बिल्डर ने फ्लैट देने में की देरी? जानिए होम लोन EMI के कानूनी अधिकार
Real Estate: घर एक 'सपना' जिसकी आप EMI चुका रहे हैं. बिल्डर तय समय सीमा चूक गया. भारत में घर मिलने में देरी बन रही बड़ी समस्या. घर समय पर न मिले तो आप क्या कर सकते हैं.

भारत के आवास बाजार में बिक्री और नए प्रोजेक्ट्स की शुरुआत में लगातार तेजी के बावजूद घर खरीदारों के लिए कब्जे में देरी सबसे बड़ी समस्याओं में से एक बनी हुई है. कई परिवारों के लिए, इसके नतीजे असुविधा से कहीं ज्यादा गंभीर होते हैं. देरी का मतलब सालों तक किराया और EMI का भुगतान करना, कर लाभों से वंचित रहना, वित्तीय योजनाओं में बाधा आना और कुछ मामलों में लंबी कानूनी लड़ाई लड़ना हो सकता है.
कब्जा मिलने में देरी बन रही बड़ी समस्या
अगर आपकी परियोजना में देरी हुई है तो आप अकेले नहीं हैं. प्रॉपइक्विटी के मुताबिक, जुलाई 2024 तक देश के 42 शहरों में करीब 2 हजार आवास परियोजनाएं, जिनमें 5.08 लाख इकाइयां शामिल हैं, रुकी हुई थीं. यह संख्या 2018 में रुकी हुई 4.65 लाख इकाइयों से ज्यादा है.
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि समस्या केवल पूरी तरह से रुके हुए प्रोजेक्ट्स तक ही नहीं है, बल्कि निर्माणाधीन घरों में से पांच में से चार घर जो अंततः सौंपे जाते हैं, उनमें भी तीन से चार साल की देरी होती है. ऐसे में आंकड़े एक बात साफ कर रहे है कि संपत्ति पर कब्ज़ा मिलने में देरी कोई अलग-थलग समस्या नहीं है. यह भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में ग्राहकों की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है.
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घर खरीदार के अधिकार क्या हैं ?
खरीदारों के बीच सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि उनके पास इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है. लेकिन ऐसा नहीं है, खरीदारों को समझना चाहिए. डी. एम. हरीश एंड कंपनी की वकील स्नेहा सुरेश के मुताबिक, जब कोई बिल्डर बिक्री समझौते में तय तारीख तक कब्ज़ा नहीं सौंपता, तो खरीदार को कई कानूनी अधिकार हासिल हो जाते हैं'. साथ ही रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 की धारा 18 के तहत, खरीदारों के पास दो विकल्प होते हैं.
पहला विकल्प है परियोजना से पीछे हटना और ब्याज सहित धन वापसी की मांग करना. वही दूसरा विकल्प है परियोजना में बने रहना और कब्ज़ा मिलने तक हर महीने की देरी के लिए ब्याज का दावा करना. खास बात यह है कि सुप्रीम कोर्ट ने विलंबित कब्जे के विवादों में बार-बार घर खरीदारों का पक्ष लिया है.
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