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इस मेंढक के सिर पर नहीं मुंह में है आंख! वैज्ञानिकों ने बताई वजह तो पूरा इंटरनेट रह गया हैरान

आपने दो सिर वाले सांप, तीन आंखों वाली मछली या बिना आंखों वाले जीवों के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी जीव की आंखें उसके मुंह के अंदर हों तो क्या होगा.

दुनिया में प्रकृति के चमत्कारों की कोई कमी नहीं है. हर दिन कुछ न कुछ ऐसा सामने आता है, जो हमें सोचने पर मजबूर कर देता है कि आखिर प्रकृति अपने प्रयोगों से हमें हैरान क्यों करती रहती है. आपने दो सिर वाले सांप, तीन आंखों वाली मछली या बिना आंखों वाले जीवों के बारे में तो सुना होगा, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि अगर किसी जीव की आंखें उसके मुंह के अंदर हों तो क्या होगा. सुनने में यह किसी हॉरर या साइंस-फिक्शन फिल्म की कहानी जैसी लगती है, लेकिन यह सच है. 

हैरान कर देने वाली खोज

साल 1992 में कनाडा के ओंटारियो प्रांत के बर्लिंगटन काउंटी में एक ऐसा मेंढक मिला, जिसकी आंखें सिर पर नहीं बल्कि मुंह के अंदर थीं. यह खोज रिसर्चर स्कॉट गार्डनर ने की थी. जब उन्होंने इस टोड को देखा तो वह खुद भी दंग रह गए. देखने में यह टोड बाकी टोड्स जैसा ही था, बस फर्क इतना था कि उसकी आंखें सिर पर नहीं थीं. जब वह अपना मुंह बंद करता था तो उसे कुछ भी दिखाई नहीं देता था. लेकिन जैसे ही वह मुंह खोलता, तभी उसकी आंखें बाहर की दुनिया देख सकती थीं. यह सीन न सिर्फ अजीब था बल्कि वैज्ञानिकों के लिए बेहद रोमांचक भी था. 

 
 
 
 
 
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आखिर ऐसा हुआ कैसे?

वैज्ञानिकों ने गहराई से जांच की और पाया कि यह घटना किसी सामान्य म्यूटेशन की नहीं, बल्कि एक मैक्रो म्यूटेशन (Macro Mutation) की वजह से हुई थी. जब कोई जीव बनता है तो उसके शरीर के हर अंग की जगह पहले से तय होती है. जैसे आंखें सिर पर, पैर नीचे, और मुंह सामने, लेकिन कभी-कभी विकास के शुरुआती चरण में जीन में गलती हो जाती है, जिससे शरीर के अंग गलत जगह बन जाते हैं. इस टोड के एंब्रियो में भी ऐसा ही हुआ आंखें सिर पर बनने की बजाय मुंह के अंदर विकसित हो गईं. 

वैज्ञानिक कारण जो इस रहस्य को समझाते हैं

1. परजीवी संक्रमण - कुछ परजीवी ऐसे होते हैं जो टोड या मेंढक के शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और उनके अंगों के विकास को प्रभावित करते हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि संभव है, किसी परजीवी ने भ्रूण अवस्था में इस टोड के विकास पर असर डाला हो, जिससे उसकी आंखों की स्थिति बदल गई. 

2. जेनेटिक गलती - कभी-कभी DNA की कॉपी बनने के दौरान बहुत छोटी सी गलती भी बहुत बड़ा असर डाल देती है. यह गलती आंखों के बनने वाली कोशिकाओं को गलत दिशा में भेज सकती है. इस वजह से आंखें मुंह के अंदर बन गईं. 

3. पर्यावरणीय जहर - 1990 के दशक में ओंटारियो के कई तालाबों में प्रदूषण और रासायनिक कचरा पाया गया था. वैज्ञानिकों ने माना कि इन जहरीले रसायनों ने भ्रूण के विकास में किया होगा, जिससे इस तरह का बदलाव हुआ.

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