Manus AI क्या है और Meta इसे क्यों खरीदना चाहती है? 5 बड़े पॉइंट्स में जानिए पूरी अंदर की कहानी
What is Manus AI: Meta अब सिर्फ चैटबॉट या इमेज जनरेशन तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी का फोकस ऐसे AI सिस्टम पर है जो खुद से योजना बना सकें, फैसले लें और पूरे काम को बिना इंसानी दखल के पूरा करें.

What is Manus AI: Meta अब सिर्फ चैटबॉट या इमेज जनरेशन तक सीमित नहीं रहना चाहती. कंपनी का फोकस ऐसे AI सिस्टम पर है जो खुद से योजना बना सकें, फैसले लें और पूरे काम को बिना इंसानी दखल के पूरा करें. इसी दिशा में Meta ने चुपचाप एक बड़ा कदम उठाया है और तेजी से उभर रही AI स्टार्टअप Manus को अपने साथ जोड़ लिया है. ऐसे समय में जब कंपनियां ऐसे AI की तलाश में हैं जो केवल जवाब न दे बल्कि पूरा काम संभाले, यह डील काफी अहम मानी जा रही है.
Meta ने Manus को क्यों चुना?
Meta के लिए यह अधिग्रहण उसकी लंबी AI रणनीति का हिस्सा है. कंपनी अपने ऐप्स, बिजनेस टूल्स और Meta AI असिस्टेंट में एडवांस ऑटोमेशन को तेजी से शामिल करना चाहती है. भले ही सौदे की रकम सार्वजनिक नहीं की गई हो लेकिन संकेत साफ हैं कि Meta वास्तविक दुनिया में काम आने वाले AI एजेंट्स को बड़े स्तर पर विकसित करना चाहती है.
आखिर Manus AI है क्या?
Manus ऐसे AI एजेंट्स बनाती है जो जटिल और कई चरणों वाले काम खुद से कर सकते हैं. ये एजेंट मार्केट रिसर्च करना, कोड लिखना और सुधारना, साथ ही बड़े डेटा का विश्लेषण करने में सक्षम हैं. इसी साल Manus तब चर्चा में आई थी जब उसने दावा किया कि उसका प्रमुख AI एजेंट कुछ मामलों में OpenAI के DeepResearch से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. इसी दावे ने इसे वैश्विक AI दुनिया में तेजी से पहचान दिलाई.
तेज ग्रोथ ने खींचा Meta का ध्यान
हालांकि Manus एक नई कंपनी है लेकिन इसकी बढ़त चौंकाने वाली रही है. कंपनी के मुताबिक लॉन्च के महज आठ महीनों में उसका सालाना औसत रेवेन्यू 100 मिलियन डॉलर के पार पहुंच गया था और रन रेट 125 मिलियन डॉलर से भी ज्यादा था. फ्री और पेड सब्सक्रिप्शन मॉडल के जरिए यह पहले ही दुनियाभर में लाखों यूजर्स और बिजनेस को अपनी सेवाएं दे रही है जो Meta के लिए एक मजबूत आधार साबित हो सकता है.
चीन से सिंगापुर तक का सफर और बड़े निवेशक
Manus की कहानी भी उतनी ही दिलचस्प है. इसकी शुरुआत चीन की स्टार्टअप Butterfly Effect जिसे Monica.im के नाम से भी जाना जाता है के हिस्से के तौर पर हुई थी. बाद में यह अलग कंपनी बनी और वैश्विक विस्तार के लिए अपना मुख्यालय सिंगापुर शिफ्ट कर लिया. कंपनी ने Benchmark की अगुआई में 75 मिलियन डॉलर की सीरीज-B फंडिंग जुटाई है और इसे Tencent व HongShan Capital Group जैसे बड़े नामों का समर्थन मिला है. इसके अलावा, Alibaba की Qwen AI टीम के साथ इसकी साझेदारी भी रही है.
डील के बाद क्या बदलेगा और क्या नहीं?
Meta का कहना है कि इस डील के बाद Manus की सब्सक्रिप्शन सर्विस पहले की तरह चलती रहेगी. कंपनी के कर्मचारी अब Meta की AI टीम का हिस्सा बनेंगे. Manus के सीईओ शाओ होंग के अनुसार, Meta से जुड़ने से कंपनी को एक स्थिर प्लेटफॉर्म मिलेगा, जबकि प्रोडक्ट के काम करने के तरीके और फैसलों की स्वतंत्रता में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा. Meta के लिए यह अधिग्रहण न सिर्फ टेक्नोलॉजी, बल्कि टैलेंट के लिहाज से भी उसकी AI योजनाओं को और मजबूत करेगा.
यह भी पढ़ें:
WiFi राउटर का USB पोर्ट कहीं आपकी जासूसी तो नहीं कर रहा? इस्तेमाल से पहले जान लें छुपे खतरे
टॉप हेडलाइंस
Source: IOCL





















