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बारिश के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन क्यों कम हो जाती है, इससे कितना नुकसान?

Farming News: बारिश के बाद खेतों में नाइट्रोजन अचानक गायब क्यों हो जाती है और क्या वाकई फसल का पीलापन इसी की वजह से है? जानिए इसके पीछे का असली विज्ञान आखिर क्यों होता है ऐसा.

Farming News: बारिश खेती के लिए जरूरी है लेकिन जब खेत में लगातार तेज बारिश हो जाए और मिट्टी लंबे समय तक पानी से भरी रहे तो यही पानी फसल के लिए परेशानी बन सकता है. इसका सीधा असर मिट्टी में मौजूद नाइट्रोजन पर भी पड़ता है. खास तौर उन खेतों में जहां बारिश के समय पहले से नाइट्रोजन वाली खाद डाली गई हो वहां इसके नुकसान के चांस ज्यादा बढ़ जाते है. मिट्टी में ज्यादा पानी भरने के बाद नाइट्रोजन दो तरीकों से कम हो सकती है. 

पहला तरीका लीचिंग है जिसमें पानी के साथ नाइट्रेट नीचे की परतों में चला जाता है. दूसरा डिनाइट्रीफिकेशन है जिसमें पानी से भरी मिट्टी में सूक्ष्मजीव नाइट्रेट को गैस में बदल देते हैं और यह नाइट्रोजन वातावरण में चली जाती है. हालांकि हर बारिश के बाद खेत में नाइट्रोजन की भारी कमी हो जाए ऐसा जरूरी नहीं है. कई बार ज्यादा नमी की वजह से पौधों की जड़ें कुछ समय के लिए कमजोर हो जाती हैं और पत्तियां पीली दिखाई देने लगती हैं. इसे तुरंत नाइट्रोजन की कमी मानकर खाद डालना सही फैसला नहीं है जानें पूरी खबर.

पानी भरने पर नाइट्रोजन मिट्टी से कैसे निकलती है?

मिट्टी में नाइट्रोजन कई तरीकों में मौजूद रहती है. पौधों के लिए मौजूद नाइट्रेट बारिश के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित होता है. जब खेत में पानी तेजी से नीचे जाता है तो नाइट्रेट भी पानी के साथ मिट्टी की गहराई में पहुंच सकता है. इसे लीचिंग कहा जाता है. हल्की और रेतीली मिट्टी में यह प्रोसेस ज्यादा तेज हो सकती है क्योंकि पानी आसानी से नीचे चला जाता है.

दूसरी तरफ भारी मिट्टी में पानी लंबे समय तक जमा रहने पर डिनाइट्रीफिकेशन की दिक्कत बढ़ सकती है. ऐसी सिचुएशन में मिट्टी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और सूक्ष्मजीव नाइट्रेट को गैसों में बदलने लगते हैं. यही गैसें धीरे धीरे मिट्टी से बाहर निकल जाती हैं. मिट्टी में जितने ज़्यादा समय तक पानी भरा रहेगा नाइट्रोजन के नुकसान का रिस्क उतना ही बढ़ता जाएगा.

आंकड़ों के मुताबिक करीब 55 से 60 डिग्री फारेनहाइट तापमान पर मिट्टी पांच दिन तक पानी से भरी रहने पर लगभग 10 प्रतिशत नाइट्रोजन नुकसान हो सकता है. दस दिन तक ऐसी हालत रहने पर नुकसान करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. गर्म मिट्टी में यह नुकसान और तेजी से बढ़ सकता है.


बारिश के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन क्यों कम हो जाती है, इससे कितना नुकसान?

इन कितनी नाइट्रोजन कम होगी 

बारिश के बाद हर खेत में नाइट्रोजन की कमी एक जैसी नहीं होती. इसका असर इस बात पर डिपेंड करता है कि बारिश से पहले कितनी नाइट्रोजन डाली गई थी और वह किस तरीके की थी. अगर खाद डालने के बाद ज्यादा समय नहीं हुआ है तो नुकसान का लेवल अलग हो सकता है. इसी तरह खेत में पानी कितने समय तक जमा रहा यह भी एक अहम रोल अदा करता है.

मिट्टी कैसी थी इस बात का भी फर्क पड़ता है. रेतीली मिट्टी में पानी तेजी से नीचे जाने की वजह से नाइट्रेट के लीचिंग का खतरा ज्यादा रहता है. भारी मिट्टी में लंबे समय तक पानी जमा रहने पर डिनाइट्रीफिकेशन बढ़ सकता है. पूरा खेत भी एक ही तरह जैसा प्रभावित नहीं होता. कहीं पानी जमा हो सकता है तो कहीं सिर्फ ज्यादा नमी हो सकती है. इसलिए पूरे खेत को एक जैसा मानकर एक्सट्रा खाद डालना सही तरीका नहीं है.

एक और जरूरी बात यह है कि बारिश के बाद फसल का पीला पड़ना हमेशा नाइट्रोजन की कमी का इशारा नहीं नहीं होता. ज्यादा पानी की वजह से जड़ों की ग्रोथ स्लो हो जाती है और पौधे कुछ समय के लिए पोषक तत्व कम ले पाते हैं. मिट्टी सूखने के बाद अगर जड़ें और पौधे ठीक से रिकवर कर लेते हैं तो स्थिति अपने आप बेहतर हो सकती है.

यह भी पढ़ें: मिट्टी का pH कितना होना चाहिए, किस फसल के लिए कितना सही?

बारिश के बाद किसान क्या करें?

बारिश खत्म होते ही तुरंत खेत में यूरिया या एक्सट्रा नाइट्रोजन डालना सही नहीं है. सबसे पहले यह देखें कि खेत में पानी कितनी देर तक जमा रहा फसल की हालत कैसी है और मिट्टी सूखने के बाद पौधे दोबारा ग्रोथ पकड़ रहे हैं या नहीं. अगर पौधे सिर्फ पानी के भराव की वजह से पीले दिख रहे हैं. तो कुछ दिन इंतज़ार करना ही समझदारी है.

अगर पानी लंबे समय तक भरा रहा है और नाइट्रोजन का भारी नुकसान हुआ है, तो ही एक्सट्रा नाइट्रोजन देने पर विचार करें. रिसर्च के मुताबिक, सही समय पर सीमित मात्रा में नाइट्रोजन देने से पानी की मार झेल चुकी फसल की पैदावार को बचाया जा सकता है. हालांकि इसकी मात्रा खेत की तत्कालीन स्थिति और पहले इस्तेमाल की गई फर्टिलाइजर पर निर्भर करेगी.


बारिश के बाद मिट्टी में नाइट्रोजन क्यों कम हो जाती है, इससे कितना नुकसान?

यह भी पढ़ें: IMD का ताजा अपडेट, बारिश देखकर बदलें खाद और सिंचाई का शेड्यूल

About the author नीलेश ओझा

नीलेश ओझा पिछले पांच साल से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उनकी लेखन शैली में तथ्यों की सटीकता और इंसानी नजरिए की गहराई दोनों साथ-साथ चलती हैं.पत्रकारिता उनके लिए महज़ खबरें इकट्ठा करने या तेजी से लिखने का काम नहीं है. वह मानते हैं कि हर स्टोरी के पीछे एक सोच होनी चाहिए.  

कुछ ऐसा जो पाठक को सिर्फ जानकारी न दे बल्कि सोचने के लिए भी मजबूर करे. यही वजह है कि उनकी स्टोरीज़ में भाषा साफ़ होती है.लिखने-पढ़ने का शौक बचपन से रहा है. स्कूल की नोटबुक से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे पेशेवर लेखन और पत्रकारिता तक पहुंचा. आज भी उनके लिए लेखन सिर्फ पेशा नहीं है यह खुद को समझने और दुनिया से संवाद करने का ज़रिया है.

पत्रकारिता के अलावा वह साहित्य और समकालीन शायरी से भी गहराई से जुड़े हुए हैं. कभी भीड़ में तो कभी अकेले में ख्यालों को शायरी की शक्ल देते रहते हैं. उनका मानना है कि पत्रकारिता का काम सिर्फ घटनाएं गिनाना नहीं है. बल्कि पाठक को उस तस्वीर के उन हिस्सों तक ले जाना है. जो अक्सर नजरों से छूट जाते हैं.

उन्होंने स्पोर्ट्सविकी, क्रिकेट एडिक्टर, इनशॉर्ट्स और जी हिंदुस्तान जैसे प्रमुख प्लेटफॉर्म्स के साथ काम किया है.

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Frequently Asked Questions

बारिश के कारण मिट्टी में नाइट्रोजन कैसे कम होती है?

यह लीचिंग (पानी के साथ नाइट्रेट का नीचे जाना) और डीनाइट्रिफिकेशन (सूक्ष्मजीवों द्वारा नाइट्रेट को गैस में बदलना) से होता है। लीचिंग हल्की मिट्टी में और डीनाइट्रिफिकेशन भारी, जलभराव वाली मिट्टी में अधिक होता है।

बारिश के बाद फसल का पीला पड़ना हमेशा नाइट्रोजन की कमी का संकेत है क्या?

नहीं, हमेशा नहीं। ज्यादा पानी की वजह से पौधों की जड़ें अस्थायी रूप से कमजोर हो जाती हैं और पत्तियां पीली दिख सकती हैं। मिट्टी सूखने के बाद पौधे अक्सर अपने आप ठीक हो जाते हैं।

मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी कितनी होगी, यह किन बातों पर निर्भर करता है?

यह बारिश से पहले डाली गई नाइट्रोजन की मात्रा, खेत में पानी कितने समय तक जमा रहा, मिट्टी के प्रकार (रेतीली या भारी) और तापमान पर निर्भर करता है।

तेज बारिश के बाद किसानों को अतिरिक्त खाद कब डालनी चाहिए?

तुरंत खाद न डालें। पहले खेत में पानी रुकने की अवधि, फसल की हालत और पौधों की रिकवरी देखें। यदि लंबा जलभराव रहा हो और नुकसान की संभावना हो, तभी फसल की ज़रूरत के अनुसार खाद डालें।

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