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फोन की लत छुड़ाने को स्कूल ने रचा खौफनाक ड्रामा, सदमे में आ गए बच्चे

यह मामला उत्तराखंड के खटीमा के बिरिया गांव स्थित मॉन्टेसरी इंडियन पब्लिक स्कूल का है. यहां बच्चों को मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले कथित नुकसान से बचाने के लिए ड्रामा रचा गया.

सोशल मीडिया पर उत्तराखंड के खटीमा के एक स्कूल का वीडियो चर्चा में है, जिसे देखकर पहली नजर में ऐसा लगता है जैसे स्कूल में कोई बड़ा हादसा हो गया हो. कहीं बच्चे मरीज बने नजर आते हैं तो कहीं आंखों की परेशानी से जूझते बच्चों का इलाज करते डॉक्टर दिखाई देते हैं.

सबसे ज्यादा हैरान करने वाले दृश्य वे हैं, जिनमें बच्चों को आंखों की रोशनी खोते और आंखें निकलने जैसी स्थिति में दिखाया गया है. लेकिन यह कोई असली हादसा नहीं, बल्कि बच्चों को मोबाइल फोन की लत से दूर रखने के लिए किया गया एक बेहद नाटकीय जागरूकता कार्यक्रम था.

मोबाइल की लत पर स्कूल ने रचा पूरा नाटक

यह मामला उत्तराखंड के खटीमा के बिरिया गांव स्थित मॉन्टेसरी इंडियन पब्लिक स्कूल का है. यहां बच्चों को मोबाइल फोन के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाले कथित नुकसान के बारे में समझाने के लिए एक खास एंटी-मोबाइल एक्टिविटी कराई गई. स्कूल में करीब 150 बच्चे पढ़ते हैं और यहां कक्षा 8 तक की पढ़ाई होती है. इसी कार्यक्रम का वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर शेयर हुआ और देखते ही देखते चर्चा में आ गया.

 
 
 
 
 
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बच्चे बने मरीज और डॉक्टर

नाटक में बच्चों को अलग-अलग भूमिकाएं दी गई थीं. कुछ बच्चे डॉक्टर बने तो कुछ मरीजों का किरदार निभाते नजर आए. आंखों की परेशानी से लेकर आंखों की रोशनी जाने तक के दृश्य नाटक में दिखाए गए. बच्चों ने इसे इतने गंभीर और डरावने अंदाज में पेश किया कि देखने वाले दूसरे बच्चे भी सहमते नजर आए. वीडियो देखने पर कुछ समय के लिए यह समझना मुश्किल हो सकता है कि सामने कोई वास्तविक घटना नहीं, बल्कि स्कूल की ओर से तैयार किया गया नाटक है.

माता-पिता की शिकायत के बाद उठाया गया कदम

बताया गया कि गांव के कई माता-पिता बच्चों के बढ़ते मोबाइल इस्तेमाल को लेकर चिंतित थे. गांव के सामाजिक कार्यकर्ताओं के मुताबिक, ग्रामीणों ने स्कूल की प्रधानाचार्य हेमा चुफाल से इस मुद्दे पर बात की थी. इसके बाद स्कूल ने बच्चों को मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से होने वाली परेशानियों के बारे में समझाने के लिए यह कार्यक्रम तैयार किया. मकसद था कि बच्चे खुद मोबाइल के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की जरूरत समझें और घर जाकर अपने माता-पिता से भी इस बारे में बात करें.

गांव में बच्चों के लिए मनोरंजन के विकल्प भी कम

स्कूल प्रबंधन के मुताबिक, गांव में बच्चों के लिए बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा एक्टिविटी या मनोरंजन के साधन उपलब्ध नहीं हैं. आसपास कोई बड़ा सेंटर भी नहीं है, जहां बच्चे आसानी से जाकर अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा ले सकें. इसके अलावा जंगल के नजदीक होने के कारण जंगली जानवरों का भी डर रहता है. ऐसे में मोबाइल फोन बच्चों के खाली समय का एक बड़ा हिस्सा बन गया है. स्कूल इसी आदत को लेकर अभिभावकों के बीच जागरूकता पैदा करना चाहता था.

लेकिन डरावने तरीके पर उठे सवाल

हालांकि बच्चों को मोबाइल से दूर रखने की कोशिश को लेकर बात यहीं खत्म नहीं हुई. कार्यक्रम के तरीके को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. बाल मनोवैज्ञानिकों ने कहा कि बच्चों की सेहत को लेकर जागरूकता पैदा करना अच्छी सोच हो सकती है, लेकिन इसके लिए अपनाया गया तरीका उचित नहीं था. आंखें निकलने और बच्चों को डराने जैसे दृश्य छोटे बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर अलग तरह का असर डाल सकते हैं.

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यूजर्स बोले- इसके अलावा कोई तरीका नहीं

वीडियो को adarsh_india_montessori_school नाम के इंस्टाग्राम अकाउंट से शेयर किया गया है जिसे अब तक लाखों लोगों ने देखा है तो वहीं कई लोगों ने वीडियो को लाइक भी किया है. ऐसे में सोशल मीडिया यूजर्स वीडियो को लेकर तरह तरह के रिएक्शन दे रहे हैं. एक यूजर ने लिखा...एक बार के लिए लगा सच में आंखें फोड़ दी. एक और यूजर ने लिखा....बच्चे इस कदम के बगैर मानते नहीं. तो वहीं एक और यूजर ने लिखा...दुख हो रहा है लेकिन इसके अलावा कोई और चारा नहीं था.

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शेख इंजमाम उल हक

हजरत शेख इंजमाम को पत्रकारिता में 2 साल से ज्यादा का अनुभव है. भारत की शाही संस्कृति और गौरवशाली इतिहास के गवाह राजस्थान से उनका संबंध है. भारत की शिक्षा नगरी के तौर पर मशहूर कोटा उनकी कर्मभूमि है, जहां हर साल हजारों युवक बड़े-बड़े सपने लेकर, आईआईटी–जेईई और नीट की तैयारी के लिए इस शहर को अपना बसेरा बनाते हैं, लेकिन इंजमाम को इस शहर का ये माहौल रास नहीं आया और उन्होंने डॉक्टर, इंजीनियर बनने के बजाए पत्रकार बनने का फैसला किया. हालांकि, कोटा से 72 किमी दूर एक छोटे से गांव सीसवाली में जन्म लेने वाले इंजमाम ने इंटरमीडियट तक की पढ़ाई इसी शहर से की.

बचपन से हिंदी में रुचि और लगाव उन्हें पत्रकारिता के लिए दिल्ली खींच लाया. जहां उन्होंने पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री ली. उन्होंने जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी साहित्य में MA और एम.फिल. की डिग्री भी हासिल की.

इंडिया न्यूज़ और विकिपीडिया के लिए कार्य करने के बाद इंजमाम एबीपी लाइव से बतौर ट्रेनी जुड़े और अब प्रमोट होकर बतौर कॉपी एडिटर अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं.

शेख इंजमाम का हिंदी और उर्दू से खासा लगाव है और दोनों भाषाओं में शौकिया शायरी भी करते हैं. उन्होंने कई कविताएं रची हैं और अनेक साहित्यिक लेखों का सृजन किया है. साहित्य की एक अन्य विधा व्यंग्य भी उनका पसंदीदा विषय है.

ट्रेंडिंग और राजनीति उनकी पसंदीदा बीट है. राजनीतिक खबरों पर पैनी नजर की वजह से वो रोजाना के ट्रेंड और सोशल मीडिया पर पनपने वाले विचारों की बखूबी समझ रखते हैं.

शेख इंजमाम को घूमना पसंद है और उन्होंने भारत के कई शहरों और देहात का सफर किया है और वहां के रीति रिवाज, रहन सहन और सामाजिक ताने बाने को खूब समझते हैं.

इंजमाम को फिल्में देखने और गाने सुनने का भी शौक है. अमरीश पुरी और सलमान खान को वह अपने पसंदीदा अभिनेताओं में शुमार करते हैं. सूफी और क्लासिकल म्यूजिक भी उन्हें रुहानी सुकून देता है. उन्हें फिल्मी अभिनेताओं, कलाकारों और नेताओं के इंटरव्यू देखने का भी शौक है.

भाषा पर मजबूत पकड़ और लेखन की विभिन्न शैली में गहरी समझ रखने की वजह से वो खूबसूरत अंदाज़ में बड़ी आसानी से खबरों को पेश करने में सफल रहते हैं.

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