छोटी सी गलती पड़ी स्कूल को भारी, रिफंड नहीं देने पर लगी 2.2 लाख की चपत
क्रिकेट अकादमी के पास बेटे का दाखिला कराने को पिता ने स्कूल बदला. फीस लौटाने से इनकार पर आयोग ने स्कूल को 1.92 लाख फीस, 25 हजार मुआवजा और 5 हजार खर्च समेत कुल 2.22 लाख रुपये लौटाने का आदेश दिया.

हैदराबाद में एक उपभोक्ता आयोग ने स्कूल की फीस वापसी से जुड़े मामले में अहम फैसला सुनाया है. बेटे का दाखिला दूसरे स्कूल में कराने के लिए पहले स्कूल से फीस वापस मांगने वाले पिता को राहत मिली है. आयोग ने स्कूल के चेयरमैन को 2.22 लाख रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है. इसमें फीस की वापसी, मुआवजा और मुकदमे का खर्च शामिल है.
मामला एक 54 वर्षीय पिता की शिकायत से जुड़ा है. उन्होंने अपने बेटे का पांचवीं कक्षा में दाखिला कराने के लिए 4 अप्रैल 2018 को स्कूल में पहली किस्त के तौर पर 1.92 लाख रुपये जमा किए थे. बेटा स्कूल की पढ़ाई के साथ क्रिकेट अकादमी में भी प्रशिक्षण लेता था. पिता को लगा कि शुरुआती स्कूल की दूरी के कारण बच्चे की पढ़ाई और क्रिकेट कोचिंग के बीच तालमेल बैठाना मुश्किल होगा. इसलिए उन्होंने बेटे को अकादमी के नजदीक स्थित दूसरे स्कूल में दाखिला दिलाने का निर्णय लिया.
पिता ने नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले ही पुराने स्कूल से संपर्क किया और जमा की गई रकम लौटाने की मांग की. हालांकि, स्कूल प्रशासन ने अपनी फीस नीति का हवाला देते हुए पैसे वापस करने से इनकार कर दिया. इसके बाद पिता ने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया.
स्कूल ने नियमों का दिया हवाला
सुनवाई के दौरान स्कूल की ओर से दलील दी गई कि दाखिला लेते समय पिता ने संस्थान के नियमों और शर्तों को स्वीकार किया था. स्कूल के मुताबिक, उन्होंने एक लिखित सहमति भी दी थी, जिसमें जमा की गई फीस वापस नहीं किए जाने की शर्त शामिल थी. स्कूल ने अपनी ओर से किसी सेवा में कमी या अनुचित व्यापार व्यवहार के आरोपों को स्वीकार नहीं किया और शिकायत खारिज करने की मांग की.
आयोग ने क्यों सुनाया पिता के पक्ष में फैसला?
आयोग ने मामले की सुनवाई में इस बात पर ध्यान दिया कि फीस शैक्षणिक सत्र शुरू होने से काफी पहले जमा की गई थी. साथ ही, पिता ने सत्र शुरू होने से पहले ही दाखिला रद्द करने और रकम लौटाने का अनुरोध कर दिया था.
आयोग के अनुसार, ऐसी स्थिति में केवल संस्थान के नियमों का हवाला देकर फीस लौटाने से इनकार करना उचित नहीं था. इसी आधार पर शिकायतकर्ता को राहत देने का निर्णय लिया गया.
45 दिन के भीतर करना होगा भुगतान
आयोग ने स्कूल के चेयरमैन को 1.92 लाख रुपये की फीस वापस करने का निर्देश दिया. इसके अलावा, पिता को हुई परेशानी के लिए 25 हजार रुपये मुआवजे के तौर पर और कानूनी कार्रवाई के खर्च के लिए 5 हजार रुपये देने को कहा गया. कुल भुगतान 2.22 लाख रुपये बनता है. आयोग ने यह रकम 45 दिनों के भीतर चुकाने का निर्देश दिया.
यह फैसला उन अभिभावकों के लिए महत्वपूर्ण है, जो शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले बच्चे का दाखिला रद्द कराने पर फीस वापसी चाहते हैं. हालांकि, प्रत्येक मामले में राहत संबंधित तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर तय होगी.
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