Taliban के सामने सर न झुकाने वाले Amrullah Saleh का सत्य वचन
अफगानिस्तान अब लगभग पूरी तरह से तालिबान के आगोश में है। लेकिन एक छोटा सा प्रांत पंजशीर अब भी आखिरी लड़ाई लड़ रहा है। उसने तालिबान के सामने सिर नहीं झुकाया, घुटने नहीं टेके। उपराष्ट्रपति अमरुल्ला सालेह वहीं पर हैं, वो बाकी नेताओं की तरह ना भागे, ना ही तालिबान के आगे सरेंडर भी नहीं किया। बल्कि तालिबान के जुल्मों सितम के खिलाफ खुली जंग का ऐलान भी कर दिया। अब वो तालिबान के खिलाफ एक फोर्स तैयार कर रहे हैं, जंग के लिए। लेकिन सवाल है कि अफगानिस्तान का वो आखिरी दुर्ग बचेगा कैसे ? पूरी ताकत के बावजूद भी तालिबान आखिर पंजशीर पर हमला करने की हिम्मत क्यों नहीं कर पा रहा है ? और ऐसा क्या है पंजशीर में जिसका हिंदुस्तान से नाता है ? जिससे पूरे अफगानिस्तान की आखिरी उम्मीद जुड़ी हुई है
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