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Lithium-ion vs Lead-acid Batteries: सोलर एनर्जी सिस्टम के लिए कौन-सा ऑप्शन रहेगा बेस्ट? यहां जानें

Best Solar Battery: अगर आपने घर पर सोलर सिस्टम लगवाया है और बैटरी चुनने में कंफ्यूज हो रहे हैं तो हम आपके लिए Lithium-ion और Lead-acid बैटरी का पूरा कंपेरिजन लेकर आए हैं.

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  • सोलर सिस्टम हेतु लिथियम-आयन और लेड-एसिड बैटरी विकल्प।
  • लिथियम-आयन महंगी है, जबकि लेड-एसिड सस्ती उपलब्ध है।
  • लिथियम-आयन तेज चार्ज होती, लंबा चलती और रखरखाव कम।
  • समग्रतः लिथियम-आयन सोलर सिस्टम हेतु एक बेहतर विकल्प है।

Best Solar Battery: अगर आप अपने घर की बिजली की जरूरतों के लिए ग्रिड पर डिपेंड नहीं रहना चाहते तो हाइब्रिड या ऑफ-ग्रिड सोलर सिस्टम आपके काम आ सकता है. सही बैटरी के साथ यह आपको एनर्जी इंडिपेंडेंट बना देगा. ऐसे में सवाल उठता है कि घर पर लगे सोलर सिस्टम के लिए कौन-सी बैटरी इस्तेमाल करनी चाहिए. अगर मार्केट में मौजूदा ऑप्शन को देखें तो Lithium-ion और Lead-acid बैटरी के बीच ही कंपीटिशन रहता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि दोनों तरह की बैटरियां कैसे काम करती हैं और इनमें से किसकी लागत कम है और फायदे ज्यादा हैं.

Lithium-ion बैटरी कैसे काम करती है?

Lithium-ion बैटरी में कैथोड पर लिथियम आयरन फॉस्फेट और निकल मैंग्नीज कॉबाल्ट जैसे लिथियम कंपोनेंट लगे होते हैं, जबकि एनोड पर ग्रेफाइट होता है. यह फास्ट मूविंग लिथियम आयन को यूज कर एनर्जी स्टोर करती है. जब सोलर पैनल से बिजली बनती है तो लिथियम आयन पॉजिटिव प्लेट से नेगेटिव प्लेट की तरफ जाते हैं. जब यह स्टोर एनर्जी को यूज करती है तो आयन वापस नेगेटिव प्लेट से पॉजीटिव प्लेट की तरफ आते हैं.

Lead-acid बैटरी के काम करने का तरीका क्या है?

अगर Lead-acid बैटरी की बात करें तो पॉजीटिव और नेगेटिव दोनों ही लीड प्लेट होती हैं, जिन्हें सल्फरिक एसिड के बीच रखा जाता है, जो इलेक्ट्रोलाइट का काम करता है. जब बैटरी चार्ज होती है तो लीड प्लेट्स और एसिड के बीच रिएक्शन होती है. जब ये बैटरी डिस्चार्ज होती है तो यह रिएक्शन रिवर्स हो जाती है.

दोनों में किसकी लागत कम है?

कीमत के मामले में लिथियम-आयन बैटरी महंगी पड़ती है. अगर kWh के हिसाब से देखें तो लिथियम-आयन बैटरी की कीमत लगभग 15,000-20,000 रुपये प्रति kWh आती है. इसकी तुलना में लीड-एसिड बैटरी लगभग 8,000-12,000 रुपये प्रति kWh के हिसाब से मिल जाएगी. अब सवाल उठता है कि क्या कीमत कम होने के कारण लीड-एसिड बैटरी सही ऑप्शन है? इसका जवाब है कि अगर आप सिर्फ अपफ्रंट कीमत देख रहे हैं तो ये बैटरी आपके लिए सही है, लेकिन इसके कई नुकसान भी हैं.

किसके फायदे ज्यादा हैं?

लिथियम-आयन बैटरी की शुरुआती लागत भले ही ज्यादा है, लेकिन इसके फायदों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. लिथियम-आयन बैटरी लीड बैटरी की तुलना में जल्दी चार्ज होती है और इसकी लाइफ भी ज्यादा होती है. लीड बैटरी जहां 3-5 साल चलती है, वहीं लिथियम-बैटरी 10 साल से ज्यादा चल जाती है. इसी तरह लिथियम बैटरी लीड बैटरी की तुलना में साइज में छोटी और वजन में हल्की होती है. लीड बैटरी को बार-बार देखरेख की जरूरत पड़ती है और लिथियम बैटरी में ऐसा झंझट नहीं होता. लिथियम बैटरी पर ब्लूटूथ से ही नजर रखी जा सकती है. इस तरह देखा जाए तो सोलर सिस्टम के लिए लिथियम-आयन बैटरी एक बेहतर ऑप्शन है.

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इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन से पढ़ाई पूरी करने के बाद पिछले एक दशक से मीडिया इंडस्ट्री में सक्रिय हूं. फिलहाल एबीपी न्यूज के साथ काम कर रहा हूं और यहां टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरों, गैजेट्स, ऐप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सोशल मीडिया और डिजिटल ट्रेंड्स पर लिख रहा हूं. फ्यूचर टेक, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया से जुड़े टॉपिक्स में विशेष रुचि है. पिछले 10 वर्षों में नेशनल, पॉलिटिक्स, इंटरनेशनल, ऑटो, बिजनेस और टेक समेत कई बीट्स पर काम करने का अनुभव रहा है. इस दौरान टाइम्स इंटरनेट, दैनिक जागरण और न्यूजबाइट्स जैसे कई मीडिया संस्थानों में काम करने का अवसर मिला. 

विभिन्न बीट्स पर काम करने के अनुभव ने खबरों को अलग-अलग नजरिए से समझने और पेश करने की समझ दी. रिपोर्टिंग और कंटेंट लिखने के दौरान हमेशा कोशिश रही कि खबरों को आसान और भरोसेमंद तरीके से रीडर तक पहुंचाया जाए. 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान ग्राउंड रिपोर्टिंग करने और कई नेताओं के इंटरव्यू लेने का भी अवसर मिला. 

काम के सिलसिले में कई बड़े कार्यक्रमों, प्रेस कॉन्फ्रेंस और विशेष आयोजनों को कवर करने का मौका मिला, जहां अलग-अलग पहलुओं को समझने का अवसर मिला. डिजिटल मीडिया के लगातार बदलते दौर में नई चीजें सीखने और खुद को अपडेट रखने की कोशिश रहती है, ताकि कंटेंट को बेहतर और रीडर के समझने के लिए आसान बनाया जा सके.

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