हाइड्रोजन ट्रेन से कितनी अलग है साबरमती से शुरू हुई LNG ट्रेन?
भारतीय रेलवे ने 27 सितंबर को साबरमती से पहली LNG-डीजल डुअल फ्यूल ट्रेन शुरू की. इससे पहले 17 जुलाई को पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू हुई थी. दोनों का उद्देश्य डीजल और प्रदूषण घटाना है.

अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं, तो आपने LNG और हाइड्रोजन ट्रेन के बारे में जरूर सुना होगा. भारतीय रेलवे ने 27 सितंबर को गुजरात के साबरमती से देश की पहली LNG-डीजल ड्यूल फ्यूल ट्रेन शुरू की है. इसकी सबसे खास बात यह है कि यह ट्रेन पूरी तरह LNG पर नहीं चलती, बल्कि डीजल के साथ एलएनजी का भी इस्तेमाल करती है.
वहीं, इससे पहले कुछ समय पहले 17 जुलाई 2026 को देश की पहली हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन भी शुरू की गई थी. इन दोनों का एक ही मकसद है और वह डीजल पर निर्भरता और प्रदूषण को कम करना है, लेकिन इनकी तकनीक काफी अलग है. ऐसे में लोगों कि मन में यह सवाल है कि दोनों ट्रेनों में आखिर क्या अंतर है?
कैसे चलती है LNG ट्रेन?
LNG ट्रेन में मौजूदा डीजल इंजन को ही बदलाव करके इस्तेमाल किया गया है. इसमें एलएनजी को डीजल के साथ ईंधन के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. ट्रेन के दो 1,400 हॉर्सपावर वाले दो ड्राइविंग पावर कार को इस तरह बदला गया है कि वे दोनों इंधनों पर चल सकें. रेलवे के मुताबिक, सिस्टम को डीजल की करीब 40% खपत को एलएनजी से बदलने के लिए तैयार किया गया है.
हाइड्रोजन ट्रेन कैसे करती है काम?
देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन 17 जुलाई 2026 को शुरू की गई थी. इस ट्रेन में डीजल इंजन की जगह फ्यूल सेल तकनीक का इस्तेमाल होता है. इसमें हाइड्रोजन और हवा से मिलने वाली ऑक्सीजन के साथ रासायनिक प्रतिक्रिया से बिजली तैयार जाती है. यही बिजली ट्रेन को चलाने वाले सिस्टम को ऊर्जा देती है. इस प्रक्रिया में सीधे तौर पर टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता और पानी की भाप उप-उत्पाद के रूप में निकलती है.
LNG और हाइड्रोजन ट्रेन में क्या है बड़ा अंतर?
दोनों ट्रेनों का मकसद पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करना है, लेकिन इनके काम करने का तरीका बिल्कुल अलग है. LNG ट्रेन में डीजल इंजन कों पूरी तरह हटाया नहीं जाता, बाल्की इसके ईंधन में बदलाव किया जाता है. वहीं, हाइड्रोजन ट्रेन में फ्यूल सेल के जरिए बिजली बनाई जाती है और इससे ट्रेन का इलेक्ट्रिक प्रणोदन सिस्टम चलता है.
आसान लफ्जों में समझें तो LNG मौजूदा डीजल सिस्टम में बदलाव करके ईंधन की खपत कम करने का तरीका है, जबकि हाइड्रोजन ट्रेन में ऊर्जा पैदा करने और ट्रेन चलाने की पूरी तकनीक अलग है.
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