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TECH EXPLAINED: AI से भी आगे खतरा! ये 5 टेक ट्रेंड आपकी जेब खाली करेंगे और हकीकत पर सवाल खड़े कर देंगे

AI in 2026: हाल ही में एक दोस्त के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर लंबी बहस हो गई.

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AI in 2026: हाल ही में एक दोस्त के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर लंबी बहस हो गई. वह भावनात्मक होकर AI को इंसानों का सबसे बड़ा दुश्मन बता रहा था लेकिन मैंने किसी पक्ष का समर्थन करने के बजाय तथ्यों के आधार पर बात रखी. सच यह है कि AI अब कोई भविष्य की चीज़ नहीं रही. पिछले साल की शुरुआत में ही साफ़ दिखने लगा था कि AI हर जगह होगा और वैसा ही हुआ.

एक टेक जर्नलिस्ट होने के नाते ट्रेंड्स को देखना, उनके असर को समझना और आगे की तस्वीर का अनुमान लगाना मेरे काम का हिस्सा है. मेरा मकसद आपको कोई प्रोडक्ट बेचना नहीं है वो काम सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और यूट्यूबर बखूबी कर रहे हैं. लेकिन यह समझना ज़रूरी है कि अगर 2025 को AI ने परिभाषित किया तो आने वाला समय उससे भी ज़्यादा निर्णायक और चौंकाने वाला हो सकता है.

सिर्फ एक ट्रेंड नहीं कई बदलाव एक साथ

2026 किसी एक बड़ी टेक क्रांति का साल नहीं होगा. यह अलग-अलग विचारों और प्रयोगों का मिश्रण होगा. कुछ सफल होंगे, कुछ नहीं, लेकिन जो टिकेंगे वही पर्सनल टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया की दिशा तय करेंगे. इन बदलावों का सीधा असर आपकी जेब और आपकी सोच दोनों पर पड़ेगा.

सोशल मीडिया पर AI वीडियो अब रुकने वाले नहीं

कुछ दिन पहले इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए मेरी नज़र एक वीडियो पर पड़ी जिसमें दो छोटे बच्चे मज़ाकिया अंदाज में बातचीत कर रहे थे और उन्हें गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड की तरह दिखाया गया था. ऐसे वीडियो भारत में तेज़ी से वायरल होते हैं. मैंने कई क्लिप्स देखीं, लेकिन काफी देर बाद समझ आया कि ये असली नहीं बल्कि AI से बने हुए वीडियो थे.

अब मेरे फीड में कार्टून जैसे बिल्लियों के डांस वीडियो, नकली जानवरों के क्लिप्स और पूरी तरह AI-जनरेटेड कंटेंट भरा पड़ा है. पहले मैं असली शेर के बच्चों के वीडियो देखने के लिए इंस्टाग्राम खोलता था अब उनके AI वर्ज़न भी मौजूद हैं मज़ेदार जरूर, लेकिन भ्रम पैदा करने वाले.

जब खुद प्लेटफॉर्म और OpenAI जैसे टूल्स मिनटों में किसी भी तरह का वीडियो बनाने की सुविधा दे रहे हों, तो आम यूज़र के लिए असली और नकली में फर्क करना बेहद मुश्किल हो जाएगा. भारत में तो ज़्यादातर ऐसे वीडियो पर कोई चेतावनी तक नहीं होती. यही वो जगह है जहाँ ‘हकीकत’ की परिभाषा धुंधली होने लगती है.

असल सवाल यह नहीं रहेगा कि आप सच पहचान पा रहे हैं या नहीं, बल्कि यह कि AI वीडियो हमारे रिश्तों, भरोसे और दुनिया को देखने के नजरिए को कैसे बदल देंगे.

स्मार्टफोन और लैपटॉप होंगे और महंगे

साल की शुरुआत में ही संकेत मिलने लगे हैं कि स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमतें बढ़ने वाली हैं और यह बढ़ोतरी अस्थायी नहीं होगी. आज भी एक आम स्मार्टफोन कई लोगों की महीने की कमाई के बराबर कीमत पर आता है. भले ही EMI का सहारा हो लेकिन कुल खर्च कम नहीं होता.

इसकी सबसे बड़ी वजह है मेमोरी चिप्स की कमी. खासकर DRAM की, जिसकी ज़रूरत AI डेटा सेंटर्स और स्मार्टफोन दोनों को होती है. मांग सप्लाई से ज़्यादा हो चुकी है जिससे चिप्स की कीमतें तेज़ी से बढ़ी हैं. बड़ी कंपनियाँ पहले AI और डेटा सेंटर्स को सप्लाई दे रही हैं क्योंकि वहाँ पैसा ज़्यादा है.

इसका असर यह होगा कि नए स्मार्टफोन, खासकर बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में, और महंगे होंगे या फिर कम RAM के साथ आएंगे. गेमिंग लैपटॉप्स जैसे मेमोरी-हेवी डिवाइसेज़ की कीमतें भी बढ़ सकती हैं.

आपकी आंखों पर चढ़ने आ रहे हैं स्मार्ट ग्लासेस

अब ऐप्स, कैमरा लेंस और फोन की मोटाई की बहस से आगे बढ़ने का समय आ गया है. टेक कंपनियों की नज़र अब सीधे आपके चेहरे पर है स्मार्ट ग्लासेस के ज़रिए.

मिक्स्ड रियलिटी हेडसेट भले ही अब तक आम न हुए हों, लेकिन स्मार्ट ग्लासेस को लेकर कंपनियाँ पूरी तरह गंभीर हैं. छोटे डिस्प्ले, AI फीचर्स, कैमरा, ऑडियो-ओनली डिजाइन हर तरह के विकल्प अलग-अलग कीमतों में आने वाले हैं.

Meta ने Ray-Ban और Oakley स्मार्ट ग्लासेस के ज़रिए दिखा दिया है कि भले ही मार्केट छोटा हो, लेकिन मौजूद है. आने वाले समय में स्मार्ट ग्लासेस आपके ईयरबड्स या स्मार्टवॉच की तरह फोन के साथी बन सकते हैं. हालांकि अभी स्मार्टफोन की जगह लेने में वक्त लगेगा.

आज की तारीख में स्मार्ट ग्लासेस उसी दौर में हैं, जहाँ कभी फीचर फोन हुआ करते थे.

घरों में दस्तक देंगे रोबोट

यह थोड़ा भविष्यवादी लग सकता है, लेकिन इस बार एलन मस्क की बातों में दम नज़र आता है. इंसानों जैसे दिखने वाले रोबोट भले ही अभी आम न हों, लेकिन उन पर काम तेज़ी से हो रहा है.

सिलिकॉन वैली और यूरोप की कई स्टार्टअप्स घरेलू रोबोट्स पर प्रयोग कर रही हैं. मकसद ऐसे AI-पावर्ड रोबोट बनाना है, जो कैमरा और विज़न सिस्टम की मदद से घर में घूम सकें, रास्ता समझ सकें और काम कर सकें.

2026 की शुरुआत में होने वाले CES जैसे टेक इवेंट्स में बड़े ब्रांड्स अपने होम रोबोट प्लान्स दिखा सकते हैं. Apple भी कथित तौर पर एक AI-आधारित रोबोटिक डिवाइस पर काम कर रहा है.

फोल्डेबल फोन को मिल सकता है दूसरा मौका

फोल्डेबल फोन दिलचस्प ज़रूर हैं, लेकिन अब तक वे खुद को पूरी तरह साबित नहीं कर पाए हैं. समस्या हार्डवेयर से ज़्यादा सॉफ्टवेयर की है. बड़ी स्क्रीन का सही इस्तेमाल अब भी अधूरा लगता है.

उम्मीदें अब Apple से जुड़ गई हैं. अगर कंपनी फोल्डेबल iPhone लाती है और iOS व iPadOS के बेहतरीन फीचर्स को जोड़ देती है, तो यह कैटेगरी को नई दिशा दे सकती है. बेहतर मल्टीटास्किंग, डेस्कटॉप-ग्रेड ऐप्स और सही UI ही फोल्डेबल्स को वाकई उपयोगी बना सकते हैं.

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