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Tej Pratap Yadav New Political Party: कितने रुपये में बन जाती है नई पॉलिटिकल पार्टी, कम से कम कितने कार्यकर्ता जरूरी

Tej Pratap Yadav New Political Party: लालू यादव के बेटे तेज प्रताप यादव ने नई पार्टी जनशक्ति जनता दल बनाकर बिहार चुनावी राजनीति में एंट्री कर ली है. नई पार्टी बनाने के लिए कितने रुपये लगते हैं.

Tej Pratap Yadav New Political Party: लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे और आरजेडी के पूर्व नेता तेज प्रताप यादव ने बिहार की राजनीति में नया दांव चला है. उन्होंने अपनी अलग पार्टी की घोषणा कर विधानसभा चुनावी जंग में उतरने का ऐलान कर दिया है. इस नई पार्टी का नाम ‘जनशक्ति जनता दल’ रखा गया है और इसका चुनावी प्रतीक ब्लैक बोर्ड तय किया गया है. तेज प्रताप ने इसकी झलक अपने आधिकारिक X अकाउंट पर पोस्टर शेयर कर दी है. चलिए जानें कि कितने रुपये में नई पॉलिटिकल पार्टी बनाई जाती है और इसमें कम से कम कितने कार्यकर्ता होने जरूरी हैं.

चुनाव आयोग की मंजूरी जरूरी

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में कोई भी नागरिक या ग्रुप अपनी राजनीतिक सोच और विचारधारा को जनता तक पहुंचाने के लिए नई राजनीतिक पार्टी बना सकता है, लेकिन इसके लिए एक सुव्यवस्थित कानूनी प्रक्रिया और चुनाव आयोग की मंजूरी आवश्यक होती है. चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार नई पार्टी का गठन करने के लिए सबसे पहले आयोग को एक औपचारिक आवेदन भेजना होता है. यह आवेदन पार्टी गठन की तारीख से 30 दिनों के अंदर दाखिल करना जरूरी है. 

कितने रुपये लगते हैं?

यहां आवेदन के साथ एक 10,000 रुपये का डिमांड ड्राफ्ट का जमा करना जरूरी है, जिसे रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में स्वीकार किया जाता है. यह राशि 2014 से पहले 5,000 रुपये थी, जिसे बाद में बढ़ा दिया गया है. रजिस्ट्रेशन के लिए सिर्फ पैसे भरना ही काफी नहीं है. आवेदन के साथ पार्टी का संविधान, मुख्यालय का पता, पदाधिकारियों की सूची जैसे अध्यक्ष, महासचिव, कोषाध्यक्ष और सदस्यों का विवरण भी देना होता है. नियमों के मुताबिक नई पार्टी बनाने के लिए कम से कम 100 प्राथमिक सदस्यों की सूची चुनाव आयोग को सौंपी जाती है. इन सदस्यों के नाम, पते और शपथपत्र भी अटैच करने जरूरी होते हैं.

स्थानीय अखबारों में देनी होती है जानकारी

इसके अलावा पार्टी रजिस्ट्रेशन प्रॉसेस में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए चुनाव आयोग आवेदक पार्टी से कहता है कि वह अपने आवेदन की सूचना कम से कम दो राष्ट्रीय और दो स्थानीय अखबारों में प्रकाशित करनी होती है. इस प्रकाशन के जरिए जनता या किसी अन्य राजनीतिक दल को आपत्ति जताने का अवसर दिया जाता है. यदि किसी तरह की आपत्ति दर्ज नहीं होती या आयोग उन आपत्तियों को निराधार मान लेता है, तो नई पार्टी को रजिस्ट्रेशन प्रमाणपत्र जारी कर दिया जाता है.

कितने कार्यकर्ता जरूरी

यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि रजिस्ट्रेशन और मान्यता दो अलग-अलग बातें हैं. रजिस्ट्रेशन के बाद पार्टी को चुनाव लड़ने का अधिकार मिल जाता है, लेकिन उसे राष्ट्रीय या राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा पाने के लिए कुछ अतिरिक्त शर्तें पूरी करनी पड़ती हैं, जैसे किसी राज्य में विधानसभा चुनाव में कुल वोटों का कम से कम 6% हासिल करना या एक निश्चित संख्या में सीटें जीतना मान्यता प्राप्त पार्टी बनने के लिए जरूरी होता है.

कितना आता है खर्चा?

खर्च की बात करें तो 10,000 रुपये रजिस्ट्रेशन फीस के अलावा पार्टी गठन पर दस्तावेजों की नोटरी, शपथपत्र तैयार करने, अखबारों में नोटिस छपवाने और कानूनी सलाह पर भी खर्च आता है. यह खर्च पार्टी की तैयारी और पैमाने के आधार पर कुछ हजार से लेकर कई लाख रुपये तक पहुंच सकता है. 

यह भी पढ़ें: बिहार में कितने हैं हिंदू-मुस्लिम, दलित-ओबीसी और ईबीसी, एक नजर में जानें पूरे आंकड़े

About the author निधि पाल

निधि पाल को पत्रकारिता में छह साल का तजुर्बा है. लखनऊ से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी करने के बाद इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत भी नवाबों के शहर से की थी. लखनऊ में करीब एक साल तक लिखने की कला सीखने के बाद ये हैदराबाद के ईटीवी भारत संस्थान में पहुंचीं, जहां पर दो साल से ज्यादा वक्त तक काम करने के बाद नोएडा के अमर उजाला संस्थान में आ गईं. यहां पर मनोरंजन बीट पर खबरों की खिलाड़ी बनीं. खुद भी फिल्मों की शौकीन होने की वजह से ये अपने पाठकों को नई कहानियों से रूबरू कराती थीं.

अमर उजाला के साथ जुड़े होने के दौरान इनको एक्सचेंज फॉर मीडिया द्वारा 40 अंडर 40 अवॉर्ड भी मिल चुका है. अमर उजाला के बाद इन्होंने ज्वाइन किया न्यूज 24. न्यूज 24 में अपना दमखम दिखाने के बाद अब ये एबीपी न्यूज से जुड़ी हुई हैं. यहां पर वे जीके के सेक्शन में नित नई और हैरान करने वाली जानकारी देते हुए खबरें लिखती हैं. इनको न्यूज, मनोरंजन और जीके की खबरें लिखने का अनुभव है. न्यूज में डेली अपडेट रहने की वजह से ये जीके के लिए अगल एंगल्स की खोज करती हैं और अपने पाठकों को उससे रूबरू कराती हैं.

खबरों में रंग भरने के साथ-साथ निधि को किताबें पढ़ना, घूमना, पेंटिंग और अलग-अलग तरह का खाना बनाना बहुत पसंद है. जब ये कीबोर्ड पर उंगलियां नहीं चला रही होती हैं, तब ज्यादातर समय अपने शौक पूरे करने में ही बिताती हैं. निधि सोशल मीडिया पर भी अपडेट रहती हैं और हर दिन कुछ नया सीखने, जानने की कोशिश में लगी रहती हैं.

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