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डिजिटल हुए भोले के भक्त, कांवड़ यात्रा में ब्लूटूथ स्पीकर और LED ही नहीं, अब साथ दिख रहे ये हाई-टेक स्मार्ट गैजेट्स

Tech Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा 2026 में स्मार्टवॉच, GPS ट्रैकर, पावर बैंक, नेक फैन, मसाजर और QR कोड जैसे स्मार्ट गैजेट्स दिखाई दे रहे हैं. जानें कैसे हाई-टेक हुई भोले के भक्तों की यात्रा.

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा में इस बार आस्था और आधुनिक तकनीक का अनोखा संगम दिखाई दे रहा है. युवा कांवड़ियों के बैग में पूजा सामग्री और कपड़ों के साथ पावर बैंक, स्मार्टवॉच, GPS ट्रैकर, पोर्टेबल फैन और मसाजर जैसे गैजेट्स भी नजर आ रहे हैं. वहीं AI कैमरे और ड्रोन से प्रशासन भी यात्रा पर हाई-टेक नजर रख रहा है.

हरिद्वार से निकलते कांवड़ियों के जत्थे. कंधों पर सजी रंग-बिरंगी कांवड़. चारों तरफ गूंजता ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’. कहीं LED लाइटों से सजी कांवड़ चमक रही है, तो कहीं बड़े ब्लूटूथ स्पीकर पर शिव भजन बज रहे हैं.

लेकिन कांवड़ यात्रा का डिजिटल बदलाव अब केवल DJ, स्पीकर और LED लाइट तक सीमित नहीं रह गया है.

सैकड़ों किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकले युवा कांवड़िए अब ऐसे स्मार्ट गैजेट्स भी अपने साथ रख रहे हैं, जो रास्ता खोजने, परिवार से संपर्क बनाए रखने, फोन चार्ज करने और थकान से राहत पाने में मदद कर सकें.

कांवड़ियों के बैग में हाई-कैपेसिटी पावर बैंक हैं. कलाई पर स्मार्टवॉच है. कुछ श्रद्धालु मोबाइल पर लाइव लोकेशन साझा करते हुए आगे बढ़ रहे हैं, तो कई समूह अपने सामान और कांवड़ की सुरक्षा के लिए पोर्टेबल ट्रैकर का सहारा ले रहे हैं.

कांवड़ यात्रा 2026 का यह बदलता स्वरूप बताता है कि भोले के भक्त अपनी परंपरा और संकल्प को निभाते हुए तकनीक को भी यात्रा का साथी बना रहे हैं.

 
 
 
 
 
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स्मार्टवॉच पर कदमों की गिनती, मोबाइल पर लाइव लोकेशन

लंबी कांवड़ यात्रा में साथियों से बिछड़ना सबसे बड़ी परेशानियों में से एक है. भारी भीड़, तेज संगीत और लगातार आगे बढ़ते जत्थों के बीच पीछे छूटे किसी सदस्य को तलाशना आसान नहीं होता.

युवा कांवड़िए इस समस्या से निपटने के लिए मोबाइल की लाइव लोकेशन और GPS आधारित सेवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं. कई श्रद्धालु यात्रा शुरू करने से पहले परिवार और समूह के दूसरे सदस्यों के साथ अपनी लाइव लोकेशन साझा कर रहे हैं.

कलाई पर बंधी स्मार्टवॉच भी यात्रा की डिजिटल साथी बन गई है. यह दिनभर चले कदमों, तय की गई दूरी, हृदय गति और खर्च हुई कैलोरी का अनुमान देती है. GPS सुविधा वाली कुछ स्मार्टवॉच रास्ते और गतिविधि को रिकॉर्ड करने में भी मदद करती हैं.

इससे कांवड़ियों को अंदाजा रहता है कि उन्होंने एक दिन में कितनी दूरी तय की और शरीर पर कितना दबाव पड़ा.

हालांकि, लाइव लोकेशन तभी काम करती है, जब फोन में इंटरनेट, बैटरी और लोकेशन सेवा चालू हो. इसलिए किसी भी श्रद्धालु को सुरक्षा के लिए केवल स्मार्टवॉच या GPS पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहिए.

कांवड़ और सामान पर लगाए जा रहे पोर्टेबल ट्रैकर

कुछ कांवड़ समूह केवल फोन की लोकेशन पर निर्भर रहने के बजाय अपने सामान, वाहन या कांवड़ के साथ छोटे पोर्टेबल ट्रैकर भी रख रहे हैं.

भीड़ में सामान पीछे छूटने या समूह से अलग हो जाने की स्थिति में ये डिवाइस उसकी संभावित लोकेशन खोजने में मदद कर सकते हैं. बड़े समूहों में यह सुविधा ज्यादा उपयोगी हो सकती है, क्योंकि अलग-अलग कांवड़िए अलग गति से चलते हैं.

हालांकि, सभी ट्रैकर एक तरह से काम नहीं करते. कुछ डिवाइस Bluetooth की सीमित दूरी में ही लोकेशन बता पाते हैं. वहीं दूर से रियल-टाइम लोकेशन दिखाने वाले GPS ट्रैकर को मोबाइल नेटवर्क, सक्रिय सिम और डेटा प्लान की आवश्यकता हो सकती है.

हर बैग में पावर बैंक, क्योंकि फोन बंद हुआ तो संपर्क भी बंद

GPS, कॉल, कैमरा, लाइव लोकेशन और Bluetooth लगातार चालू रहने से मोबाइल की बैटरी तेजी से खत्म होती है. वहीं कांवड़ मार्ग पर हर जगह सुरक्षित चार्जिंग प्वाइंट मिलना आसान नहीं है.

यही कारण है कि पावर बैंक युवा कांवड़ियों की सबसे जरूरी डिजिटल वस्तुओं में शामिल हो गया है.

10,000mAh और 20,000mAh के सामान्य पावर बैंक के साथ 30,000mAh से 50,000mAh क्षमता वाले बड़े पावर बैंक भी कांवड़ियों के बैग में दिखाई दे रहे हैं. इनसे एक ही समूह के कई सदस्य अपने मोबाइल, स्मार्टवॉच, Bluetooth स्पीकर और दूसरे रिचार्जेबल उपकरण चार्ज कर सकते हैं.

कांवड़ यात्रा के दौरान पावर बैंक की जरूरत को देखते हुए कुछ स्थानीय मोबाइल दुकानदार कांवड़ियों के लिए विशेष ऑफर भी निकाल रहे हैं.

बारिश के मौसम को देखते हुए कई श्रद्धालु पावर बैंक, फोन और चार्जिंग केबल को वाटरप्रूफ पाउच या प्लास्टिक कवर में सुरक्षित रख रहे हैं. गीले हाथों से चार्जर लगाने या भीगे हुए डिवाइस को चार्ज करने से शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा हो सकता है.

चार्जिंग प्वाइंट पर एक साथ लग रहे कई फोन

कांवड़ मार्ग के शिविरों और विश्राम स्थलों पर खाने-पीने और चिकित्सा सुविधा के साथ मोबाइल चार्जिंग की जरूरत भी बढ़ गई है. सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में एक साथ कई मोबाइल फोन चार्ज होते दिखाई दे रहे हैं.

यह दृश्य बताता है कि लंबी यात्रा में मोबाइल अब केवल तस्वीरें खींचने का साधन नहीं है. फोन परिवार से संपर्क, डिजिटल पेमेंट, नक्शा देखने, मौसम की जानकारी और आपात स्थिति में मदद मांगने का माध्यम भी बन चुका है.

चार्जिंग बैग भी बन रहा यात्रा का साथी

सामान्य पावर बैंक के अलावा कुछ श्रद्धालु बड़ी क्षमता वाला चार्जिंग बैग या अतिरिक्त बैटरी बैकअप भी लेकर चल रहे हैं.

ऐसे बैग में पावर बैंक, अलग-अलग चार्जिंग केबल और मोबाइल सुरक्षित रखने के लिए अलग जगह बनाई जाती है. समूह में यात्रा करने वाले कांवड़ियों के लिए यह व्यवस्था उपयोगी हो सकती है, क्योंकि एक ही बैकअप से कई उपकरण चार्ज किए जा सकते हैं.

सोलर पैनल से रास्ते में बिजली बनाने का प्रयोग

कांवड़ यात्रा के कुछ हाई-टेक प्रयोग सबसे ज्यादा ध्यान खींच रहे हैं. इनमें छोटे पोर्टेबल सोलर पैनल भी शामिल हैं.

कांवड़ या सामान रखने वाली ट्रॉली के ऊपरी हिस्से पर हल्का सोलर पैनल लगाकर पावर बैंक चार्ज किया जा सकता है. इससे मोबाइल, LED लाइट और कम ऊर्जा लेने वाले दूसरे उपकरणों के लिए सीमित बिजली मिल सकती है.

हालांकि, छोटे सोलर पैनल की क्षमता मौसम, धूप, पैनल के आकार और उसकी गुणवत्ता पर निर्भर करती है. सावन की बारिश या बादल छाए रहने पर इनसे तेज चार्जिंग की उम्मीद नहीं की जा सकती. इसलिए सोलर पैनल को सामान्य चार्जर का विकल्प नहीं, बल्कि अतिरिक्त बैकअप के रूप में देखा जा रहा है.

थकान के बीच पोर्टेबल मसाजर बने नए साथी

दिनभर पैदल चलने के बाद कांवड़ शिविरों का नजारा भी बदल रहा है. पहले जहां तेल मालिश और गर्म पानी से पैरों की थकान कम की जाती थी, वहीं अब कुछ युवा कांवड़िए कॉम्पैक्ट बॉडी मसाजर और मिनी मसाज गन का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं.

विश्राम के दौरान इनका इस्तेमाल पिंडलियों, जांघों और पीठ की मांसपेशियों पर किया जा रहा है. बैटरी से चलने वाले ये उपकरण आकार में छोटे होते हैं और आसानी से बैग में रखे जा सकते हैं.

लेकिन मसाज गन को दर्द का इलाज मानना सही नहीं है. पैर में सूजन, चोट, तेज दर्द, सुन्नपन या छाले होने पर इसका इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसी स्थिति में नजदीकी चिकित्सा शिविर की सहायता लेना ज्यादा सुरक्षित है.

उमस से राहत के लिए गले में नेक फैन

सावन में बारिश के साथ भारी उमस भी कांवड़ियों की परीक्षा लेती है. दोपहर में धूप निकलने पर सड़क की गर्मी और लगातार पैदल चलने से पैदा हुई थकान परेशानी बढ़ा सकती है.

इससे निपटने के लिए कुछ युवा श्रद्धालु गले में हेडफोन जैसा दिखाई देने वाला रिचार्जेबल नेक फैन पहन रहे हैं. यह चेहरे और गर्दन के आसपास हवा देता है और दोनों हाथ खाली रखता है. इसके अलावा हाथ में पकड़े जाने वाले छोटे USB फैन भी इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

नेक फैन उमस में कुछ राहत दे सकता है, लेकिन यह डिहाइड्रेशन, लू या शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ने से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता.

कांवड़ियों के लिए पर्याप्त पानी पीना, तेज धूप में विश्राम करना और चक्कर, सिरदर्द या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है.

स्मार्ट शूज और ऑर्थोपेडिक जेल इनसोल का सहारा

कांवड़ यात्रा का सबसे ज्यादा दबाव पैरों पर पड़ता है. लगातार पैदल चलने के कारण एड़ी, पंजे, घुटनों और पिंडलियों में दर्द होना आम समस्या है.

कई श्रद्धालु अपने धार्मिक संकल्प के कारण नंगे पैर चलते हैं, जबकि कुछ आरामदायक जूते या चप्पल पहनते हैं. फुटवियर पहनने वाले युवाओं में कुशन वाले जूते और ऑर्थोपेडिक जेल इनसोल का इस्तेमाल दिखाई दे रहा है.

ये इनसोल पैरों के नीचे पड़ने वाले झटके को कम करने और एड़ी को अतिरिक्त सपोर्ट देने में मदद कर सकते हैं.

कुछ आधुनिक स्मार्ट शूज में स्टेप काउंटर और प्रेशर सेंसर जैसी सुविधाएं भी होती हैं. ये तय की गई दूरी और पैर के अलग-अलग हिस्सों पर पड़ने वाले दबाव का डेटा मोबाइल ऐप पर दिखा सकते हैं.

हालांकि, सेंसर वाले स्मार्ट शूज अभी आम कांवड़ियों के बजाय तकनीक पसंद करने वाले चुनिंदा युवाओं तक सीमित नजर आते हैं.

QR कोड स्कैन करते ही मिल रही डिजिटल सहायता

कांवड़ यात्रा में डिजिटल बदलाव केवल GPS और पावर बैंक तक सीमित नहीं है. कुछ स्थानों पर QR कोड आधारित व्यवस्था के माध्यम से श्रद्धालुओं को जरूरी जानकारी और सहायता उपलब्ध कराने की पहल भी सामने आई है.

QR कोड स्कैन कर कांवड़ मार्ग, पुलिस सहायता, स्वास्थ्य सुविधा, कंट्रोल रूम या अन्य जरूरी जानकारी तक पहुंच आसान बनाई जा सकती है.

डिजिटल सहायता उपयोगी हो सकती है, लेकिन अज्ञात QR कोड स्कैन करते समय सावधानी बरतना भी जरूरी है. किसी अनजान लिंक पर बैंकिंग, UPI PIN, OTP या व्यक्तिगत जानकारी दर्ज नहीं करनी चाहिए.

कांवड़िए ही नहीं, प्रशासन की निगरानी भी हुई हाई-टेक

कांवड़ यात्रा का हाई-टेक स्वरूप केवल श्रद्धालुओं के गैजेट्स तक सीमित नहीं है. इस बार प्रशासन भी AI कैमरे, CCTV, ड्रोन और डिजिटल कंट्रोल रूम के माध्यम से कांवड़ मार्ग पर निगरानी रख रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा में करीब 334 किलोमीटर लंबे कांवड़ मार्ग की निगरानी के लिए 3,000 से अधिक CCTV कैमरे और 30 टेथर्ड ड्रोन लगाए गए हैं. करीब 2,500 पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ AI आधारित कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है.

ये AI कैमरे कांवड़ियों की संख्या का अनुमान लगाने और संदिग्ध गतिविधि दिखाई देने पर पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजने में सहायता कर सकते हैं.

इस डिजिटल निगरानी का उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना, यातायात व्यवस्था बनाए रखना और किसी आपात स्थिति में तेजी से कार्रवाई करना है.

 
 
 
 
 
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भक्ति का भाव वही, केवल यात्रा के साधन बदले

कांवड़ यात्रा मूल रूप से आस्था, तप, अनुशासन और भगवान शिव के प्रति समर्पण की यात्रा है. आधुनिक गैजेट्स इस धार्मिक भावना का स्थान नहीं ले सकते, लेकिन लंबी यात्रा में संपर्क, सुविधा और सुरक्षा का अतिरिक्त साधन जरूर बन सकते हैं.

पावर बैंक फोन को चालू रख रहा है. GPS बिछड़े साथियों तक पहुंचने में मदद कर रहा है. स्मार्टवॉच शरीर की गतिविधि का अनुमान दे रही है. वहीं ड्रोन, CCTV और AI कैमरे पूरे कांवड़ मार्ग पर निगरानी रख रहे हैं.

कंधे पर कांवड़ और कलाई पर स्मार्टवॉच का यह दृश्य बदलते भारत की तस्वीर पेश करता है. यहां परंपरा और तकनीक एक-दूसरे के विरोध में नहीं, बल्कि आस्था के लंबे मार्ग पर साथ-साथ आगे बढ़ती दिखाई दे रही हैं.

FAQ

कांवड़ यात्रा में कौन से स्मार्ट गैजेट्स इस्तेमाल किए जा रहे हैं?

स्मार्टवॉच, पावर बैंक, GPS ट्रैकर, पोर्टेबल फैन, मोबाइल चार्जिंग बैग और कुछ स्थानों पर QR आधारित डिजिटल सुविधाओं का इस्तेमाल दिखाई दे रहा है.

कांवड़ यात्रा में पावर बैंक क्यों जरूरी है?

लाइव लोकेशन, GPS, कॉल, कैमरा और Bluetooth चलने से मोबाइल की बैटरी जल्दी खत्म होती है. पावर बैंक फोन को चालू रखने में मदद करता है.

क्या स्मार्टवॉच से कांवड़ियों की लाइव लोकेशन देखी जा सकती है?

संगत फोन, इंटरनेट और लोकेशन शेयरिंग चालू होने पर कुछ स्मार्टवॉच और मोबाइल ऐप के माध्यम से लोकेशन साझा की जा सकती है.

कांवड़ मार्ग पर AI कैमरे क्यों लगाए गए हैं?

AI कैमरों का इस्तेमाल भीड़ का अनुमान लगाने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजने में किया जा सकता है.

कांवड़ यात्रा में QR कोड किस काम आता है?

अधिकृत QR कोड के माध्यम से मार्ग, पुलिस सहायता, चिकित्सा सुविधा और कंट्रोल रूम से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई जा सकती है.

यह भी पढ़ें- कांवड़ यात्रा से लौटते ही शारीरिक संबंध बनाना सही या गलत? जानें शास्त्रों का नियम और बड़ा कारण

Disclaimer: यहां मुहैया सूचना सिर्फ मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. यहां यह बताना जरूरी है कि ABPLive.com किसी भी तरह की मान्यता, जानकारी की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें.

About the author Hirdesh Kumar Singh

हृदेश कुमार सिंह, Senior Vedic Astrologer | Astro Media Editor | Digital Strategy Leader

"ज्योतिष केवल भविष्य बताने की विद्या नहीं, बल्कि समय को समझने की कला है."

हृदेश कुमार सिंह लंबे समय से ज्योतिष, धर्म, अध्यात्म और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में सक्रिय हैं. वे उन चुनिंदा लोगों में माने जाते हैं जिन्होंने पारंपरिक ज्योतिष को आज की बदलती दुनिया, डिजिटल संस्कृति और नई पीढ़ी की सोच से जोड़ने का प्रयास किया है. उनके लिए ज्योतिष केवल ग्रहों की गणना नहीं, बल्कि मानव व्यवहार, सही समय और जीवन के निर्णयों को समझने का माध्यम है.

वर्तमान में वे ABP Live में Astro, Religion और Dharma LIVE से जुड़े कंटेंट और डिजिटल रणनीति का नेतृत्व कर रहे हैं. यहां उनका फोकस ज्योतिष और धर्म को ऐसे रूप में प्रस्तुत करना है, जो आज के पाठकों और दर्शकों की जिंदगी से सीधे जुड़ सके. यही कारण है कि उनके लेखन और विश्लेषण में केवल पारंपरिक बातें नहीं, बल्कि करियर, रिश्ते, मानसिक तनाव, सामाजिक बदलाव, तकनीक और बदलती जीवनशैली जैसे विषय भी दिखाई देते हैं.

उन्होंने Indian Institute of Mass Communication (IIMC), New Delhi से पत्रकारिता और IIMT University Meerut से ज्योतिष शास्त्र व वास्तु शास्त्र की पढ़ाई की है और Astrosage व Astrotalk जैसे प्लेटफॉर्म्स के साथ भी काम किया है. मीडिया, ऑडियंस बिहेवियर, डिजिटल पब्लिशिंग और कंटेंट रणनीति की समझ ने उनके काम को अलग पहचान दी है.

हृदेश कुमार सिंह के कई ज्योतिषीय और सामाजिक विश्लेषण समय-समय पर चर्चा में रहे हैं. राजनीति, शेयर बाजार, मनोरंजन जगत, AI और बदलते सामाजिक माहौल जैसे विषयों पर उनके आकलनों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया है. वर्तमान में CJP आंदोलन को लेकर उनकी भविष्यवाणियां सत्य साबित हुईं हैं, उनके विश्लेषण वैदिक गणना, गोचर, मेदिनी ज्योतिष और समाज की बदलती मानसिकता की समझ पर आधारित होते हैं.

वे वैदिक ज्योतिष, होरा शास्त्र, संहिता, मेदिनी ज्योतिष, अंक ज्योतिष, शकुन शास्त्र और वास्तु शास्त्र जैसे विषयों पर अध्ययन और लेखन करते रहे हैं. करियर, विवाह, व्यापार, शिक्षा और जीवन के महत्वपूर्ण फैसलों से जुड़े विषयों पर वे पारंपरिक ज्योतिष को आधुनिक जीवन की वास्तविक परिस्थितियों से जोड़कर देखने का प्रयास करते हैं.

डिजिटल दौर में ज्योतिष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए उन्होंने 'Gen-Z Horoscope' जैसे कॉन्सेप्ट पर भी काम किया, जिसमें राशिफल को केवल भाग्य या डर से जोड़कर नहीं, बल्कि career pressure, relationship confusion, emotional wellbeing और real-life decision making जैसी बातों से जोड़ा गया.

उनका मानना है कि आज के समय में सबसे बड़ी चुनौती जानकारी की कमी नहीं, बल्कि सही समझ की कमी है. वे ज्योतिष को ऐसा माध्यम मानते हैं, जो व्यक्ति को डराने के बजाय उसे बेहतर निर्णय लेने और खुद को समझने में मदद कर सकता है.

श्रीमद्भगवद्गीता के कर्म सिद्धांत, भगवान बुद्ध के संतुलन के विचार, सूफी चिंतन और आधुनिक मनोविज्ञान से प्रभावित उनकी सोच उनके लेखन में भी दिखाई देती है. यही वजह है कि उनका काम केवल भविष्यवाणी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लोगों को सोचने और अपने जीवन को नए नजरिए से देखने के लिए प्रेरित करता है.

ज्योतिष और मीडिया के अलावा उन्हें सिनेमा, संगीत, साहित्य, राजनीति, बाजार, पर्यावरण, ग्रामीण जीवन और यात्राओं में विशेष रुचि है. इन अनुभवों का असर उनके विषय चयन और लेखन शैली में साफ दिखाई देता है.

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