लेबर कोड 2026: काम के घंटे, ओवरटाइम और सोशल सिक्योरिटी... जानिए आपके हक में क्या-क्या बदला
Labour Code 2026: 1 अप्रैल 2026 से नया लेबर कोड लागू हुआ है, जो सीधेतौर पर कर्मचारियों की कमाई, बचत और छुट्टियों को प्रभावित करेगा. आइये बताते हैं कैसे.

Labour Code 2026: भारत में 1 अप्रैल 2026 से लागू होने वाले नए श्रम कानून सीधे तौर पर कर्मचारियों की कमाई, बचत और छुट्टियों को प्रभावित करेंगे. ये बदलाव खास तौर पर 'कोड ऑन वेजेज' और 'ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस (OSH&WC) कोड' के तहत किए जा रहे हैं. इन नए नियमों में मुख्य रूप से तीन चजों पर ध्यान दिया जा रहा है, ओवरटाइम, छुट्टियों के नियम और PF यानी प्रोविडेंट में योगदान.
इन बदलावों का मकसद अलग-अलग सेक्टर में काम करने वाले लोगों के लिए एक जैसे नियम बनाना, कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और कर्मचारियों की आर्थिक सुरक्षा को मजबूत करना है. तो आइये बताते हैं कि ये नया लेबर कोड कैसे कर्मचारियों को प्रभावित करेगा.
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क्या कहते हैं ओवरटाइम के नियम
नए श्रम कानूनों के हिसाब से अब तय समय सीमा से ज्यादा काम यानी ओवरटाइम करने पर उसका दोगुना मेहनताना मिलेगा. ये नियम सभी कंपनियों के लिए लागू किया गया है, जिसके तहत उन्हें इसका सारा डाटा भी रखना पड़ेगा. काम के लिए हफ्ते में 48 घंटे की सीमा तय की गई है, लेकिन जरूरत पड़ने पर रोजाना काम का समय 12 घंटे तक हो सकता है. खास बात ये है कि अब 15 से 30 मिनट का एक्स्ट्रा काम भी आधे घंटे का ओवरटाइम माना जाएगा.
छुट्टियों के फायदे
नए लेबर लॉ का मकसद पूरे देश में छुट्टियों के नियमों को आसान और एक जैसा बनाना है. जिसके लिए इस कानून में बदलाव के बाद अब वर्कर श्रेणी के कर्मचारियों को 20 दिन काम करने पर 1 दिन की छुट्टी मिलेगी. ज्यादा से ज्यादा 30 दिन तक ये छुट्टियां आगे ले जाई जा सकती हैं. लेकिन अगर छुट्टियां इससे ज्यादा हो जाती हैं तो इनके बदले में पैसा लिया जा सकता है. इसके अलावा कर्मचारी चाहें तो साल के आखिर में अपनी जमा छुट्टियों को कैश भी करा सकते हैं.ये सारे बदलाव छुट्टियों को लेकर नियमों को ज्यादा पारदर्शी और कर्मचारियों के लिए फायदेमंद बनाते हैं.
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प्रोविडेंट फंड में बदलाव
इस नए श्रम कानूनों में सैलरी स्ट्रक्चर को एक जैसा बनाने पर जोर दिया गया है. जिसके चलते अब बेसिक सैलरी, DA और रिटेनिंग अलाउंस मिलाकर कुल वेतन का कम से कम 50% होना जरूरी होगा. इससे PF बढ़ा जाएगा, क्योंकि कर्मचारी और कंपनी दोनों बेसिक+DA का 12% EPF में जमा करेंगे. हालांकि इससे इन हैंड सैलरी में थोड़ा बदलाव होगा और वो कम मिला करेगी. इतना ही नहीं अब फिक्स्ड टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी भी सिर्फ एक साल की नौकरी के बाद ग्रेच्युटी के हकदार होंगे. ये बदलाव कर्मचारियों की रिटायरमेंट के बाद की आर्थिक सुरक्षा का ख्याल रखने वाले हैं.
बता दें कि इन सभी नियमों का पूरा लाभ राज्यों में नियम पर भी निर्भर करता है, यदि राज्य ये नियम लागू करते हैं तभी कर्मचारियों को भी पूरा लाभ मिलेगा.
Source: IOCL


























