिल्म, थिएटर और अपने जीवन के अनुभवों के बारे में खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि फिल्म बनाना बिल्कुल भी आसान काम नहीं होता, क्योंकि सिर्फ स्क्रिप्ट लिख देने से फिल्म नहीं बन जाती। कई बार सालों तक कहानी पड़ी रहती है और जब तक कोई प्रोड्यूसर उस पर भरोसा करके पैसा नहीं लगाता, तब तक वह फिल्म बन ही नहीं पाती। उनके अनुसार फिल्ममेकिंग एक बहुत बड़ा आर्थिक काम है और इसमें कई लोगों की मेहनत और सहयोग शामिल होता है। अपनी फिल्म की कहानी के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि एक दिन उनके एक स्टूडेंट ने उन्हें कुछ सीन सुनाए थे और उसी बातचीत के दौरान एक मजेदार कॉन्फ्लिक्ट का आइडिया आया। बाद में उसी विचार को उन्होंने आगे बढ़ाया और पहले उस पर एक नाटक बनाया। जब उस नाटक को दर्शकों ने पसंद किया तो उसी कहानी को आगे चलकर फिल्म में बदल दिया गया। सौरभ शुक्ला ने थिएटर में आने की अपनी शुरुआत का कारण भी मजेदार अंदाज में बताया। उन्होंने कहा कि जब वह पहली बार थिएटर देखने गए तो वहां बहुत कॉन्फिडेंट और पढ़ी-लिखी लड़कियां थीं और बहुत से साधारण दिखने वाले लड़के भी थे। उन्हें लगा कि यहां विचारों की कद्र होती है, इसलिए शायद यहां उनके लिए भी जगह हो सकती है। मजाक-मजाक में शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे उनके लिए जुनून बन गया और फिर उन्हें थिएटर से सच में प्यार हो गया। हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि थिएटर में करियर बनाना आसान नहीं होता, क्योंकि इसमें पैसे कम मिलते हैं। अगर किसी को सिर्फ पैसा कमाना है तो थिएटर मुश्किल रास्ता है, लेकिन अगर किसी को सच्चा जुनून है और कला से प्यार है तो थिएटर सबसे खूबसूरत जगह है। उन्होंने यह भी बताया कि शुरू में उनका सपना एक्टर बनने का नहीं बल्कि लेखक और निर्देशक बनने का था। एक नाटक के दौरान एक छोटा सा रोल करने वाला उनका दोस्त वह किरदार ठीक से नहीं कर पा रहा था, तब उन्होंने उसे करके दिखाया। जब लोगों ने उनकी एक्टिंग की तारीफ की तो उन्हें एहसास हुआ कि उनके अंदर यह क्षमता भी है और वहीं से उनकी एक्टिंग की यात्रा शुरू हुई। थिएटर और फिल्मों के फर्क को समझाते हुए उन्होंने कहा कि थिएटर में सामने बैठे दर्शक तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं, जबकि कैमरा बिल्कुल अलग होता है। कैमरा एक शांत नजर की तरह होता है जो सिर्फ सच को पकड़ता है, इसलिए फिल्म एक्टिंग में सबसे जरूरी चीज सच्चाई और भावनाओं की ईमानदारी होती है। इंटरव्यू के दौरान उन्होंने कई बड़े कलाकारों के साथ काम करने का अनुभव भी साझा किया और खास तौर पर Shah Rukh Khan के बारे में कहा कि वह बहुत करिश्माई इंसान हैं। जब वह किसी से बात करते हैं तो सामने वाले को ऐसा महसूस होता है कि वह इस दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति है। यही उनकी सबसे खास खूबी है कि वह लोगों से सच्चा जुड़ाव बना लेते हैं। अंत में सौरभ शुक्ला ने युवा फिल्ममेकर्स और कलाकारों को सलाह दी कि कला में कोई एक तय तरीका नहीं होता। सबसे जरूरी है कि इंसान अपने काम में सच्चाई रखे, जोखिम लेने से न डरे और काम करते हुए मजा ले। उनके अनुसार जो हार से डरता है वह कभी जीत नहीं सकता, इसलिए कोशिश करते रहना ही सफलता की असली कुंजी है

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