125 किमी लंबा ट्रैक, 12 स्टेशन और 28 सुरंगें, कैसी होगी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन?
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना के तहत लगभग 125 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जा रही है, जिसमें 12 स्टेशन, 28 सुरंगे और 57 पुल बनाए जाने हैं. जानिए इससे जुड़ी पूरी बात.

भारतीय रेलवे की ओर से उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों तक रेल पहुंचाने की तैयारी तेजी से आगे बढ़ रही है, इससे बद्रीनाथ-केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को भी फायदा होगा. उत्तराखंड के पहाड़ों में रेल पहुंचाने के लिए ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना पर काम चल रहा है. करीब 125 किलोमीटर लंबी इस रेल लाइन पर 12 स्टेशन बनाए जाने हैं. इस प्रोजेक्ट के पूरा होने से पहाड़ों में रहने वाले लोगों के लिए सफर आसान होगा. साथ ही, बद्रीनाथ और केदारनाथ जाने वाले यात्रियों को भी बेहतर कनेक्टिविटी मिलने की उम्मीद है.
इस रेल लाइन की सबसे खास बात यह है कि इसका बड़ा हिस्सा पहाड़ों के अंदर से गुजरेगा. करीब 83 फीसदी रेल लाइन सुरंगों में होगी. इसके लिए कुल 28 सुरंगें बनाई जा रही हैं, जिनमें मुख्य सुरंगों के साथ इमरजेंसी के लिए एस्केप टनल भी शामिल हैं. इसके अलावा, रेल लाइन पर छोटे-बड़े कुल 57 पुल बनाए जाने हैं.
हालांकि पहाड़ों के अंदर सुरंग बनाना बड़ी चुनौती है क्योंकि हिमालय के पहाड़ी इलाके में रेल लाइन बिछाना आसान नहीं है. यहां कठिन चट्टानों और भूगर्भीय परिस्थितियों के बीच सुरंगें बनानी पड़ रही हैं. इस काम में टनल बोरिंग मशीन यानी TBM जैसी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.
रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा
परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण का काम 100 फीसदी पूरा हो चुका है. निर्माण की बात करें तो वीरभद्र से योगनगरी ऋषिकेश के बीच करीब 5 किलोमीटर का रेल सेक्शन साल 2020 में ही पूरा हो गया था. रेलवे के मुताबिक, 16 मुख्य सुरंगों में से 13 और 12 एस्केप टनल में से 10 का ब्रेकथ्रू पूरा हो चुका है. यानी इन सुरंगों के दोनों सिरों को जोड़ने का काम पूरा हो गया है. वहीं, 8 बड़े और 30 छोटे पुल भी बनकर तैयार हो चुके हैं.
रेलवे का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से उत्तराखंड के रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन से सिर्फ सफर आसान नहीं होगा, बल्कि पहाड़ी इलाकों में कारोबार और पर्यटन को भी फायदा मिलने की उम्मीद है. रेल कनेक्टिविटी बेहतर होने से स्थानीय लोगों को आने-जाने में सुविधा होगी और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे.
पहाड़ों में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा
बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों तक पहुंचने वाले यात्रियों के लिए भी यह परियोजना अहम है. इसके साथ ही, उत्तराखंड के दूरदराज और सीमावर्ती इलाकों तक पहुंच आसान बनाने के लिहाज से भी इस रेल लाइन को महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
इसके अलावा सामरिक लिहाज से देखा जाएगा तो इस प्रोजेक्ट के बाद रेलवे लाइन चीन की सीमा के बेहद करीब पहुंच जाएगी, क्योंकि कर्णप्रयाग चीन की सीमा के बेहद करीब है, रणनीतिक लिहाज से भी उत्तराखंड में बेहतर परिवहन व्यवस्था महत्वपूर्ण है. जानकारी के मुताबिक, कर्णप्रयाग से चीन सीमा की दूरी दूरी लगभग 123 किलोमीटर बताई जाती है. हालांकि, यह रेल लाइन सीधे चीन की सीमा तक नहीं जाती. रेलवे के मुताबिक इस प्रोजेक्ट में देश की सबसे लंबी रेल टनल भी होगी.
कुल मिलाकर, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन उत्तराखंड के लिए एक अहम परियोजना है. इसके पूरा होने से पहाड़ों में रेल नेटवर्क का विस्तार होगा, यात्रियों का सफर आसान होगा और क्षेत्र में पर्यटन व आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
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