Kill Switch Technology: अब चोरी हुए फोन हो जाएंगे पूरी तरह बेकार, यूके में लॉन्च हुआ नया 'किल स्विच' सिस्टम
Kill Switch Technology: यूके में Virgin Media O2 और VodafoneThree ने नया किल स्विच सिस्टम लॉन्च किया है, जो दुकानों से चोरी हुए नए स्मार्टफोन्स को रिमोट तरीके से पूरी तरह बेकार बना देगा.

Kill Switch Technology: अक्सर कई लोगों की शिकायत होती है कि उनका फोन चोरी हो गया. इससे फोन का मालिक घबरा जाता है कि उसके सारे डॉक्यूमेंट्स और फोटोग्राफ उसी फोन में थे. कहीं उनके डॉक्यूमेंट्स और फोटोग्राफ या फिर उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स का मिसयूज न कर लिया जाए. इस परेशानी को देखते हुए यूके की दो सबसे बड़ी मोबाइल नेटवर्क कंपनियों Virgin Media O2 और VodafoneThree ने एक नई 'किल स्विच' टेक्नोलॉजी लॉन्च की है. यह सिस्टम दुकानों से चोरी होने वाले स्मार्टफोन्स को पूरी तरह बेकार बना देना.
फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह कदम तब उठाया गया जब Apple और Samsung जैसी बड़ी मोबाइल बनाने वाली कंपनियों ने एक यूनिवर्सल एंटी-थेफ्ट लॉक सिस्टम बनाने से इनकार कर दिया. यानी जब फोन बनाने वाली कंपनियां खुद कोई साझा सुरक्षा फीचर नहीं लाईं, तो नेटवर्क कंपनियों ने अपने लेवल पर ही इसकी जिम्मेदारी उठा ली.
यह भी पढ़ेंः Bluetooth Battery Usage: हर टाइम फोन में Bluetooth ऑन रखने से कितनी बैटरी खत्म होती है, जान लीजिए जवाब?
बढ़ते मोबाइल चोरी के मामलों को रोकना है मकसद
दरअसल इस टेक्नोलॉजी को लाने का बस एक ही मकसद है, वह है मोबाइल चोरी के बढ़ते मामले. रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ लंदन शहर में ही पिछले साल 70,000 से ज्यादा लोग फोन चोरी का शिकार बने. अब बात करते हैं कि यह "किल स्विच" टेक्नोलॉजी असल में काम कैसे करती है. ऐसे में आपको बता दें कि यह सुरक्षा फीचर बहुत सख्त नियमों के तहत काम करता है, ताकि दुकानों पर चोरी करने से रोका जा सके. सबसे अहम बात यह है कि यह सिस्टम सिर्फ उन्हीं नए फोन्स पर लागू होता है जो अभी तक किसी ग्राहक को बेचे नहीं गए हैं, यानी दुकान में रखे नए और बिना बिके फोन ही इसके दायरे में आते हैं. जैसे ही ऐसा कोई फोन दुकान से चोरी होता है और कोई उसे ऑन करता है, वह फोन अपने आप पहचान में आ जाता है और एक खास डेटाबेस में दर्ज हो जाता है, जिसे फोन बनाने वाली कंपनी खुद चलाती है.
ऐसे पूरी तरह बेकार हो जाएगा चोरी का फोन
एक बार जब चोरी हुआ फोन इस डेटाबेस से पहचान लिया जाता है, तो उस पर रिमोट तरीके से एक खास कमांड भेजी जाती है. जिससे वह फोन पूरी तरह बेकार हो जाता है और दोबारा इस्तेमाल के लायक नहीं रहता. हालांकि, एक जरूरी बात यह भी जानना जरूरी है कि यह सिस्टम सिर्फ उन फोनों पर लागू होता है जो अभी कानूनी तौर पर दुकान की प्रॉपर्टी होते हैं. अगर कोई फोन एक बार सही तरीके से खरीदा जा चुका है, तो टेलीकॉम कंपनियां उस फोन को बंद नहीं कर सकती हैं, क्योंकि उस फोन का मालिकाना हक अब नेटवर्क प्रोवाइडर के पास नहीं बल्कि उस ग्राहक के पास होता है जिसने उसे खरीदा है.
यह भी पढ़ेंः Wired या Wireless Security Camera? कौन है ज्यादा सुरक्षित और किसे खरीदने में है आपका फायदा

























