एक्सप्लोरर

CBSE OSM Controversy: 'सिस्टम में दिक्कतें थीं फिर भी लागू किया', OSM ड्राई रन में शामिल शिक्षकों का बड़ा खुलासा

CBSE Dry Run: CBSE की नई OSM प्रणाली को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. कक्षा 12 के परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए.

CBSE OSM System Controversy: CBSE की नई On-Screen Marking (OSM) प्रणाली को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है. कक्षा 12 के परिणाम घोषित होने के बाद बड़ी संख्या में छात्रों और अभिभावकों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर सवाल उठाए. अब ड्राई रन में शामिल शिक्षकों, परीक्षकों और स्कूल प्रमुखों (HOS/Principals) के अनुभव भी इस बहस को नया आयाम दे रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या OSM प्रणाली को देशभर में लागू करने से पहले मिले चेतावनी संकेतों को महत्व दिया गया था?

OSM प्रणाली के तहत पहले से हाथ से जांची जा रही उत्तर पुस्तिकाएं की जगह स्कैन की गई कॉपियों का मूल्यांकन कंप्यूटर स्क्रीन पर किया गया. CBSE का उद्देश्य मूल्यांकन प्रक्रिया को आधुनिक, तेज और पारदर्शी बनाना था. लेकिन ड्राई रन में शामिल कई शिक्षकों और अधिकारियों का कहना है कि असल में इसे इस्तेमाल में लाने से पहले प्रणाली को और ज़्यादा समय, परीक्षण और सुधार की ज़रूरत थी.

ड्राई रन कैसे हुआ?

शिक्षकों के अनुसार OSM का ड्राई रन दिसंबर के अंत और जनवरी की शुरुआत में आयोजित किया गया था. इसमें शिक्षक अपने-अपने स्कूलों से ही शामिल हुए. लॉगिन आईडी और यूजर क्रेडेंशियल्स CBSE द्वारा उपलब्ध कराए गए थे.

ड्राई रन में शामिल हुए सिविल लाइन्स के सरकारी स्कूल के एक शिक्षक ने बताया कि CBSE ने सर्वर क्षमता जांचने के लिए एक विशेष सत्र आयोजित किया था, जिसमें दोपहर 2 बजे से 2:30 बजे तक सभी शिक्षकों को एक साथ लॉगिन करने के निर्देश दिए गए थे. सिर्फ आधे घंटे का ही ड्राई रन हुआ था पहले दिन और पहले दिन से ही कई कमियां सामने आई थीं, जिन्हें हमने बताया था. इस प्रक्रिया का उद्देश्य यह देखना था कि बड़ी संख्या में उपयोगकर्ताओं के एक साथ जुड़ने पर सिस्टम कितना दबाव संभाल सकता है. लेकिन इसी दौरान कई तकनीकी समस्याएं सामने आईं. कुछ शिक्षक लॉगिन नहीं कर पाए, कई लोगों को OTP नहीं मिला, कुछ को उत्तर पुस्तिकाएं (answer sheets) दिखाई नहीं दीं और कुछ मामलों में कॉपियां अपलोड नहीं हो रही थीं. एक वरिष्ठ शिक्षक के अनुसार, “उस आधे घंटे में ही स्पष्ट हो गया था कि सिस्टम को और सुधार की जरूरत है.”

पहले से जांची हुई कॉपियों पर हुआ अभ्यास

ड्राई रन में शिक्षकों को पहले से जांची हुई उत्तर पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई गई थीं. इसका उद्देश्य उन्हें डिजिटल माध्यम से अंक देने की प्रक्रिया समझाना था. हालांकि कई शिक्षकों का अनुभव था कि कंप्यूटर पर मूल्यांकन करने में पारंपरिक पेन-पेपर प्रणाली की तुलना में ज़्यादा समय लग रहा था. एक शिक्षक ने बताया, “स्कूल के इंटरनेट पर कई बार क्लिक करने के बाद भी सिस्टम प्रतिक्रिया नहीं देता था. लेकिन जब मैंने रात में घर पर अपने निजी लैपटॉप और बेहतर इंटरनेट कनेक्शन के साथ अभ्यास किया, तो वही प्रक्रिया काफी बेहतर तरीके से काम कर रही थी.” इससे यह सवाल भी उठा कि क्या देशभर के सभी मूल्यांकन केंद्रों में पर्याप्त इंटरनेट और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध थीं?

उम्र और तकनीक की चुनौती

ड्राई रन में हर शिक्षक ने लगभग पांच नमूना (sample) उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया. शिक्षकों का कहना है कि अपेक्षाकृत कम उम्र के शिक्षक नई प्रणाली को जल्दी समझ रहे थे, लेकिन ज़्यादा आयु वर्ग के कई शिक्षकों को तकनीकी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा. एक शिक्षक के अनुसार, “40 वर्ष के आसपास के कई शिक्षक आसानी से काम कर रहे थे, लेकिन 48-50 वर्ष या उससे अधिक आयु वर्ग के कुछ शिक्षकों को नई प्रणाली अपनाने में ज़्यादा समय लग रहा था.” विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की सफलता केवल सॉफ्टवेयर पर नहीं बल्कि उपयोगकर्ताओं के प्रशिक्षण पर भी निर्भर करती है.

ड्राई रन में उठे गंभीर सवाल

सूत्रों के अनुसार ड्राई रन में शामिल प्रतिभागियों ने कई तकनीकी और मूल्यांकन संबंधी चिंताएं दर्ज कराई थीं.

इनमें प्रमुख रूप से शामिल थे

अतिरिक्त मुख्य परीक्षक (AHE) द्वारा बढ़ाए गए अंक कुछ मामलों में घटे हुए दिखाई देना.

स्क्रीन पर दिख रहे अंक और ऑफिशियल मार्किंग स्कीम में फर्क दिखना.

कुछ प्रश्नों के सभी हिस्सों के अंक दिखाई न देना.

 Undo बटन का उपयोग करने पर सिस्टम का बार-बार हैंग होना.

 जितना हिस्सा चेक कर लिया, वह technical glitch आने पर सेव नहीं होता था.

ड्राई रन में शामिल लोगों का कहना है कि इनमें से कुछ समस्याएं परीक्षण अवधि के अंत तक भी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी थीं.

"OSM शिक्षक-अनुकूल नहीं"

ड्राई रन के दौरान तैयार हुई रिपोर्टों में कुछ महत्वपूर्ण टिप्पणियां भी सामने आईं. प्रतिभागियों ने कहा कि OSM प्रणाली पूरी तरह "teacher-friendly" नहीं है. लेकिन शिक्षकों का आरोप है कि इस मामले पर उनसे फीडबैक या राय नहीं ली गई, बल्कि उन्हें नए सिस्टम के अनुसार सिर्फ़ ख़ुद को तैयार होने के लिए कहा गया. ईस्ट दिल्ली के एक केंद्रीय विद्यालय के शिक्षक कहते हैं कि “हमें ऑर्डर दिया गया कि क्या और कैसे करना है, फीडबैक नहीं मांगा गया. इसलिए हमने सिर्फ ऑर्डर का पालन किया और असल चेकिंग तक अपने लैपटॉप पर ही प्रैक्टिस करते रहे.” कुछ प्रतिभागियों ने आशंका जताई कि इससे सतही या जल्दबाजी में मूल्यांकन होने का जोखिम बढ़ सकता है.

वास्तविक मूल्यांकन में सामने आई नई समस्याएं

शिक्षकों के अनुसार ड्राई रन और वास्तविक मूल्यांकन के अनुभवों में काफी अंतर था. उनका कहना है कि अभ्यास के दौरान उन्हें एक भी धुंधली (blurred) उत्तर पुस्तिका नहीं दिखाई गई थी. लेकिन असली चेकिंग में बोर्ड मूल्यांकन के दौरान स्थिति अलग थी. एक मूल्यांकन केंद्र से जुड़े शिक्षक के अनुसार लगभग 3000 उत्तर पुस्तिकाओं में से करीब 300 कॉपियां धुंधली थीं. कई कॉपियां आंशिक रूप से कटी हुई (cropped) थीं. कुछ मामलों में पन्ने तिरछे या मुड़े हुए स्कैन हुए मिले. शिक्षकों का कहना है कि ऐसी समस्याएं ड्राई रन के दौरान कभी सामने नहीं आई थीं. इसलिए उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि ऐसी कॉपियों की चेकिंग कैसे की जाए. शिक्षक बताते हैं कि “हमने कई कॉपियां जो धुंधली थीं, उन्हें रिजेक्ट किया क्योंकि ऐसा भी ऑप्शन था, लेकिन फिर भी ऐसी कॉपियां लगातार आती रहीं.” उनके अनुसार वास्तविक परिस्थितियों और परीक्षण परिस्थितियों में काफी अंतर था.

क्या फीडबैक को पर्याप्त महत्व मिला?

कुछ शिक्षकों और स्कूल प्रमुखों का कहना है कि तकनीकी समस्याओं के बाद सर्कुलर जारी किए गए और HOS यानी प्रिंसिपलों को प्रक्रिया संभालने के निर्देश दिए गए. हालांकि कुछ प्रतिभागियों का दावा है कि उनसे विस्तृत फीडबैक लेने के बजाय मुख्य रूप से दिशा-निर्देशों का पालन करने और अभ्यास जारी रखने को कहा गया. एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने कहा, “हमें कहा गया कि सिस्टम के अनुसार काम करना है. लेकिन जमीनी स्तर की कई चिंताओं पर गंभीर चर्चा नहीं हुई.”

CBSE का पक्ष

CBSE का कहना है कि ड्राई रन के बाद कई महत्वपूर्ण सुधार किए गए थे. बोर्ड के अनुसार मूल्यांकन इंटरफेस में Save विकल्प जोड़ा गया, अंक हटाने की प्रक्रिया को सरल बनाया गया, सर्वर क्षमता बढ़ाई गई, स्टैटिक IP से जुड़ी समस्या को दूर किया गया और अंक प्रदर्शित होने की स्थिति में भी बदलाव किया गया. CBSE का दावा है कि ड्राई रन ने सिस्टम की कमियों की पहचान करने और उन्हें सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

इसे भी पढ़ें- जब CBSE नहीं था तब कैसे होते थे बोर्ड एग्जाम, जानें क्या है इसका इतिहास?

बड़ा सवाल अभी भी बाकी

OSM प्रणाली का उद्देश्य मूल्यांकन को आधुनिक और ज़्यादा पारदर्शी बनाना था. लेकिन शिक्षकों, परीक्षकों और स्कूल प्रमुखों के अनुभव बताते हैं कि तकनीकी ढांचे, प्रशिक्षण, इंटरनेट क्षमता और स्कैनिंग गुणवत्ता जैसे मुद्दे इस पूरी प्रक्रिया की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. अब जबकि OSM को लेकर सवाल उठ रहे हैं और इसकी जांच की मांग भी सामने आ चुकी है, सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या प्रणाली को देशभर में लागू करने से पहले और व्यापक स्तर पर परीक्षण किया जाना चाहिए था? यह सवाल केवल तकनीक का नहीं, बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य और मूल्यांकन प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा हुआ है.

इसे भी पढ़ें- CBSE री-वैल्यूएशन 2026 के लिए 40 हजार छात्रों ने किया आवेदन, बोर्ड ने जारी किया बड़ा अपडेट

Education Loan Information:
Calculate Education Loan EMI

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola
Advertisement

टॉप हेडलाइंस

CBSE OSM Controversy: 'सिस्टम में दिक्कतें थीं फिर भी लागू किया', OSM ड्राई रन में शामिल शिक्षकों का बड़ा खुलासा
'सिस्टम में दिक्कतें थीं फिर भी लागू किया', OSM ड्राई रन में शामिल शिक्षकों का बड़ा खुलासा
JEE Advanced के 1.79 लाख स्टूडेंट्स का पर्सनल डेटा हो गया लीक, IIT रुड़की ने जारी किया बयान 
JEE Advanced के 1.79 लाख स्टूडेंट्स का पर्सनल डेटा हो गया लीक, IIT रुड़की ने जारी किया बयान 
इंजीनियरिंग छात्रों के लिए सरकार दे रही मोटी स्कॉलरशिप, जानें कौन-कौन सी योजनाएं हैं और कैसे कर सकते हैं अप्लाई
इंजीनियरिंग छात्रों के लिए सरकार दे रही मोटी स्कॉलरशिप, जानें कौन-कौन सी योजनाएं हैं और कैसे कर सकते हैं अप्लाई
DU Recruitment 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में निकली बंपर भर्ती, 1 लाख रुपये तक मिलेगी सैलरी; 25 जून तक करें आवेदन
दिल्ली यूनिवर्सिटी में निकली बंपर भर्ती, 1 लाख रुपये तक मिलेगी सैलरी; 25 जून तक करें आवेदन
Advertisement

वीडियोज

Sansani | Crime News | Malviya Nagar Fire:होटल नहीं, 'गैस चेंबर' में तड़पकर मरे 21 लोग!
Malviya Nagar Fire | Fire Incident | Delhi News | Janhit: मालवीय नगर का खौफनाक सच!
Malviya Nagar Fire | Fire Incident | Delhi News: ऑनलाइन बुकिंग चालू, पर सिस्टम 'अंधा'!
Malviya Nagar Fire | Bharat Ki Baat: खिड़कियां सील, बंद इमरजेंसी एग्जिट! रूह कंपा देने वाली दास्तां!
Malviya Nagar Fire | Fire Incident | Sandeep Chaudhary:मालवीय नगर अग्निकांड पर सबसे तीखा प्रहार!
Advertisement

फोटो गैलरी

Advertisement

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
मोदी सरकार ने तेल संकट के बीच लिया बड़ा फैसला, जारी किया 10 हजार करोड़ का फंड
मोदी सरकार ने तेल संकट के बीच लिया बड़ा फैसला, जारी किया 10 हजार करोड़ का फंड
मालवीय नगर अग्निकांड: फरार हो गया था होटल मालिक लवकेश बजाज, घर भी नहीं गया, सड़क पर घूमता रहा
मालवीय नगर अग्निकांड: फरार हो गया था होटल मालिक लवकेश बजाज, घर भी नहीं गया, सड़क पर घूमता रहा
उधर टैरिफ लगाने की बात इधर भारत संग ट्रेड को बेताब ट्रंप, US राजदूत बोले- 99 प्रतिशत डील पक्की, मैं कल ही...
उधर टैरिफ लगाने की बात इधर भारत संग ट्रेड को बेताब ट्रंप, US राजदूत बोले- 99 प्रतिशत डील पक्की, मैं कल ही...
IND vs AFG Test: अफगानिस्तान ने खेले कुल 12 टेस्ट, भारत से भी हो चुकी है भिड़ंत, जानें कितने जीते और कितने हारे
अफगानिस्तान ने खेले कुल 12 टेस्ट, भारत से भी हो चुकी है भिड़ंत, जानें कितने जीते और कितने हारे
Peddi Box Office: 350 करोड़ के बजट में बनी है 'पेद्दी', जानें- सेफ जोन में आने के लिए राम चरण की फिल्म को कितना कमाना होगा?
350 करोड़ के बजट में बनी है 'पेद्दी', जानें- सेफ जोन में आने के लिए फिल्म को कितना कमाना होगा?
दिल्ली आग हादसे के बाद CM योगी आदित्यनाथ की सख्ती, अधिकारियों को दिए अहम निर्देश
दिल्ली आग हादसे के बाद CM योगी आदित्यनाथ की सख्ती, अधिकारियों को दिए अहम निर्देश
UNSC से पाकिस्तान की छुट्टी! पहली बार UN सुरक्षा परिषद का मेंबर बना ये देश, बढ़ेगा कद
UNSC से पाकिस्तान की छुट्टी! पहली बार UN सुरक्षा परिषद का मेंबर बना ये देश, बढ़ेगा कद
Delhi Malviya Nagar Fire: क्या है बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी? जिस पर चल रहा था मालवीय नगर वाला रेस्टोरेंट, यहीं हुआ था अग्निकांड
क्या है बेड एंड ब्रेकफास्ट पॉलिसी? जिस पर चल रहा था मालवीय नगर वाला रेस्टोरेंट, यहीं हुआ था अग्निकांड
Embed widget