गाड़ी बेचने से पहले ये काम जरूरी, नहीं तो बाद में हो सकती है बड़ी परेशानी
Car Selling Tips: गाड़ी बेचते समय सिर्फ पैसे ले लेना ही काफी नहीं होता है. कुछ स्टेप्स पूरे करना बहुत जरूरी है. वरना बाद में बेवजह की परेशानी आपके सिर आ सकती है.

Car Selling Tips: आज के दौर में आए दिन कोई ना कोई नई कार लॉन्च होती रहती है और ऐसे में कई लोग नई गाड़ी खरीदने के लिए अपनी पुरानी कार बेच देते हैं. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि गाड़ी बेचना सिर्फ पैसे और चाबी का मामला नहीं होता. इसके साथ कानूनी जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं.
अगर सही तरीके से प्रोसेस पूरी नहीं की गई. तो बाद में चालान, एक्सीडेंट या किसी गलत इस्तेमाल की जिम्मेदारी पुराने मालिक पर आ सकती है. इसलिए थोड़ी सी सावधानी आगे चलकर बड़ी परेशानी से बचा सकती है. गाड़ी बेचते वक्त कुछ जरूरी स्टेप्स जरूर फॉलो करने चाहिए.
यह डाॅक्यूमेंट्स पूरे करना है जरूरी
गाड़ी बेचते समय सबसे पहले यह ध्यान रखें कि सारे जरूरी दस्तावेज पूरे हों. सिर्फ बोल कर किए गए समझौते पर भरोसा करना बड़ी गलती हो सकती है. Form 29 और Form 30 जैसे जरूरी फॉर्म दोनों पक्षों से सही तरीके से भरवाएं और साइन करवाएं.
इसके अलावा RC, इंश्योरेंस पेपर और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट भी अपडेट होना चाहिए. कई लोग जल्दी में यह चीजें नजरअंदाज कर देते हैं. लेकिन यही बाद में परेशानी का कारण बनती हैं. अगर कागजात सही तरीके से पूरे होंगे. तो आगे की प्रोसेस आसान और सेफ रहेगी.
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खरीदार की पहचान जरूर वेरिफाई करें
गाड़ी बेचते समय खरीदार की पहचान वेरिफाई करना बेहद जरूरी है. हमेशा उसका आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या कोई अन्य सरकारी आईडी प्रूफ की कॉपी जरूर लें. इसके साथ ही एड्रेस प्रूफ भी कन्फर्म करें. इससे आपको यह भरोसा रहेगा कि गाड़ी सही व्यक्ति को दी जा रही है.
अगर बिना पहचान चेक किए गाड़ी दे दी. तो बाद में ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है. कई मामलों में गाड़ी का गलत इस्तेमाल होने पर पुराने मालिक को ही नोटिस आ जाता है. इसलिए यह छोटा सा स्टेप आपको बड़ी दिक्कत से बचा सकता है.
ट्रांसफर और बीमा की प्रोसेस पर रखें नजर
गाड़ी बेचने के बाद जिम्मेदारी खत्म नहीं होती. बल्कि यहीं से असली काम शुरू होता है. यह जरूर चेक करें कि खरीदार ने RTO में नाम ट्रांसफर की प्रोसेस शुरू की है या नहीं. जब तक RC आपके नाम पर है. तब तक किसी भी चालान या घटना की जिम्मेदारी आप पर आ सकती है.
इसके साथ ही बीमा कंपनी को भी गाड़ी बिक्री की जानकारी दें. जिससे कि पॉलिसी अपडेट या ट्रांसफर हो सके. डिलीवरी रिसीट जरूर बनवाएं. जिसमें गाड़ी देने की तारीख और समय लिखा हो. इससे आपके पास एक ठोस सबूत रहता है.
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