बीमा बेचने पर मोटा कमीशन, LIC एजेंटों की मांग पर IRDAI करेगा विचार
IRDAI LIC समेत जीवन बीमा एजेंटों की सात मांगों पर विचार कर रहा है. एजेंटों ने कमीशन बढ़ाने और नए नियमों में बदलाव की मांग की है, लेकिन अंतिम फैसला अभी बाकी है.

बीमा एजेंटों को मिलने वाले कमीशन को लेकर एक बड़ा बदलाव हो सकता है. ऐसे में अगर आप भी LIC की पॉलिसी खरीद चुके हैं या बीमा एजेंट के जरिए पॉलिसी लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो यह खबर आपके काम की है. इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (IRDAI) लाइफ इंश्योरेंस एजेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (LIAFI) की सात मांगों पर विचार कर रहा है. एजेंटों की संस्था चाहती है कि बीमा बेचने के बदले उन्हें पहले से ज्यादा कमीशन मिले और पॉलिसी की सर्विसिंग से जुड़ी उनकी मेहनत का भी सही पेमेंट किया जाए.
दरअसल, IRDAI ने बीमा वितरण से जुड़े नियमों में बदलाव के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. LIAFI ने प्रस्तावित नियमों के कुछ हिस्सों पर आपत्ति जताई है और कमीशन बढ़ाने की मांग रखी है. हालांकि, इन मांगों को आखिरी मंजूरी मिलेगी या नहीं, इस पर अभी फैसला होना बाकी है.
LIC एजेंटों ने कमीशन बढ़ाने के लिए क्या मांग रखी है?
LIAFI ने पॉलिसी की रिन्यू के आधार पर पहले साल में अलग-अलग दर से कमीशन देने का प्रस्ताव रखा है. संस्था का कहना है कि एजेंटों को पॉलिसी बेचने के अलावा भी कई जिम्मेदारियां निभानी पड़ती हैं. इसी वजह से उन्हें बेहतर कमीशन मिलना चाहिए.
- 5 से 9 साल की प्रीमियम अवधि वाली पॉलिसी पर पहले साल 27% कमीशन देने की मांग की गई है.
- 10 से 14 साल की अवधि वाली पॉलिसी पर पहले साल 30% कमीशन देने का प्रस्ताव है.
- 15 साल या उससे ज्यादा की अवधि वाली पॉलिसी पर पहले साल 35% कमीशन की मांग की गई है.
- दूसरे से छठे साल तक रिन्यूअल कमीशन 7.5% रखने का प्रस्ताव है.
- सातवें साल से पॉलिसी मैच्योरिटी तक 6% रिन्यूअल कमीशन देने की मांग की गई है.
हालांकि, ये एजेंटों की ओर से रखे गए प्रस्ताव हैं. इन्हें IRDAI की मंजूरी मिलने या लागू होने की बात नहीं कही गई है.
कम कमाई और बढ़ते खर्च से परेशान एजेंट
LIAFI का कहना है कि एजेंटों की कमाई कम है, जबकि उनके काम से जुड़े खर्च लगातार बढ़ रहे हैं. फेडरेशन के मुताबिक, LIC एजेंटों की औसत मासिक कमीशन आय करीब 16,774 रुपए है. इसके साथ ही ग्राहकों से संपर्क करने, यात्रा करने, फोन और डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल करने के अलावा पॉलिसी से जुड़ी दूसरी सेवाएं देने में भी पैसा खर्च होता है. LIAFI का कहना है कि अगर एजेंटों की कमाई लगातार घटती रही, तो नए लोगों के लिए इस पेशे में आना मुश्किल हो सकता है.
IRDAI के प्रस्तावित नियमों में क्या बदलाव मुमकिन?
IRDAI के कंसल्टेशन पेपर में कमीशन की लिमिट तय करने, एजेंटों को दिए जाने वाले पेमेंट का खुलासा करने और गलत तरीके से पॉलिसी बेचने के मामलों में कमीशन वापस लेने जैसे प्रस्ताव शामिल हैं. LIAFI ने IRDAI के इस प्रस्तावित नियमों का विरोध किया है और शिकायत या पॉलिसी बंद होने पर अपने आप कमीशन वापस लेने के नियमों पर भी आपत्ति जताई है.
25 अक्टूबर तक मांगा गया फीडबैक
IRDAI को एजेंटों की मांगें मिल चुकी हैं. 25 अक्टूबर तक हितधारकों से फीडबैक मांगे गए हैं. अब देखना यह होगा कि अंतिम दिशानिर्देशों में एजेंटों की मांगों को कितनी जगह मिलती है.
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