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बिना ऑफिस चलता है Telegram का पूरा कारोबार, जानिए कैसे होती है कमाई

Telegram Business: कई लोगों के लिए यह हैरानी की बात हो सकती है कि टेलीग्राम में सिर्फ 30 कर्मचारी काम करते हैं और इनके लिए भी कोई सेंट्रल ऑफिस नहीं है.

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  • टेलीग्राम के 1 अरब यूजर्स को सिर्फ 30 कर्मचारी संभालते हैं।
  • कर्मचारी दुनिया भर से रिमोट काम करते, दुबई मुख्यालय है।
  • ऑटोमेशन, बॉट्स और क्लाउड से बड़ा यूजरबेस आसानी से संभलता।
  • पब्लिक चैनल, प्रीमियम प्लान, स्पॉन्सर्ड मैसेज से राजस्व कमाते हैं।

Telegram Business: दुनियाभर में मंथली एक्टिव यूजर्स की संख्या एक अरब. भारत में कुल यूजर्स 15 करोड़ से ऊपर. इन सब को हैंडल करने के लिए Telegram के कर्मचारी किसी एक जगह ऑफिस में बैठकर काम नहीं करते हैं. अरबों यूजर्स वाले इस प्लेटफॉर्म के बारे में ज्यादातर लोगों को लगता होगा कि हजारों कर्मचारी किसी बड़े ऑफिस में बैठकर काम करते होंगे, लेकिन टेलीग्राम के मामले में ऐसा कुछ नहीं है. इस पूरी कंपनी में सिर्फ 30 कर्मचारी काम करते हैं. इसका ऑपरेशनल हेडक्वार्टर दुबई में है, लेकिन कर्मचारियों के लिए न तो कोई सेंट्रल ऑफिस है और न ही कोई HR. सभी इंजीनियर टेलीग्राम के फाउंडर पावेल दुरोव को रिपोर्ट करते हैं. 

कैसे चलता है टेलीग्राम का बिजनेस?

भारत सरकार ने कुछ दिन पहले टेलीग्राम पर टेंपरेरी बैन लगा दिया था. इसके बाद यह प्लेटफॉर्म खूब चर्चा में रहा है और लोग इसके बारे में सबकुछ जानना चाहते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस कंपनी में कुल 30 कर्मचारी काम करते हैं. इन 30 पर ही करोड़ों यूजर्स को हैंडल करने की जिम्मेदारी है. खास बात यह भी है कि ये कर्मचारी किसी एक जगह ऑफिस में बैठकर काम नहीं करते. टेलीग्राम में रिमोट वर्क कल्चर है, जिस कारण टेलीग्राम में नौकरी करने वाले इंजीनियर दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से काम कर रहे हैं.

30 लोग करोड़ों यूजर्स को कैसे हैंडल करते हैं?

कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि 30 लोग दुनियाभर के अरबों यूजर्स को कैसे हैंडल करते हैं. इसका जवाब है कि ये 30 इंजीनियर ऑटोमेशन, बॉट्स और एडवांस्ड इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से इस प्लेटफॉर्म को संभाल रहे हैं. टेलीग्राम में मॉडरेशन, सपोर्ट और सर्वर मैंटेनेस के लिए बॉट्स और ऑटोमेशन आदि का यूज किया जाता है. इसका पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर क्लाउड बेस्ड है, जिस कारण कुछ ही इंजीनियर के लिए बड़ी संख्या में यूजर को हैंडल करना आसान हो जाता है. छोटी टीम होने के कम लागत जैसे कई फायदे भी हैं, लेकिन यह नुकसान से भी अछूती नहीं है. छोटी टीम के कारण टेलीग्राम की कंटेट मॉडरेशन प्रैक्टिस अकसर विवादों के घेरे में रहती है.

कैसे कमाई करता है टेलीग्राम?

टेलीग्राम की कमाई का तरीका भी थोड़ा अलग है. यह प्राइवेट चैट, ग्रुप्स या मैसेज को मॉनेटाइज न कर पब्लिक ब्रॉडकास्ट चैनल को मॉनेटाइज करता है. इसके अलावा कंपनी प्रीमियम प्लान से भी रेवेन्यू जनरेट करती है. अगर एड प्रोडक्ट की बात करें तो स्पॉन्सर्ड मैसेज के जरिए कंपनी 1,000 सब्सक्राइबर वाले पब्लिक चैनल में एड दिखाने का मौका देती है. यह एड भी सिर्फ फ्री यूजर्स को नजर आएगी. इसके साथ कंपनी ने बिल्ट-इन बॉट्स, मिनी गेम्स और थर्ड-पार्टी ऐप्स के साथ एक डिजिटल इकोसिस्टम क्रिएट किया है. इसमें यूजर टेलीग्राम स्टार खरीदकर उनसे टेलीग्राम पर मौजूद कंटेट, सर्विसेस और गुड्स को खरीद सकता है. टेलीग्राम को इससे कमीशन मिलता है. इसके अलावा कंपनी एंटरप्राइजेज से API एक्सेस आदि देकर पैसा कमाती है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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