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फोन और ऐप्स में दिखने वाला Military-Grade Encryption क्या होता है? जानकर उड़ जाएंगे होश

Military-Grade Encryption: मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षित सिस्टम को कहा जाता है. इसका इस्तेमाल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है.

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  • विशेषज्ञ इसे बहुत मजबूत और सुरक्षित एन्क्रिप्शन मानते हैं।

Military-Grade Encryption: डेटा प्राइवेसी आज के समय में लोगों की जरूरत बन चुकी है. लोग अपने डेटा को ज्यादा महत्व देने लगे हैं क्योंकि आज के समय में जानकारी ही सबसे बड़ा हथियार होता है. साइबर फ्रॉड भी काफी तेजी से बढ़ रहा है जिससे लोगों को अपनी जानकारी को सुरक्षित रखना काफी मुश्किल होता जा रहा है. ऐसे में अक्सर देखा गया है कि क्लाउड स्टोरेज, मैसेजिंग ऐप्स और कई ऑनलाइन सर्विसेज Military-Grade Encryption की बात करती हैं. आइए जानते हैं कि आखिर ये है क्या और कैसे काम करता है.

क्या है Military-Grade Encryption?

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन एक सुरक्षित सिस्टम को कहा जाता है. इसका इस्तेमाल डेटा को सुरक्षित रखने के लिए किया जाता है. हालांकि, अब इस टर्म को मार्केट में काफी इस्तेमाल किया जाता है. कई बार कई लोगों को लगता है कि Military-Grade Encryption है तो इसका मतलब है कि इसका इस्तेमाल आर्मी में किया जाता है. लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है. बस इसे कई लोग मार्केटिंग स्ट्रेटजी के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं.

हालांकि, ये बाकी एनक्रिप्शन सिस्टम से थोड़ा एडवांस जरूर होता है जो आपके डेटा को एक्सट्रा कवरेज उपलब्ध कराता है और डेटा लीक जैसी समस्याओं से सुरक्षित रखता है.

कैसे काम करता है ये सिस्टम

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि ये एनक्रिप्शन सिस्टम किसी भी जानकारी को ऐसे कोड में बदल देता है जिसे बिना डिक्रिप्ट किए हुए नहीं पढ़ा जा सकता है. ये डेटा को कई छोटे-छोटे हिस्सों में करकर ऐसे कोड में बदल देता है जिसे कोई भी हैकर हैक न कर सके और आपकी जानकारी पूरी तरह से सुरक्षित रहे. वहीं, अगर कोई आपके डेटा को हासिल भी कर लेता है तो भी वह उसका कहीं भी इस्तेमाल नहीं कर पाएगा क्योंकि उसे डिकोड करना काफी ज्यादा मुश्किल होता है.

क्या इस सिस्टम को हैक किया जा सकता है

जानकारी के मुताबिक, अभी तक इस सिस्टम को कोई भी हैक नहीं कर पाया है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ इसे बेहद मजबूत एन्क्रिप्शन टेक्नोलॉजी मानते हैं. ये सिस्टम इनता मजबूत और एडवांस है इस बात का अंदाजा आप इससे भी लगा सकते हैं कि वैज्ञानिकों का मानना है कि इस सिस्टम को भविष्य में आने वाले क्वांटम कंप्यूटर भी नहीं तोड़ सकेंगे.

हालांकि, किसी सिस्टम की सुरक्षा केवल एन्क्रिप्शन एल्गोरिद्म पर निर्भर नहीं करती. अगर पासवर्ड कमजोर हो, सर्वर में कोई कमी हो या फिर किसी अन्य स्तर पर सुरक्षा कमजोर हो तो आपका डेटा खतरे में पड़ सकता है.

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स्मार्टफोन, गैजेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और इंटरनेट टेक्नोलॉजी की दुनिया में मेरा इंटरेस्ट काफी ज्यादा है. मैं यानी हिमांशु तिवारी, ABP LIVE में टेक और डिजिटल सेक्शन का हिस्सा हूं. मैं नई टेक्नोलॉजी को आसान और दिलचस्प अंदाज में पाठकों तक पहुंचाने का काम करता हूं. स्मार्टफोन लॉन्च, वायरल टेक ट्रेंड्स, AI अपडेट्स, सोशल मीडिया फीचर्स और साइबर फ्रॉड जैसे विषयों पर मेरी पकड़ मजबूत है.

टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों को सिर्फ जानकारी तक सीमित नहीं रखता, बल्कि उन्हें आम लोगों की जरूरत और रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़कर पेश करता हूं. खासतौर पर ऐसी खबरों पर काम करना पसंद करता हूं, जो लोगों के डिजिटल एक्सपीरियंस को सीधे प्रभावित करती हैं.

इसके अलावा मुझे नई टेक्नोलॉजी एक्सप्लोर करना, स्मार्टफोन फीचर्स को समझना और डिजिटल ट्रेंड्स पर रिसर्च करना पसंद है. मैं आसान भाषा और आकर्षक अंदाज में लिखने के लिए जाना जाता हूं, जिससे कठिन टेक्निकल बातें भी पाठकों के लिए समझना आसान हो जाती हैं. मैंने परास्नातक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से उत्तीर्ण की है.

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