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RERA में कैसे करें शिकायत? घर खरीदारों के लिए जानिए स्टेप-बाय-स्टेप ऑनलाइन प्रोसेस

Home Buyer Rights: घर खरीदते समय बिल्डर की लापरवाही या वादाखिलाफी होने पर खरीदार रेरा अधिनियम 2016 की धारा 31 के तहत ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर अपने अधिकारों की कानूनी सुरक्षा प्राप्त कर सकता है.

RERA Complaint Process: घर खरीदना हर व्यक्ति का बड़ा सपना होता है, लेकिन कई बार बिल्डर की लापरवाही या वादाखिलाफी की वजह से यह ख्वाब एक बुरा सपना बन जाता है और ऐसे फैसले में तब्दील हो जाता है, जो आपके पूरे जीवन पर असर डालता है. ऐसे में अगर आप भी घर खरीदने जा रहे हैं या पहले से किसी प्रोजेक्ट में निवेश कर चुके हैं, तो आपके लिए इन अधिकारों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है. इससे आप बिल्डर की मनमानी से बच सकते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी मदद भी ले सकते हैं.

ऐसे मामलों में खासकर परेशान होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि एक घर खरीदार के तौर पर Real Estate Regulatory Authority (RERA) आपके अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे मजबूत कानूनी मंच है. रेरा अधिनियम 2016 की धारा 31 के तहत कोई भी खरीदार बिल्डर या रियल एस्टेट एजेंट के खिलाफ शिकायत दर्ज करा सकता है. आइए जानते हैं कि रेरा में शिकायत दर्ज कराने की ऑनलाइन प्रोसेस.

क्या है ऑनलाइन प्रोसेस?

शिकायत दर्ज करने के लिए सबसे पहले जिस भी राज्य का मामला है उस राज्य की आधिकारिक RERA वेबसाइट (जैसे UP RERA, MahaRERA, Delhi RERA आदि) पर जाएं. अपने मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की मदद से शिकायतकर्ता के तौर पर रजिस्ट्रेशन करें और लॉगिन आईडी-पासवर्ड बनाएं.

लॉगिन करने के बाद 'File Complaint' या 'Grievance' सेक्शन पर क्लिक करें और अपनी शिकायत से जुड़ी सभी जरूरी गई डिटेल्स भर दें. शिकायत दर्ज करने के बाद तय सरकारी फीस ऑनलाइन जमा करानी होती है. यह फीस राज्य के मुताबिक अलग-अलग हो सकती है और आमतौर पर ₹1,000 से ₹5,000 रुपये के बीच होती है. फीस जमा होने के बाद आपको एक Complaint Reference Number (CRN) मिलता है, जिसकी मदद से शिकायत की स्टेटस ट्रैक की जा सकती है.

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Form M और Form N में क्या है अंतर?

  • फॉर्म एम (Form M): Form M का इस्तेमाल तब कीया जाता है, जब बिल्डर की तरफ से रेरा के किसी नियम का उल्लंघन किया जाए. जैसे प्रोजेक्ट में देरी, बिना अनुमति प्लान बदलना या प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नहीं कराना.
  • फॉर्म एन (Form N): Form N तब इस्तेमाल किया जाता है, जब खरीदार बिल्डर की गलती के कारण हुए वित्तीय नुकसान के बदले मुआवजा (Compensation) या ब्याज की मांग करना चाहता है. यह फॉर्म एडजुडिकेटिंग ऑफिसर (Adjudicating Officer) के सामने दाखिल किया जाता है. 

RERA के तहत खरीदारों के 5 बड़े अधिकार

  • जानकारी पाने का अधिकार: खरीदार को प्रोजेक्ट के स्वीकृत प्लान, लेआउट, स्टेज-वाइज काम की प्रगति और अन्य जरूरी जानकारी प्राप्त कर सकता है.
  • समय पर पजेशन का अधिकार: बिल्डर को 'बिल्डर-बायर एग्रीमेंट' में लिखी तारीख पर फ्लैट सौंपना होगा. वहीं तय समय पर फ्लैट न मिलने पर खरीदार ब्याज या मुआवजे का दावा कर सकता है.
  • रिफंड का अधिकार: अगर बिल्डर प्रोजेक्ट में देरी या नियमों का उल्लंघन करता है, तो खरीदार इस प्रोजेक्ट से बाहर निकल सकता है. ऐसी स्थिति में बिल्डर को खरीदार का पूरा पैसा ब्याज सहित वापस करना होगा.
  • क्वालिटी कंस्ट्रक्शन की गारंटी: पजेशन के बाद 5 साल तक घर में कोई स्ट्रक्चरल डिफेक्ट (बनावट की खराबी) या खराब कंस्ट्रक्शन की समस्या आती है, तो बिल्डर को मुफ्त में ठीक करना होगा.
  • बिना सहमति बदलाव पर रोक: बिल्डर दो-तिहाई खरीदारों की लिखित मंजूरी के बिना प्रोजेक्ट के लेआउट या प्लान में कोई बदलाव नहीं कर सकता.
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