चेन्नई मेट्रो में गर्लफ्रेंड से ब्याज की तुलना, विज्ञापन पर मचा बवाल
यह विज्ञापन THECOS यानी Thiruvalluvar Transport Corporation Employee's Co-operative Credit Society की ओर से लगाया गया था. संस्था फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम का प्रचार कर रही थी.

चेन्नई मेट्रो में लगे एक विज्ञापन ने ऐसा विवाद खड़ा कर दिया कि मामला सीधे राजनीतिक बयानबाजी तक पहुंच गया. विज्ञापन में फिक्स्ड डिपॉजिट यानी FD पर मिलने वाले ब्याज को समझाने के लिए गर्लफ्रेंड का उदाहरण दिया गया था. इसमें लिखा था कि गर्लफ्रेंड से 0 प्रतिशत ब्याज मिल सकता है, जबकि संबंधित संस्था की FD पर ब्याज मिलता है. विज्ञापन का यह अंदाज कुछ लोगों को भले ही मजाकिया लगा हो, लेकिन डीएमके सांसद थमिझाची थंगापांडियन ने इसे महिलाओं के सम्मान से जोड़ते हुए कड़ी आपत्ति जताई है.
FD बेचने के चक्कर में गर्लफ्रेंड का उदाहरण
यह विज्ञापन THECOS यानी Thiruvalluvar Transport Corporation Employee's Co-operative Credit Society की ओर से लगाया गया था. संस्था फिक्स्ड डिपॉजिट स्कीम का प्रचार कर रही थी. लोगों का ध्यान खींचने के लिए विज्ञापन में गर्लफ्रेंड और ब्याज दर के बीच तुलना की गई. इसी लाइन को लेकर पूरा विवाद खड़ा हो गया. सांसद थमिझाची थंगापांडियन ने विज्ञापन की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर शेयर की और इसकी भाषा पर सवाल उठाए.
சென்னை மெட்ரோ இரயிலுக்குள் இடம்பெற்றுள்ள ஒரு விளம்பரம் பெண்களை இழிவுபடுத்தும் வகையிலும், அவர்களை ஒரு பொருளாகச் சித்தரிக்கும் வகையிலும் குறிப்பிடப்பட்டிருப்பது அதிர்ச்சியளிக்கிறது.
— தமிழச்சி (@ThamizhachiTh) September 6, 2026
பொது இடங்களில் பெண்களின் கண்ணியத்தைக் கருத்தில் கொண்டு விளம்பரங்கள் இடம்பெறுவதை உறுதி செய்ய… pic.twitter.com/8bKvka4nD6
सांसद बोलीं- महिलाओं को इस तरह दिखाना ठीक नहीं
डीएमके सांसद ने कहा कि सार्वजनिक जगहों पर लगाए जाने वाले विज्ञापनों में महिलाओं की गरिमा का ध्यान रखा जाना चाहिए. उनका कहना है कि किसी उत्पाद या स्कीम का प्रचार करने के लिए महिलाओं को इस तरह पेश करना सही नहीं है. उन्होंने चेन्नई मेट्रो रेल प्रशासन से पूछा कि आखिर इस विज्ञापन को मेट्रो के अंदर लगाने की अनुमति कैसे दी गई.
एबीपी लाइव वायरल पोस्ट की पुष्टि नहीं करता है, खबर केवल सोशल मीडिया पर आधारित दावों पर लिखी गई है.
तुरंत विज्ञापन हटाने की मांग
थमिझाची थंगापांडियन ने मांग की कि विवादित विज्ञापन को तुरंत हटाया जाए. साथ ही उन्होंने कहा कि भविष्य में सार्वजनिक परिवहन में ऐसे विज्ञापन दिखाई न दें, इसके लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए. सांसद ने इस बात पर भी जोर दिया कि चेन्नई मेट्रो से हर दिन बड़ी संख्या में लोग सफर करते हैं. ऐसे में मेट्रो के अंदर दिखने वाली चीजों और विज्ञापनों की भाषा को लेकर ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है.
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सोशल मीडिया पर भी छिड़ी बहस
विज्ञापन सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इसे लेकर अलग-अलग राय देखने को मिल रही है. कुछ लोग इसे लोगों का ध्यान खींचने के लिए बनाया गया एक मजाकिया विज्ञापन मान रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स सांसद की आपत्ति से सहमत नजर आ रहे हैं. ऐसे लोगों का कहना है कि विज्ञापन भले ही मजाक के अंदाज में बनाया गया हो, लेकिन सार्वजनिक जगहों पर प्रचार की भाषा सोच-समझकर तय होनी चाहिए.
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