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25 में शून्य 26 में सम्राट, बांकीपुर जीते प्रशांत किशोर तो यूजर्स ने यूं किया सम्मान

हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर प्रशांत किशोर ने बीजेपी के इस पारंपरिक किले में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगा ली, जवाब उनकी मजबूत जमीनी रणनीति, बदलाव की सोच और जनता के साथ सीधे जुड़ाव में छिपा है.

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने पहली बार चुनावी मैदान में उतरकर बीजेपी के मजबूत गढ़ माने जाने वाले बांकीपुर विधानसभा सीट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर देश भर में बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है. बांकीपुर सीट पर हुए इस कड़े मुकाबले में 31 राउंड तक वोटों की गिनती चली, जिसमें प्रशांत किशोर पहले राउंड से ही लगातार आगे रहे और अंत तक अपनी बढ़त बनाए रखी. 31 राउंड की पूरी गिनती के बाद उन्होंने बीजेपी उम्मीदवार नीरज सिन्हा को 18,953 वोटों के बड़े अंतर से करारी शिकस्त दी, जबकि आरजेडी की रेखा गुप्ता इस मुकाबले में तीसरे स्थान पर रहीं. ऐसे में प्रशांत किशोर ने बांकीपुर के साथ साथ सोशल मीडिया यूजर्स का दिल भी जीत लिया है. पीके को 63203 वोट मिले.

बांकीपुर से प्रशांत किशोर की जीत

लेकिन अब हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर प्रशांत किशोर ने बीजेपी के इस पारंपरिक किले में इतनी बड़ी सेंध कैसे लगा ली, जिसका जवाब उनकी मजबूत जमीनी रणनीति, बदलाव की सोच और जनता के साथ सीधे जुड़ाव में छिपा है, जिसने पारंपरिक राजनीति के सारे समीकरणों को पूरी तरह पलट कर रख दिया. हालांकि 2025 में प्रशांत किशोर की पार्टी जनसुराज खाता भी नहीं खोल पाई और न ही प्रशांत किशोर ने किसी सीट से चुनाव लड़ा था. लेकिन करीब 9 महीने बाद प्रशांत किशोर ने इतना बड़ा उलटफेर किया कि बीजेपी का गढ़ कहे जाने वाले बांकीपुर में ही सेंध लगा दी और बीजेपी का किला ध्वस्त कर दिया. ऐसे में सोशल मीडिया पर यूजर्स उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं.

2025 में रणनीतिकार से नेता बने लेकिन हो गया था बुरा हाल

2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी (JSP) का प्रदर्शन बेहद खराब रहा था और पार्टी का हाल काफी निराशाजनक रहा था. व्यापक प्रचार और लंबी पदयात्राओं के बावजूद जन सुराज पार्टी एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई और उसका खाता तक नहीं खुला. पार्टी ने लगभग 238-243 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, लेकिन वे सभी हार गए. चुनाव में पार्टी को मुश्किल से 3% के आसपास ही कुल वोट शेयर मिल पाया, जिससे यह साबित हुआ कि जमीनी स्तर पर भीड़ को वोटों में बदलना उनके लिए बेहद मुश्किल साबित हुआ.

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अब यूजर्स कर रहे तारीफ, बोले आप ही हिरो हो

सोशल मीडिया पर जैसे ही ये खबर फैली कि प्रशांत किशोर चुनाव जीत चुके हैं इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. एक यूजर ने लिखा...2025 में जीरो और 2026 में सम्राट, क्या बात है प्रशांत किशोर आपने हार नहीं मानी. एक और यूजर ने लिखा...कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं होता, एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारों. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा...हार कर भी पीके ने हार नहीं मानी और करीब 9 महीने बाद फिर से घायल शेर की तरह लड़े और जीत गए.

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शेख इंजमाम उल हक

हजरत शेख इंजमाम को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. भारत की शाही संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के गवाह राजस्थान से उनका संबंध है. भारत की शिक्षा नगरी के तौर पर मशहूर कोटा उनकी कर्मभूमि है, जहां हर साल हजारों युवक बड़े-बड़े सपने लेकर, आईआईटी–जेईई और नीट की तैयारी के लिए इस शहर को अपना बसेरा बनाते हैं, लेकिन इंजमाम को इस शहर का ये माहौल रास नहीं आया और उन्होंने डॉक्टर, इंजीनियर बनने के बजाए पत्रकार बनने का फैसला किया. हालांकि, कोटा से 72 किमी दूर एक छोटे से गांव सीसवाली में जन्म लेने वाले इंजमाम ने इंटरमीडियट तक की पढ़ाई इसी शहर से की.

बचपन से हिंदी में रुचि और लगाव उन्हें पत्रकारिता के लिए दिल्ली खींच लाया. जहां उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में MA और एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की.

इंडिया न्यूज़ और विकिपीडिया के लिए कार्य करने के बाद इंजमाम एबीपी लाइव से बतौर ट्रेनी जुड़े और अब प्रमोट होकर बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शेख इंजमाम का हिंदी और उर्दू से खासा लगाव है और दोनों भाषाओं में शौकिया शायरी भी करते हैं. उन्होंने कई कविताएं रची हैं और अनेक साहित्यिक लेखों का सृजन किया है. साहित्य की एक अन्य विधा व्यंग्य भी उनका पसंदीदा विषय है.

ट्रेंडिंग और राजनीति उनकी पसंदीदा बीट है. राजनीतिक खबरों पर पैनी नजर की वजह से वो रोजाना के ट्रेंड और सोशल मीडिया पर पनपने वाले विचारों की बखूबी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम को घूमना पसंद है और उन्होंने भारत के कई शहरों और देहात का सफर किया है और वहां के रीति रिवाज, रहन सहन और सामाजिक ताने बाने को खूब समझते हैं.

इंजमाम को फिल्में देखने और गाने सुनने का भी शौक है. अमरीश पुरी और सलमान खान को वह अपने पसंदीदा अभिनेताओं में शुमार करते हैं. सूफी और क्लासिकल म्यूजिक भी उन्हें रुहानी सुकून देता है. उन्हें फिल्मी अभिनेताओं, कलाकारों और नेताओं के इंटरव्यू देखने का भी शौक है.

भाषा पर मजबूत पकड़ और लेखन की विभिन्न शैली में गहरी समझ रखने की वजह से वो खूबसूरत अंदाज़ में बड़ी आसानी से खबरों को पेश करने में सफल रहते हैं.

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