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Rooftop Solar vs Grid Power: क्या हैं दोनों के फायदे-नुकसान और कौन-सा ऑप्शन है सस्ता?

Rooftop Solar vs Grid Power: ग्रिड पावर कई मामलों में बेहतर है, लेकिन जब सस्ते-महंगे की बात आती है तो सोलर पैनल यूज करना काफी किफायती ऑप्शन बन जाता है.

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  • रूफटॉप सोलर बिजली को सीधे उपयोग, स्टोर या ग्रिड में भेजता है।
  • सोलर पैनल लगाने की शुरुआती लागत अधिक, पर यूनिट खर्च कम।
  • ग्रिड बिजली में कनेक्शन सस्ता, पर मासिक बिल और वृद्धि होती है।
  • सोलर पैनल 2-5 साल में लागत वसूल कर 20-25 साल चलता है।

Rooftop Solar vs Grid Power: पिछले कुछ समय से देश में सोलर पावर पर खूब जोर दिया जा रहा है. अब घरों से लेकर फैक्ट्रियों तक हर जगह सोलर पैनल नजर आ जाते हैं. कई लोगों ने पूरी तरह सोलर पावर पर स्विच कर लिया है, लेकिन ग्रिड से आने वाली बिजली की जरूरत अभी भी बनी हुई है. कई मामलों में ग्रिड से आने वाली पावर सप्लाई का कोई मुकाबला नहीं है, लेकिन अगर लागत का हिसाब देखा जाए तो सोलर पावर सिस्टम किफायती रहता है. आज हम सोलर पावर और ग्रिड पावर के फायदे-नुकसान समझेंगे और जानेंगे कि दोनों में से कौन-सा ऑप्शन सस्ता पड़ता है.

Rooftop Solar vs Grid Power

काम करने का तरीका- घर की छत पर लगे सोलर पैनल सनलाइट को बिजली में कन्वर्ट कर देते हैं. फिर एक इन्वर्टर की मदद से इसे घरों के अप्लायंसेस चलाने लायक बनाया जाता है. इसे स्टोर करने के साथ-साथ ग्रिड में भी भेजा जा सकता है. वहीं अगर ग्रिड पावर की बात करें तो यह पावर प्लांट में जनरेट होती है और हाई-वॉल्टेज लाइन्स के जरिए सबस्टेशन के जरिए घरों तक पहुंचाई जाती है.

लागत- अपफ्रंट लागत की बात करें तो सोलर पैनल महंगे पड़ते हैं. यानी सोलर एनर्जी सिस्टम लगाना काफी महंगा है. इसे इंस्टॉल करने में प्रति किलोवॉट 45,000-60,000 रुपये तक का खर्चा आता है, जबकि ग्रिड पावर में ऐसा कोई झंझट नहीं है. कनेक्शन लेने के लिए शुरुआत में कुछ सिक्योरिटी अमाउंट जमा करवाना पड़ता है. बाकी खर्चा बिजली सप्लाई करने वाली कंपनियां या सरकार उठाती है.

यूनिट के हिसाब से लागत- पावर ग्रिड से बिजली लेने पर 6-15 रुपये प्रति किलोवॉट के हिसाब से बिल चुकाना पड़ सकता है. यह राज्यों या कंपनियों के हिसाब से अलग-अलग हो सकता है. इसके अलावा इसमें आमतौर पर हर साल बढ़ोतरी भी हो सकती है. वहीं सोलर पैनल में बिल का झंझट नहीं रहता. अगर इसके कुल खर्चे से औसत निकाली जाए तो एक यूनिट का खर्च 3-4 रुपये के बीच आता है. 

कितने समय में पूरी हो जाती है लागत? 

सोलर पैनल की लागत आमतौर पर 2-5 साल में पूरी निकल आती है. यह बिजली के यूसेज के साथ सब्सिडी पर भी निर्भर करता है. वहीं पावर ग्रिड में यह पैरामीटर लागू नहीं होता. इसमें जब तक बिजली यूज होती रहेगी, हर महीने के हिसाब से बिल देना पड़ेगा. 

कौन-सा ऑप्शन है सस्ता?

इंस्टॉलेशन के मामले में सोलर एनर्जी सिस्टम महंगा पड़ता है, लेकिन यह लागत 2-5 साल में पूरी हो जाती है. एक बार इंस्टॉल करने के बाद यह सिस्टम आसानी से 20-25 साल तक चल सकता है. इस लिहाज से आप आसानी से 20 साल तक एकदम सस्ती बिजली यूज कर पाएंगे. दूसरी तरफ ग्रिड पावर के चार्ज लगातार बढ़ते रहते हैं. इस तरह 20-25 साल के हिसाब से ग्रिड पावर ज्यादा महंगी पड़ती है.

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